उत्तर प्रदेश के किस चावल को कहा जाता है ‘बुद्ध चावल’, जानें

Last Updated: May 28, 2026, 12:46 IST

उत्तर प्रदेश कृषि के क्षेत्र में एक संपन्न राज्य है। यहां की जमीन पर पैदा होने वाले चावल की एक किस्म ऐसी है कि इसे ‘बुद्ध चावल’ के नाम से भी जाना जाता है। इस लेख में चावल की इस किस्म के बारे में विस्तार से जानेंगे।

यूपी का बुद्ध चावल
यूपी का बुद्ध चावल

उत्तर प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में संपन्न माना जाता है, जो कि देश के कृषि क्षेत्र में अहम योगदान देता है। इस कड़ी में यहां पैदा होने वाले चावल की एक किस्म ऐसी है, जिसे ‘बुद्ध चावल’ भी कहा जाता है। यह चावल काला नमक चावल है, जो कि विशेष रूप से यूपी के तराई क्षेत्र में उगाया जाने वाला चावल है। इस लेख में हम इस चावल के बारे में विस्तार से जानेंगे। हाल ही में यूपी लेखपाल की परीक्षा में इससे संबंधित सवाल भी पूछा गया है।

किन जिलों में उगाया जाता है काला नमक चावल

यूपी में काला नामक चावल मुख्य रूप से सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर, महाराजगंज और बस्ती जैसे जिलों में उगाया जाता है। यह एक प्रीमियम चावल है। 

क्यों कहा जाता है बुद्ध चावल

काला नमक चावल को बुद्ध चावल कहने के पीछे अलग-अलग कारण हैं, जो कि नीचे दिए गए हैंः

-बौद्ध ग्रंथों और स्थानीय लोक कथाओं के मुताबिक, इस चावल का संबंध गौतम बुद्ध काल से बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि गौतम बुद्ध ने महापरिनिर्वाण से पहले सिद्धार्थनगर के ग्रामीणों को आशीर्वाद के रूप में काले रंग के कुछ धान और दाने दिए थे।

-लोक कथाओं के मुताबिक, गौतम बुद्ध ने ग्रामीणों को धान के इन दानों को आसपास के क्षेत्र में बोने के लिए कहा था, जो कि अपने खुशबू के लिए जाना जाएगा। वर्तमान में यदि इस चावल को सिद्धार्थनगर या इससे अलग कही और बोया जाता है, तो इसमें अधिक सुगंध नहीं रहती है।

-स्थानीय लोगों द्वारा इसे बुद्ध का चमत्कार माना जाता है। सिद्धार्थनगर और इसके आसपास के क्षेत्रों में यह चावल बीते 2600 वर्ष से उगाया जा रहा है।

बौद्ध देशों में बनी रहती है मांग

चावल का संबंध गौतम बुद्ध से होने के कारण इस चावल की मांग बौद्ध धर्म मानने वाले देशों में रहती है। इसमें जापान, थाईलैंड, म्यांमार, श्रीलंका, वियतनाम और भूटान शामिल है। इन देशों में इस चावल को बहुत पवित्र माना जाता है। धार्मिक उत्सवों में इस चावल को  प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।

दिखने में अनोखा होता है यह चावल

बुद्ध चावल दिखने में अन्य चावलों से अलग होता है। इसका धान का छिलका काले रंग का होता है। यही वजह है इसके काला नमक चावल कहा जाता है। हालांकि, आपको बता दें कि इसका छिलका हटाने पर इसके अंदर का चावल सफेद ही होता है। यूपी के इस चवाल को GI Tag भी मिला हुआ है। बुद्ध चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, ऐसे में यह शुगर भी में भी खाया जा सकता है। 

क्यों जरूरी है यह लेख

यूपी से संबंधित परीक्षाओं में कृषि व इससे जुड़ी फसलों के बारे में पूछ लिया जाता है। ऐसे में यह लेख बहुत ही उपयोगी है।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: May 28, 2026, 12:46 IST

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