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संसदीय समितियां

संसद को जटिल और विविध प्रकार के कार्य करने होते हैं। सदन द्वारा गठित/ निर्वाचित या स्पीकर या अध्यक्ष द्वारा मनोनीत समति को संसदीय समिति कहा जा सकता है; इसमें लोकसभा/ राज्यसभा द्वारा उपलब्ध कराया गया सचिवालय होता है। एक संसदीय समिति स्थायी समिति या तदर्थ समिति हो सकती है। स्थायी समितियां स्थिर समितियां होती हैं और इनका गठन निश्चित अवधि के लिए किया जाता है।
Dec 30, 2015 10:04 IST
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संसद को जटिल और विविध प्रकार के कार्य करने होते हैं। सदन द्वारा गठित/ निर्वाचित या स्पीकर या अध्यक्ष द्वारा मनोनीत समति को संसदीय समिति कहा जा सकता है; इसमें लोकसभा/ राज्यसभा द्वारा उपलब्ध कराया गया सचिवालय होता है।

एक संसदीय समिति स्थायी समिति या तदर्थ समिति हो सकती है। स्थायी समितियां स्थिर समितियां होती हैं और इनका गठन निश्चित अवधि के लिए किया जाता है।

तदर्थ समितियां विशेष उद्देश्यों के लिए बनाई जातीं हैं और काम के पूरा होने एवं रिपोर्ट जमा करने के बाद ये समितियां समाप्त हो जाती हैं। इन समितियों में परामर्श समितियां और जांच समितियां शामिल होती हैं। परामर्श समितियों में चयन समितियां और विधेयकों पर बनी संयुक्त समितियां शामिल हैं जिन्हें विचार करने एवं किसी खास विधेयक पर रिपोर्ट देने के लिए बनाया जाता है। जांच समितियों का गठन विशेष मुद्दे की जांच और उस पर रिपोर्ट देने के लिए किया जाता है। जैसे, 2जी घोटाले पर बनी समिति, बोफोर्स सौदे पर बनी संयुक्त समिति आदि ।

संसद की विभिन्न स्थायी समितियों का वर्णन नीचे किया जा रहा हैः

लोक लेखा समिति

इस समिति में लोकसभा द्वारा निर्वाचित 15 सदस्य होते हैं और राज्य सभा के 7 सदस्य इससे संबद्ध होते हैं। दोनों सदनों में सदस्यों का निर्वाचन एकल हस्तांतरणीय मत के जरिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत पर होता है। समिति का कार्यकाल एक वर्ष का है। समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा के स्पीकर करते हैं। अध्यक्ष समिति के सदस्यों में से ही एक होता है।

समिति का मुख्य काम संसद द्वारा स्वीकृत धन का सरकार ने मांग के दायरे के भीतर खर्च किया या नहीं, का पता लगाना है।

अनुमान समिति

अनुमान समिति में 30 सदस्य होते हैं, इनका चयन प्रत्येक वर्ष लोकसभा अपने सदस्यों में से करती है। दोनों सदनों में सदस्यों का निर्वाचन एकल हस्तांतरणीय मत के जरिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत पर होता है। समिति का कार्यकाल एक वर्ष का है।

समिति का मुख्य कार्य अर्थव्यवस्थाओं, संगठन में सुधार, दक्षता या प्रशासनिक सुधार, अंतर्निहित नीति के अनुरूप अनुमान प्रभावित हो सकते हैं, की रिपोर्ट करना है।

सरकारी उपक्रमों से संबंधित समिति

समिति में 22 सदस्य होते हैं। इसमें लोकसभा द्वारा निर्वाचित 15 और राज्य सभा द्वारा निर्वाचित 7 सदस्य होते हैं। दोनों सदनों में सदस्यों का निर्वाचन एकल हस्तांतरणीय मत के जरिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत पर होता है।

समिति का मुख्य कार्य भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की सार्वजनिक उपक्रमों पर दी गई रिपोर्ट की जांच करना है।

कार्य मंत्रणा समिति

लोकसभा और राज्यसभा की समिति में क्रमशः 15 और 11 सदस्य होते हैं। लोकसभा के स्पीकर लोकसभा समिति के अध्यक्ष के रूप में और राज्य सभा के अध्यक्ष राज्यसभा समिति के पदेन अध्यक्ष के रूप में काम करते हैं।

समिति का काम सरकार को सदन में विषय विशेष को चर्चा के लिए सामने लाना और ऐसी चर्चाओं के लिए समय के आवंटन की सिफारिश करना है।

गैर सरकारी सदस्यों के विधेयकों और संकल्पों पर समिति

समिति का काम गैर–सरकारी सदस्यों द्वारा पेश किए गए विधेयकों और संकल्पों के लिए समय देना है। यह समिति सिर्फ लोकसभा में होती है। इसमें 15 सदस्य होते हैं और इसकी अध्यक्षता डिप्टी स्पीकर करते हैं। समिति का कार्यकाल एक वर्ष से अधिक का नहीं होता।

सरकारी आश्वासन समिति

यह समिति समय– समय पर मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासनों, वादों, दायित्वों आदि की संवीक्षा करती है और संबंधित सदन में इसकी रिपोर्ट देती है और यह देखती है कि उस उद्देश्य के लिए अनिवार्य न्यूनतम समय के भीतर उस प्रकार का कार्यान्वयन किया गया है कि नहीं। समिति में लोकसभा के 15 और राज्यसभा के 10 सदस्य होते हैं।

अधीनस्थ विधि निर्माण समिति

अधीनस्थ विधि निर्माण समिति इस बात की जांच करती है कि क्या संविधान द्वारा विनियमों, नियमों, उप– नियमों तथा प्रदत्त शक्तियों का प्राधिकारियों द्वारा उचित उपयोग किया जा रहा है। दोनों ही सदनों में समिति के 15 सदस्य होते हैं।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति

समिति में 30 सदस्य होते हैं– लोकसभा से 20 और राज्य सभा से 10 सदस्य। समिति का मुख्य काम  केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के कार्यक्षेत्र में आने वाली अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी सभी मामलों पर विचार करना है।

सदस्यों की अनुपस्थिति संबंधी समिति

समिति लोकसभा की बैठकों से अनुपस्थित रहने के लिए छुट्टी के लिए आवेदन करने वाले सदस्यों के सभी आवेदनों पर विचार करती है। अगर कोई सदस्य 60 दिन या उससे अधिक, बिना अनुमति लिए, सदन की बैठक से अनुपस्थित रहता है, ऐसे प्रत्येक मामले की जांच यह समिति करती है। यह समिति सिर्फ लोकसभा में होती है और इसमें 15 सदस्य होते हैं।

नियम समिति

नियम समिति सदन में कार्यविधि और कार्यवाही के संचालन से संबंधित मामलों पर विचार करती है और नियमों में संशोधन या संयोजन की सिफारिश करती है। लोकसभा समिति में स्पीकर जो समिति के पदेन अध्यक्ष होते हैं, समेत 15 सदस्य होते हैं। राज्यसभा समिति में राज्यसभा के अध्यक्ष समिति के पदेन अध्यक्ष होते हैं और इसके सदस्यों की कुल संख्या 16 होती है।

सामान्य प्रयोजन समिति

समिति में, प्रत्येक सदन में, पीठासीन अधिकारी (लोकसभा स्पीकर/ राज्यसभा अध्यक्ष), डिप्टी स्पीकर ( राज्यसभा में उपाध्यक्ष), अध्यक्षों के पैनल के सदस्य (राज्यसभा में उपाध्यक्षों के पैनल के सदस्य), सदन के सभी विभागीय स्थायी समितियों के अध्यक्ष, सदन में मान्यताप्राप्त दलों और समूहों के नेता और पीठासीन अधिकारी द्वारा मनोनीत ऐसे अन्य सदस्य होते हैं।
समिति का काम सदन से संबंधित मामलों पर विचार करना और सलाह देना है।

विशेषाधिकार समिति

विशेषाधिकार समिति सदन या अध्यक्ष/ सभापति द्वारा भेजे गए विशेषाधिकार उल्लंघन के किसी भी मामले की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट में उपयुक्त सिफारिशें करती है। लोकसभा समिति में 15 और राज्यसभा समिति में 10 सदस्य होते हैं।

याचिका समिति

यह समिति विधेयकों और जनहित संबंधी मामलों पर प्रस्तुत याचिकाओं की जांच करती है और केंद्रीय विषयों पर प्राप्त प्रतिवेदनों पर विचार करती है। लोकसभा समिति में 15 और राज्यसभा समिति में 10 सदस्य होते हैं।

लाभ के पद संबंधी संयुक्त समिति

यह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा गठित समितियों की संरचना और कामकाज की जांच करती है और इन कार्यालयों में काम करने वाले किसी व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 102 के तहत संसद सदस्य के तौर पर निर्वाचित होने के लिए अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए, पर सिफारिश देती है। इसमें 15 सदस्य होते हैं, 10 लोकसभा के और 5 राज्य सभा के।

महिला सशक्तीकरण समिति

इसमें 30 सदस्य होते हैं– 20 सदस्य लोकसभा के और 10 राज्यसभा के। समिति का मुख्य काम सभी क्षेत्रों में महिलाओं की समानता, स्थिति और सम्मान की रक्षा के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए उपायों की समीक्षा और निगरानी करना है।

सदस्यों के वेतन और भत्तों संबंधी संयुक्त समिति

यह समिति सांसदों के वेतन, भत्तों और पेंशन के भुगतान के विनियमन हेतु नियम बनाती है। यह चिकित्सा, आवास, टेलिफोन, डाक, निर्वाचन क्षेत्र और सचिवीय सुविधा के संबंध में भी नियम बनाती है। इस समिति में 15 सदस्य होते हैं जिसमें 10 सदस्य लोकसभा के और 5 सदस्य राज्य सभा के होते हैं।

इसके अलावा, आवास समिति, आचार समिति, पुस्तकालय समिति और सलाहकार समिति जैसी कई अन्य समितियां भी हैं।