Budget 2026: बजट में गोल्ड-सिल्वर को लेकर क्या हुई घोषणा? क्या होगा असर, जानें सभी फैक्टर्स
Budget 2026 में सरकार ने सोना-चांदी को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इंपोर्ट ड्यूटी घटाने और ट्रेडिंग नियमों में बदलाव से कीमतों पर सीधा असर पड़ा है। जहां ज्वैलरी सेक्टर को राहत मिलेगी, वहीं बाजार में वोलैटिलिटी बढ़ सकती है। निवेशकों को शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव के बीच लॉन्ग-टर्म रणनीति अपनानी होगी।
पिछले कुछ दिनों से सोना-चांदी न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। इनके दामों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को नई रणनीति पर सोचने को मजबूर कर दिया है। खास बात यह है कि चांदी की कीमतों में साल 1980 के बाद यानी करीब 46 साल में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि 2025 से ही चांदी में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी, जिसका फायदा कई निवेशकों ने उठाया। बजट 2026 में सरकार ने व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात किए जाने वाले शुल्कयोग्य सामान को लेकर बड़ा फैसला लिया है, जिसका प्रभाव आगे आने वाले समय में देखने को मिल सकता है.
वहीं कीमतों को लेकर अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। पिछले दो ट्रेडिंग सेशनों में सोना और चांदी दोनों में तेज बिकवाली देखने को मिली। रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसलते हुए चांदी करीब ₹26,273 प्रति किलो (लगभग 9%) टूटकर ₹2.65 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है। वहीं सोना भी करीब 3% गिरकर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। हालिया तेज उछाल के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया और कीमतों में तेज करेक्शन देखने को मिल रहा है।
क्या है मार्केट का मौजूदा हाल:
2 फरवरी को मल्टी कॉमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 3% से ज्यादा गिरकर ₹1,37,453 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी करीब 6% टूटकर ₹2.50 लाख प्रति किलो तक फिसल गई। फिजिकल मार्केट में दिल्ली-मुंबई में 24 कैरेट सोना करीब ₹1,69,300 प्रति 10 ग्राम और चेन्नई में ₹1,73,010 रहा। चांदी ₹3.12 लाख प्रति किलो के आसपास कारोबार करती दिखी। जनवरी में सोने में 32% और चांदी में 71% की तेजी के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा करेक्शन माना जा रहा है।
सोने-चांदी पर बजट 2026 में क्या हुई घोषणा:
केंद्रीय बजट 2026 में फ़िलहाल सोने पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 24 जुलाई, 2024 से सोने पर कस्टम ड्यूटी 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी थी, जो फ़िलहाल कायम है। इसका उद्देश्य ज्वैलरी एक्सपोर्ट को बढ़ाना और स्मगलिंग को रोकना है। हालांकि बजट से पहले ज्यादा कटौती की उम्मीद में निवेशकों ने पोजिशन बनाई थी। उम्मीद पूरी न होने पर MCX में भारी सेलिंग देखी गई। इसके अलावा रुपये की स्थिरता और SEBI के ज्यादा वोलैटिलिटी मार्जिन ने भी दबाव बढ़ाया।
व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात किए जाने वाले शुल्कयोग्य सामान पर लगने वाला सीमा शुल्क 20% से घटाकर 10% किया जाएगा, ताकि शुल्क संरचना को अधिक तार्किक और सरल बनाया जा सके
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) February 1, 2026
- केंद्रीय वित्त मंत्री @nsitharaman
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बजट में डेरिवेटिव्स पर STT बढ़ने का प्रभाव:
भारत के केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की दरें बढ़ा दी हैं। फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है, जबकि ऑप्शंस के प्रीमियम और एक्सरसाइज पर टैक्स को 0.10–0.125% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के दौरान इस अचानक घोषणा से बाजार पर सीधा असर देखने को मिला.
सरकार का उद्देश्य डेरिवेटिव्स में बढ़ती सट्टेबाजी पर लगाम लगाना है, लेकिन इस फैसले से खासकर रिटेल ट्रेडर्स घबरा गए। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम किसी बड़े क्रैश या 50% गिरावट से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है, बल्कि बाजार की तत्काल प्रतिक्रिया भर है।
ग्लोबल फैक्टर्स का असर
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मजबूत होने से गैर-अमेरिकी निवेशकों के लिए सोना-चांदी महंगे हो गए, जिससे मांग घटी। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से नॉन-यील्डिंग एसेट्स जैसे गोल्ड पर दबाव आया। सेंट्रल बैंकों के सख्त रुख, महंगाई के आंकड़े और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम होने से मुनाफावसूली तेज हो गई। चांदी पर इंडस्ट्रियल डिमांड का असर भी पड़ा, जिससे इसमें ज्यादा गिरावट आई।
एक्सपर्ट्स की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह गिरावट ट्रेंड रिवर्सल नहीं बल्कि शॉर्ट-टर्म करेक्शन है। डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड और भीड़ वाली लॉन्ग पोजिशन के अनवाइंड होने से दाम गिरे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी अवधि में सोना अभी भी डाइवर्सिफिकेशन के लिए अच्छा विकल्प है, जबकि चांदी की वोलैटिलिटी उसके इंडस्ट्रियल यूज से जुड़ी रहती है।
क्या करना चाहिए निवेशकों को
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घबराकर बिकवाली न करें। जिन निवेशकों का नजरिया लॉन्ग-टर्म है, उनके लिए यह गिरावट बायिंग का मौका हो सकती है, लेकिन रिस्क प्रोफाइल देखकर ही एंट्री लें। पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन रखें और शॉर्ट-टर्म उछाल पर ज्यादा भरोसा न करें।
Bagesh Yadav is a journalist and current affairs analyst with over six years of experience in education journalism, national and international affairs, and digital media. He has contributed to India’s leading knowledge platforms, including Vision IAS and Only IAS, and currently serves in a senior editorial role at Jagranjosh.com, where he leads coverage across the Current Affairs and General Knowledge sections. His expertise spans breaking news, government policy analysis, world affairs, sports updates, science and technology, and visually engaging infographics. Known for his commitment to factual accuracy, editorial integrity, and audience-first storytelling, Bagesh delivers well-researched, accessible, and impactful journalism that serves millions of students, competitive exam aspirants, and informed readers across India.