कुछ जैविक वर्गीकरण की प्रणालियों में, प्रोटोजोआ को यूकेरियोटिक जीवों के विविध समूह के रूप में परिभाषित किया गया है. ये एककोशिक प्राणी हैं और रचना और क्रिया की दृष्टि से ये अपने आप में पूर्ण माने जाते हैं. इनके समूह को "प्रोटॉफाईटा" कहा जाता है यानी इन्हें पौधों के जैसा माना जाता है क्योंकि ये प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) के लिए सक्षम होते हैं. इनकी कोशिका के दो भाग होते हैं: कोशिकाद्रव्य और केंद्र.
1818 में शब्द प्रोटोजोआ, जर्मन पेलियोटोलॉजिस्ट और जीवविज्ञानी जॉर्ज अगस्त गोल्डफस द्वारा एक वर्गीकृत वर्ग के लिए पेश किया गया था. जीवनचक्र की दृष्टि से प्रोटोजोआ परजीवी दो प्रकार के होते हैं: वो जो केवल एक ही परपोषी में जीवनचक्र को पूर्ण करते हैं जैसे एण्टअमीबा. दूसरा वो जो अपना जीवनचक्र दो परपोषियों में पूर्ण करते हैं, जैसे मलेरिया या कालाजार के रोगाणु आदि. आइये इस लेख के माध्यम से प्रोटोजोआ के बारे में 9 रोचक तथ्यों पर अध्ययन करते हैं.
प्रोटोजोआ के बारे में 9 रोचक तथ्य
1. एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका प्रोटोजोआ (Entamoeba Histolytica) एक रोगजनक (pathogenic) परजीवी (parasite) है तथा अमिबी पेचिश (Amoebic dysentery) अमिबियासिस पैदा करता है.
2. अमिबियासिस के दौरान, ऊतकों के विघटन से श्लेष्मा एवं रक्त मल के साथ निकलता है.
3. मनुष्य में एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba Histolytica) का संक्रमण 30-40 वर्षों के लिए बना रहता है.
4. एमीटिन हाइड्रोक्लोराइड (Emetin hydrochloride) के इंजेक्शन द्वारा अमिबिएसिस का अस्थाई उपचार किया जा सकता है या एमीटिन (Emetin), बिस्मथ (Bismuth), आइयोडीन (Iodine) आदि को खिलाने से भी उपचार किया जाता है.
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5. एण्टअमीबा हर्टमानी (Entamoeba hartmanni) प्रोटोजोआ व्र्ह्दांत्र (colon) की गुहा में निवास करते हैं. इससे भी पेचिश (dysentery) होती है किन्तु यह कम हानिकारक होती है.
6. एण्टअमीबा कोलाई (Entamoeba Coli) प्रोटोजोआ एक अन्त: सहभोजी (endocommensal) है. यह भी व्र्ह्दांत्र (colon) की गुहा (lumen of colon) में पाया जाता है परन्तु हानिकारक नहीं होता है क्योंकि वह जीवाणुओं (bacteria) पर भरण करते हैं.
7. एण्टअमीबा जिंजिवेलिस (Entamoeba Gingivalis) प्रोटोजोआ को मुख अमीबा (mouth amoeba) भी कहते है. यह 70% लोगों के दांत के मसूड़ों में पाया जाता है और मनुष्य में पायरिया (pyorrhoea) के रोग को बढ़ाता है.
8. निद्रालु व्याधि (sleeping sickness) के प्रमुख लक्षण हैं:
(i) खुजली (itching) एवं सी-सी मक्खी (tse-tse fly) के काटने के स्थान पर लालिमा;
(ii) सिर दर्द (headache)
(iii) रुधिर की कमी (anaemia); एवं
(iv) अंतत: अचेत अवस्था (unconsciousness) एवं मृत्यु (death).
9. 1992 में फोर्ड (Ford) एवं डटन (Dutton) ने पता लगाया कि ट्रिपैनोसोमा मानव परजीवी (human parasite) भी है और गैम्बिएन ज्वर (Gambien Fever) का कारण है जो बाद में निद्रालु व्याधि (sleeping sickness) में बदल जाता है.
प्रोटोजोआ एकल कोशिका जीवों का एक बहुत ही विविध समूह है, जिसमें 50,000 से अधिक विभिन्न प्रकार के प्रतिनिधित्व होते हैं. बहुसंख्य में ये सूक्ष्म रूप में होते हैं परन्तु बहुत से 1/200 मिमी से भी छोटे होते हैं, लेकिन कुछ, जैसे कि मीठे पानी के स्पाइरोस्टोमन (Spirostomun), लंबाई में 0.17 इंच (3 मिमी) लंबे होते हैं, जिन्हें नग्न आंखों से भी देखा जा सकता है. तथापि, प्रोटोज़ोएन्स अपनी विविधता के कारण जाने जाते है और यह नकारा नहीं जा सकता है कि वे इतने भिन्न स्थितियों के तहत विकसित हुए हैं.
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