इनलैंड वॉटरवे टर्मिनल क्या है और इससे भारत को क्या फायदे होंगे?

वाराणसी-हल्दिया नैशनल वॉटर-वे 1 देश का पहला इनलैंड वॉटरवे (नदी मार्ग) टर्मिनल है. इस टर्मिनल के माध्यम से 1620 किलोमीटर लंबे वॉटरवे से गंगा के जरिए वाराणसी से कोलकाता के हल्दिया के बीच माल ढुलाई आसान होगी. अर्थात इस जल मार्ग के माध्यम से अब मालवाहक जहाजों की मदद से सामान को लाने और ले जाने में आसानी होगी.
Nov 15, 2018 14:47 IST
    National Waterway in India

    भारत माल ढुलाई और परिवहन पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 14.4% खर्च करता है. भारत में परिवहन और माल ढुलाई के साधनों के रूप में सड़क और रेल को ही मुख्य माना जाता है लेकिन अब जल मार्ग के माध्यम से भी परिवहन और माल ढुलाई का काम लिया जायेगा.

    भारत के सड़क नेटवर्क की कुल लम्बाई 5.5 मिलियन किमी. से अधिक है जो कि इसे दुनिया के सबसे बड़े सड़क नेटवर्क में शामिल करता है. वर्तमान में भारत माल ढुलाई का 65% काम सड़क मार्ग और यात्रा परिवहन का 85% काम सड़क मार्ग से पूरा करता है.

    सड़क मार्ग की इसी महत्ता को देखते हुए भारत सरकार ने अगले पांच वर्षों में नई सड़कों और राजमार्गों के निर्माण के लिए 7 ट्रिलियन (107.82 अरब अमेरिकी डॉलर) का निवेश करने का फैसला किया है.

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    भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है. भारतीय रेलवे मार्ग नेटवर्क लगभग115,000 किमी से अधिक लम्बाई में फैला हुआ है, जो कि हर दिन 12,617 यात्री ट्रेनों और 7,421 मालगाड़ियों, 7,349 स्टेशनों से 23 मिलियन यात्रियों की ढुलाई और 3 मिलियन टन (एमटी) माल ढुलाई का काम करता है.

    भारत में समुद्री मार्ग से माल ढुलाई और यात्रा का बहुत अधिक काम नहीं लिया जाता है लेकिन अब यह बीते ज़माने की बात होने वाली है क्योंकि भारतीय बेड़े की क्षमता में 6.2% प्रति वर्ष की दर से विकास हो रहा है.

    इसी दिशा में काम करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने 13 नवम्बर 2018 को वाराणसी-हल्दिया नैशनल वॉटर-वे 1 पर बने देश के पहले मल्टी मॉडल टर्मिनल का उद्घाटन किया था. पीएम द्वारा उद्घाटित वाराणसी के मल्टी मॉडल टर्मिनल को 206 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है. इस प्रोजेक्ट में विश्व बैंक ने भी आर्थिक मदद दी है.

    वाराणसी-हल्दिया नैशनल वॉटर-वे 1 देश का पहला इनलैंड वॉटरवे (नदी मार्ग) टर्मिनल है. इस टर्मिनल के माध्यम से 1620 किलोमीटर लंबे वॉटरवे से गंगा के जरिए वाराणसी से कोलकाता के हल्दिया के बीच माल ढुलाई आसान होगी. अर्थात इस जल मार्ग के माध्यम से अब मालवाहक जहाज की मदद से सामान को लाने और ले जाने में आसानी होगी.

    इस वॉटरवे को तैयार करने का जिम्मा इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईडब्ल्यूएआई) को सौंपा गया था.

    नैशनल वॉटर-वे 1 का रूट क्या होगा?

    इस जलमार्ग पर स्थित प्रमुख शहर इलाहाबाद, वाराणसी, मुगलसराय, बक्सर, बलिया, आरा, पटना, मोकामा, मुंगेर, भागलपुर, साहिबगंज, फरक्का, पाकुड़, कोलकाता तथा हल्दिया हैं. ज्ञातव्य है कि देश में जल परिवहन को बढावा देने के लिए स्थापित एकमात्र राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौकायन संस्थान इस जलमार्ग पर बसे पटना के गायघाट में स्थित है.

    national waterway 1 india map

    वॉटरवे-1 पर चार मल्टी मॉडल टर्मिनल- वाराणसी, साहिबगंज, गाजीपुर और हल्दिया बनाए गए हैं. जल मार्ग पर 1500 से 2000 मीट्रिक टन क्षमता वाले जहाजों को चलाने के लिए कैपिटल ड्रेजिंग के जरिए 45 मीटर चौड़ा गंगा चैनल तैयार किया गया है.

    नैशनल वॉटर-वे 1 टर्मिनल से फायदे

    1. रेल और सड़क मार्ग की अपेक्षा जहाज से माल ढुलाई तीन गुना सस्ती होगी जिससे कई वस्तुओं के दाम कम होंगे और अंततः लोगों को सस्ती चीजें मिलेंगी.

    परिवहन मोड

    किराया( रु./TKm )

    कर

    कुल रु./ TKm

    रेलवे

    1.36

    3.71%

    1.41

    हाईवे

    2.50

    3.09%

    2.58

    वाटर वे

    1.06

    निल

    1.06

    2. अगर यह रूट सफल हो जाता है तो इससे देश के अन्दर जलमार्ग से परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, पर्यटन बढ़ेगा जिससे कि इस वॉटर-वे के रास्ते में पड़ने वाले सभी शहरों में बहुत बड़ी मात्रा में रोजगार के अवसर सृजित होंगे.

    3. भारत और आसियान देशों के बीच 72 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार होता है. इसी कारण हल्दिया जलमार्ग शुरू होने से सागरमाला प्रॉजेक्‍ट के जरिए भारत, दक्षिण एशिया के कारोबार में चीन के मुकाबले अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा सकेगा जिससे देश में निवेश के अवसर और बेहतर होंगे साथ ही देश के निर्यातकों को निर्यात में आसानी होगी.

    4. वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग में गंगा के रास्‍ते व्‍यापारिक गतिविधियां होने से रामगनर टर्मिनल के जरिए उत्तर भारत को पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत, नेपाल, म्‍यांमार, बांग्‍लादेश और अन्‍य दक्षिण एशियाई देशों को जोड़ेगा.

    भारत में कितने वाटर वे हैं?

    राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अनुसार, 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग (एनडब्ल्यू) के रूप में घोषित किया गया है जिनमें पांच मौजूदा राष्ट्रीय जलमार्ग शामिल हैं. भारत के 111 राष्ट्रीय जलमार्ग में से, राष्ट्रीय जलमार्ग -1, 2, और 3 पहले ही ऑपरेशनल हैं. इन राष्ट्रीय जलमार्ग पर कार्गो के साथ-साथ यात्री / क्रूज जहाज इन जलमार्गों पर चल रहे हैं.

    भारत के 15 राष्ट्रीय जलमार्गों के नाम इस प्रकार हैं;

    क्रम संख्या

    राष्ट्रीय जलमार्ग

    अनुमानित लंबाई (किमी)

    किस राज्य में

    1.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -1

    1620

    यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल

    2.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -2

    891

    असम

    3.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -3

    365

    केरल

    4.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -4

    2890

    तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना

    5.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -5

    588

    ओडिशा, पश्चिम बंगाल

    6.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -6

    71

    असम

    7.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -7

    96

    पश्चिम बंगाल

    8.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -8

    28

    केरल

    9.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -9

    38

    केरल

    10.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -10

    45

    महाराष्ट्र

    11.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -11

    98

    महाराष्ट्र

    12.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -12

    5.5

    उत्तर प्रदेश

    13.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -13

    11

    तमिलनाडु

    14.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -14

    49

    ओडिशा

    15.

    राष्ट्रीय जलमार्ग -15

    137

    पश्चिम बंगाल

    सारांश के तौर यह कहा जा सकता है कि भारत में राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास पूरे देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ माल ढुलाई में आने वाली परिवहन लागत को कम करने की दिशा में एक बहुत ही अच्छा कदम है.

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