इसरो 15 फरवरी 2017 को एकसाथ 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर इतिहास रचने जा रहा है| यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केन्द्र से “ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV)” के द्वारा किया जाएगा| इस प्रक्षेपण के माध्यम से भारत पहली बार “शुक्र ग्रह” पर अपना अंतरिक्षयान भेज रहा है| विश्व के किसी अन्य देश ने अब तक इस तरह की कोशिश नहीं की है| 104 उपग्रहों के प्रक्षेपण मिशन के तहत तीन भारतीय उपग्रह, 96 संयुक्त राज्य अमेरिका के उपग्रह और बाकी, इजराइल, कज़ाकस्तान, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात के हैं| तीन भारतीय उपग्रहों के नाम कार्टोसेट-2D, आईएनएस-1A और आईएनएस-1B हैं| संयुक्त राज्य अमेरिका के 96 उपग्रह क्यूबसैट प्रणाली पर आधारित है जिनमें से प्रत्येक का वजन लगभग 5 किलोग्राम हैं और यह अलग अलग दिशाओं से रॉकेट से अलग होंगे|
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पीएसएलवी-C37 रॉकेट इंजन में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश स्थित कंपनी “रेजिन और संबद्ध प्रोडक्शंस (RAP)” द्वारा निर्मित नोजल (nozzle) का प्रयोग किया जाएगा|
क्या आप जानते है कि 2014 में नेपाल में आयोजित 18वें सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्क के सदस्य देशों की मदद के लिए एक उपग्रह प्रक्षेपित करने का विचार रखा था जो अपने पड़ोसी देशों के प्रति उनके सकारात्मक विदेश नीति का हिस्सा था| हालांकि सार्क क्षेत्र में सेवा करने के इरादे से प्रक्षेपित होने वाले उपग्रह मिशन से पाकिस्तान बाहर हो गया है लेकिन अफगानिस्तान और बांग्लादेश की अपनी वचनबद्धता निभाने का वायदा किया है। प्रस्तावित उपग्रह दूरसंचार और प्रसारण अनुप्रयोगों अर्थात टेलीविजन (TV), डायरेक्ट-टू-होम (DTH), बहुत छोटे-छोटे छिद्र टर्मिनलों (VSAT), टेली-शिक्षा, टेली-मेडिसिन और आपदा के क्षेत्रों में अनुप्रयोगों और सेवा आपूर्ति में मदद करेगा| भारत सार्क देशों में एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास अंतरिक्ष में उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की क्षमता है|
दुनिया के किन किन देशों में आधी रात में भी सूर्य दिखायी देता है?
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पीएसएलवी-C37 के प्रक्षेपण के साथ इसरो और भारत के लिए संभावित लाभ इस प्रकार है :
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- यह भारत के सबसे विश्वसनीय रॉकेट और ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान है जो इसरो द्वारा अंतरिक्ष में विभिन्न उपग्रहों को प्रक्षेपित करने का सबसे सस्ता एवं संभव तरीका में शामिल है|
- इस प्रक्षेपण के माध्यम से इसरो 104 उपग्रहों के प्रक्षेपण के लागत का लगभग आधा हिस्सा वसूल कर लेगा|
- संचार, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष में वायुमंडलीय अनुसंधान आदि के लिए वाणिज्यिक उपग्रहों की शुरूआत के साथ, भारत को व्यावसायिक रूप से लाभ होगा।
- अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत का रणनीतिक महत्व बढ़ जाएगा|
- इस प्रक्षेपण के माध्यम से इसरो एशिया एवं विश्व में अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित कर लेगा|
इसरो द्वारा एक साथ 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर रिकॉर्ड बनाने की तैयारी
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