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जैन धर्म

जैन को जीन के अनुयायी के तौर पर परिभाषित किया जाता है | जीन का अर्थ है विजेता | जैन धर्म बौद्ध धर्म से कई सदी पहले शुरू हो गया था परंतु बाद में महावीर के द्वारा इसे पुनर्जीवित किया गया, जोकि 24वें तीर्थंकार थे| जैन सिद्धांतों के अनुसार, जैन धर्म सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है जिसकी ना ही शुरुआत है और ना ही अंत है |
Nov 6, 2015 17:17 IST
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जैन धर्म भारत का प्राचीन धर्म है जोकि हमें मोक्ष के रास्ते के बारे में बताता है और जीवन को हानिहीनता और त्याग के साथ खुशी से जीना है | जैन जीवन का प्रमुख उद्देश्य मोक्ष प्राप्ति है |  जैन को जीन के अनुयायी  के तौर पर परिभाषित किया जाता है | जीन का अर्थ है विजेता | जैन धर्म बौद्ध धर्म से कई सदी पहले शुरू हो गया था परंतु बाद में महावीर के द्वारा इसे पुनर्जीवित किया गया, जोकि 24वें तीर्थंकार थे | जैन सिद्धांतों के अनुसार , जैन धर्म सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है जिसकी ना ही शुरुआत है और ना ही अंत  है |

जैन धर्म को वैसा शाही संरक्षण प्राप्त नहीं था जैसा कि बौद्ध धर्म को था | हालांकि भिक्षु सक्रिय थे और जैन धर्म को पूरे भारत में फैलाने के लिए एकजुट हो गए | मगध से जैन मथुरा के पश्चिम क्षेत्र की तरफ चले गए और फिर उज्जैन और आखिर में सौराष्ट्र के पश्चिमी तट पर बस गए |

प्रथम सदी ईश्वी के अंत में इस धर्म को विभाजन का सामना करना पड़ा | रूढ़िवादि जैनियों को दिगंबर (आकाश धारक )के नाम से जाना गया और उदार वालों को श्वेतांबर(श्वेत वस्त्र धारक ) के नाम से जाना गया | इन दोनों संप्रदायों के बीच मामूली सा अंतर है |

केवल्य ज्ञान क्या है ?

केवल्य ज्ञान पूर्ण ज्ञान है , प्रबोध और सर्वज्ञता है | केवलिन वह होता है जो केवल्य ज्ञान को प्राप्त कर लेता है | जीन के दर्जे को पाने के लिए सबसे पहले केवलय ज्ञान चाहिए होता है |

जैन विश्व विज्ञान

जैन विश्व विज्ञान बताता है कि विश्व छः तत्वों से बना है :

  1. जीव: सभी जीवित वस्तुएं
  2. अजीव : अजीव में सभी निर्जीव वस्तुएं आती हैं |
  3. पुदुगल : इसका अर्थ है द्रव्य
  4. धर्म तत्त्व : इसका अर्थ है गति का सूत्र
  5. अधर्म तत्व : इसका अर्थ है ठहराव का सूत्र  
  6. आकाश : इसका अर्थ है जगह
  7. काल : इसका अर्थ है समय

महाव्रत

जैन धर्म में 5 महाव्रत निम्न हैं :

  1. अहिंसा
  2. सत्य
  3. अस्तेय
  4. ब्रहमचर्या
  5. अपरिग्रह

त्रिरत्न

जैन धर्म से जुड़े त्रिरत्न निम्न हैं :

  1. सम्यक ज्ञान : इसका अर्थ है सही जानकारी 
  2. सम्यक दर्शन : इसका अर्थ है सही दृष्टिकोण
  3. सम्यक आचरण : इसका अर्थ है सही आचरण