किसी नए देश को किस प्रकार बनाया जाता है?

Dec 20, 2019, 12:13 IST

खुद को भगवान बताने वाले नित्यानंद नाम के एक शख्स ने दावा किया है कि उसने ‘कैलास’ नाम का एक हिन्दू राष्ट्र बना लिया है. अब लोगों के दिमाग में यह प्रश्न उठा रहा है कि भला कोई व्यक्ति या क्षेत्र कैसे अपना अलग देश बना सकता है?आइये इस लेख में जानते हैं.

Nityananda: Self declared God
Nityananda: Self declared God

मीडिया में ऐसी ख़बरें आ रहीं हैं कि खुद को भगवान बताने वाले नित्यानंद ने कहा है कि उसने अपना देश बना लिया है, जिसका एक राष्ट्रीय झंडा है, राष्ट्रीय पशु है, एक डिपार्टमेंट ऑफ़ कॉमर्स, डिपार्टमेंट ऑफ़ मानव संसाधन और डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड एंड सिक्यूरिटी भी  है.

ख़बरों में ऐसा कहा गया है कि उसने अपना देश (जिसका नाम ‘कैलास’है) इक्वेडोर के पास आइलैंड खरीदकर बनाया है. कुछ लोग मानते हैं कि उसने ‘कैलाश’ नाम का देश त्रिनिदाद और टोबैगो के पास बनाया है.

फ़िलहाल मुद्दे की बात यह है कि किसी देश का निर्माण कैसे किया जाता है, इसके लिए किन-किन दस्तावेजों और औपचारिकताओं की जरूरत होती है? आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं.

कोई नया देश क्यों बनता?

अक्सर हर देश में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो कि वर्तमान शासन व्यवस्था या वर्तमान सरकार की नीतियों से सहमत नहीं होते हैं तो ऐसे लोग अक्सर नया देश बनाने की बात करते हैं. भारत में खालिस्तान की मांग भी काफी समय से हो रही है.

देश बनाने की घोषणा कौन कर सकता है?

देश बनाने का कोई परिभाषित फार्मूला नहीं होता है. कोई भी व्यक्ति या क्षेत्र अपने देश की घोषणा कर सकता है. लेकिन इस नए देश को मान्यता कौन देगा यह एक बड़ा प्रश्न है? अक्सर नए देशों को जल्दी मान्यता नहीं मिलती है. 

सोमालियालैंड जो कि सोमालिया का हिस्सा है वो अपने आप को वर्ष 1991 से अलग देश मान रहा है लेकिन किसी ने इसको मान्यता नहीं दी है.
जबकि सर्बिया के अंदर ‘कोसोवो’ ने अपने आप को 2008 में आजाद देश घोषित कर दिया था और अब इसको कुछ देशों ने मान्यता भी दे दी है. हालाँकि अभी इसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने मान्यता नहीं दी है.

एक देश बनाने के लिए क्या क्या होना जरूरी है?

वर्तमान समय के राष्ट्रों के बनने का आधार 1933 के “राज्यों के अधिकारों और कर्तव्यों पर कन्वेंशन” (Convention on Rights and Duties of States) से आता है, जिसे मोंटाविडियो कन्वेंशन (Montevideo Convention) के नाम से भी जाना जाता है. यह कन्वेंशन 26 दिसम्बर 1933 को आयोजित हुआ था और 20 देशों ने हस्ताक्षर किये थे. इस कन्वेंशन में बताया गया है कि किसी राष्ट्र के होने के लिए कम से कम 4 बातें अवश्य हों

1. एक परिभाषित सीमा

2. एक सरकार 

3. स्थाई जनसंख्या

4. दूसरे राष्ट्रों से सम्बन्ध बनाने की क्षमता

किसी देश को मान्यता कौन देता है?

यदि किसी देश को संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) से मान्यता मिल जाती है तो किसी भी अन्य देश की ताकत नहीं है कि उसकी मान्यता को रद्द कर दे. वर्तमान में लगभग 193 देशों को UNO ने मान्यता दी हुई है.

यदि किसी देश को UNO से मान्यता मिल जाती है तो उस नए देश के ऊपर, वह देश भी हमला नहीं कर सकता है जिससे वह अलग हुआ है क्योंकि UNO की संयुक्त सेना सीधे दखल देने पहुँच जाती है. 

अगर किसी देश को UNO से मान्यता मिल जाती है तो उसको विश्व बैंक, IMF जैसी संस्थाओं से ऋण और अन्य सुविधाएँ मिलने लगतीं है. साथ ही नए देश की करेंसी को मान्यता मिल जाती है और फिर उसके साथ व्यापार बढ़ने लगता है.

अगर UNO किसी देश को मान्यता नहीं देता है और बड़े राष्ट्र किसी देश को मान्यता दे देते हैं तो भी उस देश के साथ अन्य देशों के व्यापारिक सम्बन्ध बनने लगते हैं और फिर धीरे ध्रीरे उस देश को UNO द्वारा भी मान्यता मिल ही जाती है.

उम्मीद है कि आपको समझ आ गया होगा कि कोई देश किस प्रकार बनता है और कैसे मान्यता प्राप्त करता है.

Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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