किस देश को 'दो नदियों के बीच की भूमि' कहा जाता है, जानें यहां

Last Updated: Feb 15, 2026, 19:15 IST

आपने दुनिया के अलग-अलग देशों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दुनिया में किस देश को 'दो नदियों के बीच की भूमि' भी कहा जाता है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे। 

दो नदियों के बीच की भूमि
दो नदियों के बीच की भूमि

दुनिया में कुल 195 देश हैं, इनमें से 193 देश ऐसे हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र(United Nations) द्वारा मान्यता मिली हुई है। वहीं, दो देश गैर-सदस्य पर्यवेक्षक देश हैं। हर देश की अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास है, जो इन्हें एक-दूसरे से अलग बनाता है। आपने दुनिया के अलग-अलग देशों के बारे में पढ़ा और सुना होगा।

हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जिसे 'दो नदियों के बीच की भूमि' भी कहा जाता है। कौन-सा है यह देश, जानने के लिए यह लेख पढ़ें। 

किस देश को कहा जाता है 'दो नदियों के बीच की भूमि'

सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि किस देश को 'दो नदियों के बीच की भूमि' भी कहा जाता है। आपको बता दें कि यह मेसोपोटामिया है।

क्यों कहा जाता है 'दो नदियों के बीच की भूमि'

अब सवाल है कि आखिर मेसोपोटामिया को 'दो नदियों के बीच की भूमि' क्यों कहा जाता है। आपको बता दें कि इसके पीछे देश का भौगोलिक स्थान और नाम कारण है। आइए इसे समझते हैंः 

कैसे हुई शब्द की उत्पत्ति

मेसोपोटामिया शब्द दो प्राचीन यूनानी भाषा के शब्दों से मिलकर बना है। इसमें ‘मेसा’ का अर्थ मध्य होता है, वहीं पोटामोस का अर्थ नदी से होता है। ऐसे में इसके पूर्ण अर्थ की बात करें, तो यह 'दो नदियों के बीच का क्षेत्र' कहा जाएगा।

दो मुख्य नदियां कौन-सी हैं

मेसोपोटामिया दो प्रमुख नदियों के बीच स्थित हैं, जो कि इस प्रकार हैं-

  • दजला (Tigris - टिग्रिस)

  • फरात (Euphrates - यूफ्रेट्स)

दोनों नदियों का उद्गम तुर्की के पहाड़ों से होता है और अंत में ये इराक से होते हुए फारस की खाड़ी में गिरती हैं। खास बात यह है कि इस क्षेत्र ने दुनिया की पहली शहरी सभ्यता को जन्म दिया था। वहीं, इस क्षेत्र की मिट्टी भी अधिक उपजाऊ है।

क्या हैं भौगोलिक और ऐतिहासिक कारण

मेसोपोटामिया को 'दो नदियों के बीच की भूमि' कहे जाने के पीछे ऐतिहासिक और भौगोलिक कारण इस प्रकार हैंः

ऊपजाऊ भूमि

इस क्षेत्र के आसपास रेगिस्तानी इलाका है। हालांकि, दो नदियों के बीच यह भूमि अधिक उपजाऊ थी। इन नदियों में जब भी बाढ़ आती थी, तो अपने साथ नई मिट्टी लाती थी। इससे खेती करना भी आसान हो जाता था।

सबसे पुरानी सभ्यताओं का हुआ विकास

नदियों की वजह से यहां कई पुरानी सभ्यताओं का विकास भी हुआ है। इसमें सुमेरियन, बेबीलोनियन, अक्कादियन और असीरियन जैसी सभ्यताओं का विकास हुआ था।

सबसे पहले बनाई गई थीं नहरें

आपको बता दें कि उस समय यहां के लोगों ने दुनिया में सबसे पहले नहरों का निर्माण किया था। लोगों ने नदी से नहरें निकालकर चबूतरों का भी निर्माण किया था। इससे खेती करना आसान हुआ था।

इराक नाम से जाना जाता है क्षेत्र

इस क्षेत्र को मुख्य रूप से इराक नाम से जाना जाता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इसका कुछ एरिया तुर्किये, कुवैत और सीरिया में भी आता है।

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Feb 15, 2026, 19:15 IST

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