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पश्चिमी अफ्रीका के देशों ने नयी करेंसी "इको" को क्यों शुरू किया है?

Last Updated: Dec 23, 2019, 15:05 IST

पश्चिमी अफ्रीका के 8 देशों; माली, नाइजर, सेनेगल, बेनिन,टोगो, बुर्किना फासो, गिनी-बसाउ, और आइवरी कोस्ट ने सीएफए फ्रैंक की जगह नई मुद्रा "इको" को चलाने का फैसला किया है. आइये इस लेख में जानते हैं कि यह निर्णय क्यों लिया गया है?

Eco Currency in Western Africa
Eco Currency in Western Africa

कहते हैं कि बिना "अर्थ" के कोई तंत्र' नहीं होता है. इसी प्रकार बिना करेंसी को कोई देश भी नहीं होता है. किसी देश की करेंसी उस देश की पहचान होती है. 

इसी पहचान को बनाने के लिए पश्चिमी अफ्रीका के 8 देशों; माली, नाइजर, सेनेगल, बेनिन,टोगो, बुर्किना फासो, गिनी-बसाउ, और आइवरी कोस्ट ने फ्रांसीसी उपनिवेश काल से चली आ रही गुलामी को ख़त्म करते हुए फैसला किया है कि वे वर्तमान में प्रचलित मुद्रा ‘सीएफए फ्रैंक’ की जगह अपने देश में एक नई मुद्रा "इको" का इस्तेमाल करेंगे.

इकोवास (ECOWAS) क्या है?

अफ्रीका महाद्वीप को आर्थिक पिछड़ेपन के कारण ‘काला महाद्वीप’ कहा जाता है लेकिन अब यह महाद्वीप अपने नाम को बदलने की राह पर चल पड़ा है. इसी दिशा में कदम उठाते हुए पश्चिम अफ्रीका के 15 देशों ने लागोस की संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद पश्चिम अफ्रीकी राज्यों का आर्थिक समुदाय, इकोवास (ECOWAS) की स्थापना 28 मई 1975 को की थी. इकोवास की स्थापना का मुख्य उद्येश्य पूरे पश्चिम अफ्रीकी क्षेत्र में आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है. 

eco-currency

इन 15 देशों में 7 अपनी अपनी करेंसी का उपयोग करते हैं जबकि 8 देश सीएफए फ्रैंक (CFA franc) को एक आम मुद्रा के रूप में साझा करते हैं ताकि क्षेत्र में देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा दिया जा सके. लेकिन अब इन 8 देशों ने फैसला लिया है कि वे 'सीएफए फ्रैंक' की जगह नयी करेंसी "इको" का इस्तेमाल करेंगे. 

'इको' को क्यों शुरू किया जायेगा? (Why ECO launched)

वर्तमान में प्रचलित मुद्रा सीएफए फ्रैंक का फुल फॉर्म है;कॉलोनीज फ्रैंकाइसेस डीअफ्रीक यानी अफ्रीका में फ्रांसीसी उपनिवेश (Colonies Françaises d’Afrique) अर्थात यह नाम सीधे तौर पर बताता है कि ये अफ़्रीकी देश आज भी आर्थिक तौर पर फ्रांस का गुलाम हैं. 

सीएफए फ्रैंक करेंसी को 1945 से ही इन देशों में इस्तेमाल किया जाता है इसलिए सीएफए फ्रैंक को इन देशों के आजाद होने के बाद भी पूर्व अफ्रीकी उपनिवेशों में फ्रांस के हस्तक्षेप के रूप में देखा जाता था.

आइवरी कोस्ट के राष्ट्रपति एलास्साने ओउत्तारा ने कहा है कि मुद्रा का नाम बदलने के बाद इन देशों की मुद्रा के सम्बन्ध में फ़्रांस का किसी भी तरह का हस्तक्षेप रुक जायेगा. 

इस अवसर पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि ‘इको’ की शुरू करने में लगभग 6 महीने लगेंगे और उम्मीद है कि ‘इको’ की शुरुआत 2020 में हो जाएगी.

उम्मीद है कि पश्चिमी अफ्रीका के ये देश अपनी नयी करेंसी 'इको' के साथ विकास के नए प्रतिमान स्थापित करेंगे.

 

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Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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First Published: Dec 23, 2019, 15:02 IST

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