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मध्य पूर्वी श्वसन (रेस्पिरेटरी) सिंड्रोम (एमईआरएस)

एक अनूठे कोरोनावायरस को मध्य पूर्व रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस (MERS-CoV)  कहा जाता है जिसे पहली बार 2012 में सऊदी अरब में पाया गया तत्पश्चात् यह संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई अन्य देशों में फैल गया था। मेर्स- कॉव (Mers-cov) से संक्रमित अधिकांश लोगों को बुखार, खांसी, और सांस की तकलीफ सहित गंभीर श्वसन बीमारी तेजी से होती है। कुछ समय पहले यह वायरस दक्षिण कोरिया में सक्रिय था।
Dec 9, 2015 11:55 IST
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एक अनूठा कोरोनावायरस को "मध्य पूर्व रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस" (Mers-cov) कहा जाता है जिसे पहली बार 2012 में सऊदी अरब में पाया गया तत्पश्चात् यह संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई अन्य देशों में फैल गया था। मेर्स- कॉव (Mers-cov) से संक्रमित अधिकांश लोगों को बुखार, खांसी, और सांस की तकलीफ सहित गंभीर श्वसन बीमारी तेजी से होती है। कुछ समय पहले यह वायरस दक्षिण कोरिया में सक्रिय था।

कोरोनावायरस आम वायरस होते हैं जो ज्यादातर लोगों के जीवन में कुछ समय तक रहते हैं। मानव कोरोनावायरस आमतौर पर ऊपरी श्वसन तंत्र की बीमारियों के कारण होते हैं। कोरोनावायरस का नाम मुकुट या ताज की तरह उसके सतही नोक के कारण पड़ा है। कोरोना वायरस के चार मुख्य उप समूह हैं जिन्हें अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा के रूप में जाना जाता है।

कोरोनावायरस कई अलग-अलग जानवरों को प्रभावित कर सकते हैं और उनमें श्वसन, जठरांत्र, जिगर, और तंत्रिका संबंधी बीमारियों के कारण हो सकते हैं। इनमें से अधिकांश कोरोनावायरस आम तौर पर केवल एक पशु प्रजातियों या ज्यादा से ज्यादा निकट संबंधित प्रजातियों की एक छोटी संख्या को संक्रमित करते हैं। हालांकि, कुछ कोरोनावायरस एक सार्स (SARS) के कारण होते हैं, जो लोगों और जानवर दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।

 यह वायरस मुख्य रूप से ऊंटों के साथ संपर्क होने के माध्यम से फैलता है, लेकिन यह मानवीय तरल पदार्थों और बूंदों से भी फैल सकता है। यूरोपीय रोग रोकथाम और नियंत्रण केन्द्र के अनुसार, दुनिया भर में इस विषाणु के 1167 मामले पाये गये हैं और 479 रोगियों की मृत्यु हो चुकी है।

यह शोध अध्ययन अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा किया गया था जिसने 800 से अधिक ऊंटों या अरब ऊंटों में पिछले या वर्तमान एमईआरएस संक्रमणों की सबूत के तौर पर पहचान की गयी थी। पशुपालन में परिवर्तन से मानव एमईआरएस संक्रमण को कम कर सकता है।

मेर्स (एमईआरएस) पर कुछ रोचक तथ्य:

  1. मेर्स-कॉव (Mers-cov) का पता पहली बार 2012 में सऊदी अरब में लगा था।
  2. मेर्स-कॉव (Mers-cov) कोरोनावायरस परिवार के अंतर्गत आता है।
  3. सभी मामले अरब प्रायद्वीप पड़ोसी देशों से जुड़े हुए हैं।
  4. मेर्स-कॉव (Mers-cov) से संबंधित मामले यात्रा संबंधित अन्य देशों और मध्य पूर्व में विकसित हुए हैं।
  5. यह माना गया है कि स्तनधारी, वायरस के संरचण में एक भूमिका निभाते हैं,  चमगादड़ और ऊंट अभी भी शीर्ष दावेदार हैं।
  6. मनुष्य के अलावा, मेर्स-कॉव (Mers-cov) की पहचान कतर, मिस्र और सऊदी अरब में ऊंटों तथा सऊदी अरब में चमगादड़ में की गयी है।
  7. डॉक्टरों ने मेर्स-कॉव (Mers-cov) का वर्णन निमोनिया के लक्षणों व संकेतों के साथ एक फ्लू जैसी बीमारी के रूप में भी किया है।
  8. मेर्स-कॉव (Mers-cov) के पीड़ितों में आम तौर पर गंभीर तीव्र श्वसन की बीमारी बढ़ती है। कुछ लोगों में यह पाया गया है कि अन्य के साथ हल्की श्वसन बीमारी में कोई लक्षण नहीं देखे गये हैं।
  9. मेर्स-कॉव (Mers-cov)के संक्रमण से बीमार रोगियों का कोई विशेष उपचार नहीं है।
  10. मेर्स-कॉव (Mers-cov)के पुष्ट मामलों में से 36 प्रतिशत मामले घातक हो चुके हैं।
  11. पूरे अरब प्रायद्वीप और पूर्वी तथा उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्सों के ऊंटों में मेर्स-कॉव (Mers-cov) प्रतिरक्षी है। ये प्रतिरक्षी वायरस उपभेदों के साथ संक्रमण का कारण हो सकते हैं जो मानव को संक्रमित करते हैं।
  12. 90 प्रतिशत से अधिक ऊंट दो साल की उम्र में ही मेर्स (एमईआरएस) वायरस से संक्रमित गये थे और वायरस वयस्कों की तुलना में बछड़ों में अधिक सामान्य था।
  13. हालांकि मानव में मेर्स (एमईआरएस) वायरस का प्रसार अभी भी अज्ञात है लेकिन संक्रमित ऊंटों से शरीर के तरल पदार्थ के साथ सीधे संपर्क होने की वजह से यह फैल सकता है।
  14. ऊंट का बिना उबला दूध पीने और संभवत: बछड़े की लार में मौजूद दूषित वायरस के माध्यम से उनकी माताओं में एक संक्रमण के स्थानांतरण द्वारा यह फैल सकता है।