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भारत की करेंसी नोटों का इतिहास और उसका विकास |

रुपए शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द रुपिया से हुई है जिसका अर्थ है सही आकार एवं मुहर लगा हुआ मुद्रित सिक्का। इसकी उत्पत्ति संस्कृत शब्द रुपया से भी हुई है जिसका अर्थ चांदी होता है। भारत में रुपये के संदर्भ में संघर्ष, खोज और संपत्ति का बहुत लंबा इतिहास रहा है, जो प्राचीन भारत के 6ठी सदी ईसा पूर्व से चला आ रहा है। पेपर करेंसी कानून 1861 ने सरकार को ब्रिटिश भारत के विशाल क्षेत्र में नोट जारी करने का एकाधिकार दिया था ।
Aug 31, 2016 17:19 IST

"रुपए" शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द रुपिया से हुई है जिसका अर्थ है सही आकार एवं मुहर लगा हुआ मुद्रित सिक्का। इसकी उत्पत्ति संस्कृत शब्द "रुपया" से भी हुई है जिसका अर्थ चांदी होता है। रुपये के संदर्भ में संघर्ष, खोज और संपत्ति का बहुत लंबा इतिहास रहा है, जो प्राचीन भारत के 6ठी सदी ईसा पूर्व से चला आ रहा है। 19वीं सदी में ब्रिटिशों ने इस उपमहाद्वीप में कागज के पैसों की शुरुआत की। पेपर करेंसी कानून 1861 ने सरकार को ब्रिटिश भारत के विशाल क्षेत्र में नोट जारी करने का एकाधिकार दिया था।

नीचे भारतीय करेंसी नोटों के वक्त के साथ विकास करने और उसके वर्तमान स्वरूप के बारे में रोचक तथ्य दिए जा रहे हैं।

वर्ष 1862 में महारानी विक्टोरिया के सम्मान में, विक्टोरिया के चित्र वाले बैंक नोटों और सिक्कों की श्रृंखला जारी की गई थी।

अंततः 1935 . में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना हुई और उसे भारत सरकार के नोटों को जारी करने का अधिकार दिया गया। रिजर्व बैंक ने 10,000 रुपयों का भी नोट छापा और स्वतंत्रता के बाद इसे बंद कर दिया। आरबीआई द्वारा जारी की गई पहली करेंसी नोट 5 रुपये की नोट थी जिस पर किंग जॉर्ज VI की तस्वीर थी। यह नोट 1938 में छापा गया था।

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वर्ष 1947 में स्वतंत्रता के बाद और 1950 के दशक में जब भारत गणराज्य बन गया, भारत के आधुनिक रुपये ने अपना डिजाइन फिर से प्राप्त कियाकागज के नोट के लिए सारनाथ के चतुर्मुख सिंह वाले अशोक के शीर्षस्तंभ को चुना गया था। इसने बैंक के नोटों पर छापे जा रहे जॉर्ज VI का स्थान लिया। इसप्रकार स्वतंत्र भारत में मुद्रित पहला बैंक नोट 1 रुपये का नोट था।

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वर्ष 1969 में भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 और 10 रुपयों के नोट पर महात्मा गांधी जन्मशती स्मारक डिजाइन वाली श्रृंखला जारी की थी। 

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और दिलचस्प बात यह है कि चलती नाव का चित्र 10 रुपए के नोट पर 40 से भी अधिक वर्षों तक चलता रहा।

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वर्ष 1959 में भारत के हज यात्रियों के लिए दस और एक सौ रुपये के विशेष नोट जारी किए गए ताकि वे सउदी अरब के स्थानीय मुद्रा से उसका विनिमय कर सकें।

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यहां तक कि 1917-1918 में हैदराबाद के निजाम को खुद की करेंसी मुद्रित और जारी करने का विशेषाधिकार दिया गया था।    

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प्रथम विश्व युद्ध में, धातु की कमी के कारण मोरवी और ध्रांगधारा रियासतों ने कम मूल्य वाले करेंसी नोट जारी किए। इन्हें हरवाला कहा जाता था।             

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दूसरे विश्व युद्ध के दौरान धातु की कमी की ही वजह से, 36 रियासतों खासकर गुजरात, राजस्थान, सिंध, बलूचिस्तान और मध्य प्रांतों ने, सिक्कों के स्थान पर कागज के टोकन जारी किए।

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अंततः 1996 में महात्मा गांधी श्रृंखला वाले कागज के नोट शुरु किए गए।                                  

हम हमेशा हमारे नोटों पर महात्मा गांधी की मुस्कुराती हुई तस्वीर देखते हैं जो करेंसी नोटों पर भी होती है। कुछ लोगों का कहना है कि महात्मा गांधी की यह तस्वीर उनके एक कार्टून का है लेकिन यह सत्य नहीं है। वास्तव में यह तस्वीर 1946 में एक अज्ञात फोटोग्राफर ने ली थी और वहीं से इसे क्रॉप किया गया और हर जगह इस्तेमाल किया जाने लगा। तस्वीर नीचे दी गई हैः

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महात्मा गांधी लॉर्ड फ्रेड्रिक विलियम पेथिकलॉरेंस के साथ खड़े थे। वह एक महान राजनेता थे और ग्रेट ब्रिटेन में महिला मताधिकार आंदोलन का भी नेता थे। यह तस्वीर भूतपूर्व वायसराय हाउस जो वर्तमान में राष्ट्रपति भवन है, में ली गई थी। इस तस्वीर का इस्तेमाल आरबीआई द्वारा 1996 में महात्मा गांधी सीरीज के बैंक नोटों पर किया गया।

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नवंबर 2001 में, 5 रुपये के नोट, जिसमें सामने महात्मा गांधी जी की तस्वीर होती थी और पीछे की तरफ मशीनीकृत खेती प्रक्रिया यानि कृषि के माध्यम से प्रगति, दिखाई देती थी, को जारी किया गया था ।  

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जून 1996 में, दस रुपये का नोट जारी किया गया। इसमें सामने की तरफ गांधी जी की तस्वीर और पीछे की तरफ भारत के जीवों की तस्वीर थी जो यहाँ की जैवविविधता का प्रतिनिधत्व करता है।

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इससे पहले 1981 में 10 रु. के नोट पर सामने की तरफ सिंहचतुर्मुख का प्रतीक और पीछे की तरफ हमारे राष्ट्रीय पक्षी मोर पर बनी कलाकृति होती थी।

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अगस्त 2001 में 20 रु. का नोट जारी किया गया। इसमें सामने की तरफ गांधी जी की तस्वीर थी और पीछे की तरफ पोर्टब्लेयर के मेगापोड रिसॉर्ट से दिखाई देने वाले माउंट हैरिएट के खजूर के पेड़ और पोर्ट ब्लेयर लाइटहाउस की तस्वीर थी।

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इससे पहले 1983-84 में, 20 रु. के नोट जारी किए गए थे जिसके पीछे की तरफ बौद्ध चक्र बना हुआ था।

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मार्च 1997 में, 50 रु. का नोट जारी किया गया जिसमें सामने की तरफ महात्मा गांधी और पीछे की तरफ भारत के संसद की तस्वीर थी।

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जून 1996 में 100 रु. का नोट जारी कया गया। इसमें सामने की तरफ महात्मा गांधी और पीछे की तरफ हिमालय पर्वत श्रृंखला की तस्वीर थी ।

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अक्टूबर 1997 में 500 रुपये. का नोट जारी किया गया। इसमें सामने की तरफ महात्मा गांधी और पीछे की तरफ दांडी मार्च यानि नमक सत्याग्रह की तस्वीर थी। इस सत्याग्रह की शुरूआत 12 मार्च, 1930 को गांधीजी ने भारत में अंग्रेजों के नमक वर्चस्व के खिलाफ कि थी, जिसे सबसे व्यापक सविनय अवज्ञा आंदोलन माना जाता है। इस आंदोलन में गांधीजी और उनके अनुयायियों ने अहमदाबाद के पास स्थित साबरमती आश्रम गुजरात के नवसारी स्थित तटीय गांव दांडी तक की पद यात्रा की और ब्रिटिश सरकार को कर का भुगतान किए बगैर नमक तैयार किया। इस तरह गांधी जी ने 5 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ा था।

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नवंबर 2000 में, 1000 रुपये का नोट जारी किया गया। इसमें सामने की तरफ गांधीजी और पीछे की तरफ भारत की अर्थव्यवस्था को दर्शाती अनाज संचयन यानि कृषि क्षेत्र, तेल, विनिर्माण क्षेत्र, अंतरिक्ष उपग्रह, विज्ञान और अनुसंधान, धातुकर्म, खान और खनिज एवं कंप्यूटर पर काम करती लड़की की तस्वीर है।

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वर्ष 2000 के बाद के भारतीय करेंसी नोटों का विवरण नीचे तालिका के रूप में दिया गया है।

मान

पीछे की तस्वीर

रंग

5 रुपये (2001)

ट्रैक्टर

हरा

10 रुपये (2010)

गैंडा, हाथी, बाघ

नारंगी– बैंगनी

20 रुपये (2001)

खजूर का पेड़

लाल–नारंगी

50 रुपये (2007)

भारतीय संसद

बैंगनी

100 रुपये (2007)

हिमालय पर्वतमाला

बीच में नीला– हरा, किनारों पर भूरा– बैंगनी

500 रुपये (2008)

दांडी मार्च

जैतून जैसा पीला

1000 रुपये (2009)

भारतीय अर्थव्यवस्था

गुलाबी

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सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री : आधुनिक भारत का इतिहास, मध्यकालीन भारत का इतिहास, प्राचीन भारत का इतिहास