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भारतीय रक्षा क्षेत्र के विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.) की क्या भूमिका है?

रक्षा प्रणालियों के डिजायन एवं विकास के लिए समर्पित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.) की स्थापना पहले से कार्यरत भारतीय सेना के प्रौद्योगिकी विकास अधिष्ठान (टीडीई) तथा रक्षा विज्ञान संस्थान (डीएसओ) के साथ प्रौद्योगिकी विकास और उत्पादन निदेशालय (डीटीडीपी) को एकीकृत कर वर्ष 1958 में की गयी थी| डीआरडीओ, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है, रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के अधीन काम करता है|
Mar 4, 2016 17:16 IST
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.) की स्थापना पहले से कार्यरत भारतीय सेना के प्रौद्योगिकी विकास अधिष्ठान (Technical Development Establishment -TDE) तथा रक्षा विज्ञान संस्थान (Defence Science Organisation-DSO) के साथ प्रौद्योगिकी विकास और उत्पादन निदेशालय (Directorate of Technical Development and Production-DTDP) को एकीकृत कर वर्ष 1958 में की गयी थी | डीआरडीओ, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है, रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के अधीन काम करता है|

डीआरडीओ रक्षा प्रणालियों के डिजायन एवं विकास के लिए  समर्पित संस्थान है और तीनों रक्षा सेवाओं की अभिव्यक्त गुणात्मक आवश्यकताओं के अनुसार  विश्व स्तर के हथियार प्रणालियों और उपकरणों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है |इसकी स्थापना के समय इसके पास केवल 10 प्रयोगशालाएँ या स्थापनाएं थी, लेकिन वर्तमान में इनकी संख्या 50 से भी अधिक है |

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का दृष्टिकोण

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.) का दृष्टिकोण निम्नलिखित है:

"विश्व-स्तरीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीय आधार स्थापित कर भारत को समृद्ध बनाना और अपनी रक्षा सेना को अंतर्राष्ट्रीय रूप से प्रतिस्पर्धी प्रणालियों और समाधानों से लैसकर उन्हें निर्णायक लाभ प्रदान करना।"

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का ध्येय

  • अपनी रक्षा सेवाओं के लिए अत्याधुनिक सेंसर, शस्त्र प्रणालियां, मंच (Platforms) और सहयोगी उपकरण (Allied Equipment) आदि की डिजायन तैयार करना, उन्हें विकसित करना और उन्हें उत्पादन के लिए तैयार करना।
  • संग्रामी प्रभावकारिता (Combat Effectiveness) अधिकतम करने और सैनिकों की बेहतरी को बढ़ावा देने के लिए रक्षा सेवाओं को तकनीकी समाधान (Technological Solutions) प्रदान करना।
  • आवसंरचना (Infrastructure) तथा गुणवत्तापूर्ण प्रतिबद्ध श्रमशक्ति (Committed Quality Manpower) विकसित करना और मजबूत प्रौद्योगिकी आधार निर्मित करना।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.) द्वारा विकसित मिसाइलों की जानकारी

अग्नि-I

I. अग्नि-I 15 मी. ऊँची,एक चरण से युक्त, ठोस ईंधन चालित मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है |

II. इसकी मारक क्षमता 700-800 किमी. है|

अग्नि-II

यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है,जिसकी मारक क्षमता 2000-3000 किमी. है|  

अग्नि-III

यह इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है,जिसकी मारक क्षमता 3000-5500 किमी. है|

अग्नि-V

यह भारत की अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है,जिसकी मारक क्षमता 5000-6000 किमी. है|

पृथ्वी-I (SS-150)

इस थल सेना संस्करण की मारक क्षमता 150 किमी. है और पेलोड क्षमता 1000 किग्रा. है |                

पृथ्वी-II (SS-250)

इस वायु सेना संस्करण की मारक क्षमता 250 किमी. है और पेलोड क्षमता 500 किग्रा. है |   

 

धनुष (SS-350)

  1. यह पृथ्वी- III का नौसैनिक संस्करण  है, जिसे जहाज से छोड़ा जा सकता है |
  2. इसकी मारक क्षमता 350 किमी. है |
  3. यह 500 किग्रा. तक के परंपरागत और नाभिकीय वारहेड (warhead) को अपने साथ ले जा सकता है| 

अस्त्र

  1. अस्त्र दृश्य सीमा से परे (Beyond Visual Range) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है |
  2. अस्त्र मिसाइल सुपरसोनिक गति से शत्रु के विमान को बीच में ही रोक सकती है | इसकी मारक क्षमता हेड ऑन मोड (Head-On Mode) में 80 किमी. और टेल-चेस मोड (Tail-Chase Mode) में 20 किमी. है |

त्रिशूल

               

  1. त्रिशूल निम्न दूरी की त्वरित प्रतिक्रिया युक्त, सभी मौसमों में धरातल से हवा में मार करने में सक्षम मिसाइल है, जिसका विकास कम ऊँचाई वाले हमलों से सुरक्षा के लिए किया गया है|               
  2. इसकी मारक क्षमता 9 किमी. है |

आकाश

 

  1. आकाश मध्यम दूरी की धरातल से हवा में मार करने वाली है |
  2. यह 18000 मी. की ऊँचाई पर लक्ष्य को 30 किमी. की दूरी से ही भेद सकता है  |
  3. यह 50 किग्रा. वजन तक के पेलोड को अपने साथ ले जा सकती है |

ब्रह्मोस

  1. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पनडुब्बियों, पानी के जहाजों, हवाई जहाजों या भूमि कहीं से भी छोड़ा जा सकता है |
  2. यह भारत के डी.आर.डी.ओ. और रूस के एन.पी.ओ. माशीनोस्ट्रोयेनिया (Mashinostroeyenia) का संयुक्त उद्यम है | इन्होंने आपस में मिलकर ‘ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड’ की स्थापना की है |
  3. रूस की ‘मास्कोवा’ और भारत की ‘ब्रह्मपुत्र’ नदी के नाम को जोड़कर इसका नाम ‘ब्रह्मोस’ रखा गया है |
  4. इसकी मारक क्षमता 290 किमी. और गति 2.8 मैक है |

नाग

  1. तीसरी पीढ़ी की नाग मिसाइल एक टैंक रोधी मिसाइल है, जो ‘दागो और भूल जाओ’ के सिद्धान्त पर कार्य करती है |
  2. इस मिसाइल के धरातलीय संस्करण की मारक क्षमता 4-6 किमी. और वायु संस्करण की मारक क्षमता 7-8 किमी. है | 42 किग्रा. वजन वाली यह मिसाइल 230 मी./से. की गति से उड़ सकती है |

सागरिका

  1. यह नाभिकीय क्षमता से युक्त पनडुब्बी से धरतलीय (submarine to surface ) बैलिस्टिक मिसाइल है, लगभग 6.5 मी. लंबी और 7 टन वजनी है |
  2. इसकी मारक क्षमता 750 किमी. है और यह 500 किग्रा. तक के पेलोड (payload ) को अपने साथ ले जा सकती है |

शौर्य

  1. यह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल है, जिसे कनस्तर (canister) से प्रक्षेपित किया जाता है |
  2. इसकी मारक क्षमता 750-1900 किमी. है |
  3. पृथ्वी और अग्नि के विपरीत इसे भूमिगत साइलो (silos) से भी छोड़ा जा सकता है |
  4. यह एक टन भार के परंपरागत और नाभिकीय हथियारों को अपने साथ ले जाने में सक्षम है |
  5. इस मिसाइल ने भारत को जरूरी द्वितीय प्रहार क्षमता (Second Strike Capability) प्रदान की है |

निर्भय

  1. यह विकासधीन लंबी दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइल है |
  2. इसकी मारक क्षमता 1000 किमी. और गति 0.7 मैक होगी |