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गुप्तोत्तर काल

5वी शताब्दी के आस-पास गुप्त साम्राज्य का पतन होना प्रारंभ हो गया था।
Apr 22, 2014 17:21 IST
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5वी शताब्दी के आस-पास गुप्त साम्राज्य का पतन होना प्रारंभ हो गया था। गुप्त साम्राज्य के पतन के  साथ ही मगध एवं उसकी राजधानी पाटलिपुत्र ने भी अपना महत्व खो दिया। इसीलिए गुप्तोत्तर काल पूरी तरह से संघर्ष से भरा पड़ा है। गुप्तो के पतन के परिणामस्वरूप उत्तरी भारत में  5 शक्तिशाली साम्राज्यों के उद्भव हुआ ये राज्य निम्नलिखित हैं।

1-हूण - हूण मध्य एशिया की सामान्य जनजातियां थी जो की भारत आई थीं। कुमारगुप्त के काल में हूणों ने पहली बार भारत पर आक्रमण किया था, यद्यपि वे कुमारगुप्त और स्कन्दगुप्त के काल में सफल तो नहीं हो पाए लेकिन फिर भी भारत में उनका प्रवेश संभव हुआ। हूणों ने बहुत अल्प काल तक (30 साल)भारत में शासन किया .फिर भी उत्तरी भारत में उन्होंने अपनी शक्ति को स्थापित किया।
तोरमाण उनका सबसे शक्तिशाली राजा और मिहिरकुल उनका सबसे संस्कृति सम्पन्न शासक था।
2.मौखरी-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कन्नौज के आस-पास मौखरियों का शासन था। उन्होंने भी मगध के कुछ हिस्सों पर विजय प्राप्त किया था। क्रमश: उत्तरी गुप्त शासको के द्वारा वे पराजित हुए और मालवा की तरफ निष्कासित कर दिए गए।
3. मैत्रक- मैत्रको के बारे में यह संभावना लगाई जाती है की ये ईरान के रहने वाले थे और गुजरात में सौराष्ट्र क्षेत्र में शासन किया था। उनकी राजधानी बल्लभी थी। इनके शासन काल में वल्लभी ने कला ,संस्कृति,व्यापार,वाणिज्य आदि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जिसने अरबो के आक्रमण तक अपनी उपस्थिति बनाये रखा।
4.पुष्यभूति- पुष्यभूतियो की राजधानी थानेश्वर(उत्तरी दिल्ली) थी। प्रभाकर बर्धन इस साम्राज्य का सबसे मह्त्वपूर्ण शासक था। उसने परम भट्टारक महाराजाधिराज नामक उपाधि धारण की थी। मौखरियो के साथ उनके वैवाहिक सम्बन्ध थे। वैवाहिक संबंधो की वजह से दोनों साम्राज्यों की शक्ति में वृद्धि हुई। हर्षबर्धन इसी गोत्र से सम्बन्ध रखता था।
5. गौड़- गौडो ने बंगाल के ऊपर शासन किया था। उपरोक्त चार राज्यों में ये सबसे छोटे राज्य थे। गौडो का सबसे महत्वपूर्ण और शास्क्तिशाली राजा शशांक था। उसने मौखरियो के ऊपर आक्रमण करके ग्रहवर्मन को को पराजित किया और राज्यश्री को बंदी बना लिया।

महत्वपूर्ण साम्राज्य और शासक:
हर्षबर्धन का साम्राज्य-
हर्षबर्धन(606- 647 ईस्वी): हर्षबर्धन ने 1400 वर्ष पूर्व शासन किया था। बहुत सारे ऐतिहासिक स्रोत हर्षबर्धन के साम्राज्य के बारे में उल्लेख करते है।
ह्वेनसांग- इसने सी-यू-की नामक ग्रन्थ की रचना की थी।
बाणभट्ट-इन्होने हर्षचरित्र(हर्षबर्धन के उत्कर्ष और उसके साम्राज्य,शक्ति और उसकी आत्मकथा का उल्लेख) कादम्बरी और प्रभावती परिणय की रचना की थी।
हर्ष के रचना-हर्ष ने स्वयं राजनितिक परिस्थितियों का वर्णन करने के लिए रत्नावाली,नागानंद, और प्रियदर्शिका की रचना की थी। हर्षबर्धन ने स्वयं हरिदत्त और जयसेन को संरक्षण दिया था।
हर्ष की शक्ति का उत्कर्ष- अपने बड़े भाई राज्यबर्धन र्धन की मृत्यु के बाद हर्ष 606 ईस्वी में राजा बना। राजा बनाने के बाद उसने अपने भाई की मौत का बदला लेने और अपनी बहन को मुक्त कराने के लिए  बंगाल के राजा शशांक के बिरुद्ध एक बृहद अभियान का नेतृत्व किया। गौडो के विरुद्ध अपने प्रथम अभियान में वह असफल रहा लेकिन जल्दी ही उसने अपने साम्राज्य का बिस्तार किया।

हर्षबर्धन का प्रशासन-

अधिकारी प्रशासन का क्षेत्र
महासंधि बिग्राहक शांति और युद्ध का सबसे बड़ा अधिकारी
महाबलाधि कृत थल सेना का प्रमुख अधिकारी
बलाधिकृत कमान्डर
आयुक्तक सामान्य अधिकारी
वृहदेश्वर अश्व सेना का प्रमुख
दूत राजस्थारुया विदेश मंत्री
कौतुक हस्ती सेना का प्रमुख
उपरिक महाराज
राज्य प्रमुख