फारसी भाषा और साहित्य अपनी मधुरता के लिए प्रसिद्ध है। फारसी ईरान देश की भाषा है, परंतु उसका नाम फारसी इस कारण पड़ा कि फारस, जो वस्तुत: ईरान के एक प्रांत का नाम है, के निवासियों ने सबसे पहले राजनीतिक उन्नति की। मुग़लकाल में हरेक भाषा के साहित्य को पोषण मिलता था तथा मुग़ल बादशाह विभिन्य भाषाओँ के विभिन्न शाखाओं के विकास को बहुत प्रोत्साहन देते थे। अकबर के संरक्षण में बहुत-से विद्वान् हुए तथा उन्होंने दिलचस्प एवं महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। अकबर का एक समकालीन व्यक्ति माधवाचार्य, जो त्रिवेणी का एक बगाली कवि तथा चडी-मंगल का लेखक था, बादशाह की विद्या के पोषक के रूप में बहुत प्रशंसा करता है।
मुगल काल के प्रसिद्ध फारसी इतिहासकार
किताब | लेखक और इतिहासकार | संरक्षक |
तारीख-ई-राशिदी | मिर्ज़ा मुहम्मद हैदर दुघ्लत | हुमायूं |
अकबरनामा और आइन-ई-अकबरी | अबू अल-फजल | अकबर |
तारीख-ई-फिरिश्तः | मुहम्मद कासिम हिंदू शाह | अकबर |
ताबक़त-ई-अकबरी | निजामुद्दीन अहमद | अकबर |
मुन्ताखाबुत-तवारीख | अब्द अल-क़दीर बादाउनी | अकबर |
तारीख-ई-शेर शाही | अब्बास खान सरवानी | अकबर |
तारीख-ई-सलातीन-अफ़ग़ाना | अहमद यादगार | मुग़ल काल |
तजकिरात-उल-वाकिअत | जौहर आफताबची | अकबर |
तारीख-ई-हिंद | मीर मुहम्मद मसूम शाह बखरी | अकबर |
वाकिअत-ई-मुश्तकी | शेख रिज़क उल्लाह मुश्ताकाई | अकबर |
तारीख-ई-हुमायूँशाही | जौहर आफताबची | अकबर |
तारीख-ई-अकबरी | मुहम्मद आरिफ कंधारी | अकबर |
तुजुक-ई-जहाँगीरी ओर तुजुक-ए-जहाँगीरी | नूर-उद-दीन मुहम्मद जहांगीर | जहांगीर |
मखजन-ई-अफ़ग़ाना | निमत अल्लाह अल-हरवी | जहांगीर |
तारीख-ई-दांडी | अब्दुल्ला | जहांगीर |
मासिरी-ई-जहाँगीर | घरत खान | जहांगीर |
शाहजहाँ नामा | एमडी सादिक खान | शाहजहाँ |
पादशाह नामा | मोहम्मद वारिस | शाहजहाँ |
अलमगीरनामा | मिर्जा मोहम्मद काजीम | शाहजहाँ |
असीर-ए-आलमगिरी | मोहम्मद। साकी मुस्तैद खान | औरंगजेब |
ज़फर नामा | गुरु गोबिंद सिंह जी | औरंगजेब |
मुन्ताखाब-उल-लुबाब | मुहम्मद हाशिम या हाशिम 'अली खान (खफी खान) | औरंगजेब |
फुतुहत-ए-अलमगी | ईश्वर दास नगर | औरंगजेब |
नुस्खा-ए-दिलकुशा | भीमसेन बुरहानपुरी | औरंगजेब |
खुलासत-उ-तवारीख | सुरजन राय खत्री | औरंगजेब |
सिजरौल मुत्खन्न | गुलाम हुसैन | औरंगजेब |
इमादुस सादत | गुलाम नकवी | औरंगजेब |
उर्दू भाषा, स्थानीय भाषा हिन्दी से विकसित हुई जो कि फारसी और बाद में अरबी और तुर्की के कुछ शब्दों से मिलकर विकसित हुई है। मुग़ल काल में भारतीय और इस्लामी संस्कृति के विलय के परिणाम के रूप में उर्दू भाषा विकसित हुई। आधुनिक हिन्दी, संस्कृत-आधारित शब्दावली और फारसी, अरबी और तुर्की के ऋण शब्द का उपयोग करती है। यह पारस्परिक रूप से सुगम और उर्दू के समान है। सामूहिक रूप में दोनों कभी कभी हिन्दूस्तानी के नाम से जाने जाते हैं।
जहाँगीर ने ऐसा ना किया होता तो भारत अंग्रेजों का गुलाम कभी ना बनता
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