भारत की सबसे छोटी सहायक नदी कौन-सी है, जानें यहां
भारत में कई छोटी-बड़ी नदियों का प्रवाह होता है। इसमें कुछ नदियां एक-दूसरे की सहायक नदियां भी हैं। हालांकि, भारत के राजस्थान में सबसे छोटी सहायक नदी बहती है। यह मुख्य रूप से साहबी नदी की सहायक नदी है।
भारत को नदियों का देश भी कहा जाता है। क्योंकि, यहां छोटी-बड़ी मिलाकर कई नदियों का प्रवाह होता है। हालांकि, इनमें से प्रमुख नदियों की संख्या करीब 200 है। इनमें कुछ नदियां एक-दूसरे की प्रमुख सहायक नदियां भी हैं।
यदि भारत की सबसे छोटी सहायक नदी की बात करें, तो यह अरवारी नदी है, जो कि राजस्थान में बहती है। कितनी छोटी है यह नदी और क्या हैं नदी से जुड़े दिलचस्प किस्से और तथ्य, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें।
कितनी छोटी है अरवारी नदी
अरवारी नदी को भारत की सबसे छोटी सहायक नदी के रूप में जाना जाता है। इसकी कुल लंबाई 45 किलोमीटर है, जो कि राजस्थान के अलवर जिले में बहती है।
किसकी सहायक है अरवारी नदी
अरवारी नदी मुख्य रूप से साहबी नदी की सहायक है। यह नदी राजस्थान के जयपुर में अजीतगढ़ जिले से निकलने के बाद हरियाणा में पहुंचती है। यहां बहने के बाद यह दिल्ली में प्रवेश करती है।
कैसे हुआ नदी का पुनर्जन्म
साहबी नदी कभी पूरी तरह सूख चुकी थी। लेकिन, 1980 के दशक में जलपुरुष कहे जाने वाले राजेंद्र सिंह और स्थानीय ग्रामीणों के प्रयास से 380 से अधिक छोटे-छोटे मिट्टी के बांध बनाकर नदी को फिर से पुनर्जीवित किया गया। आज भी इस नदी को दिल्ली के वजीराबाद के पास यमुना नदी में मिलते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, वर्तमान में नदी यहां आते-आते नाले का रूप ले लेती है।
इस तहसील के पास होता है नदी का विलय
अरवारी नदी अलवर जिले में ही अपनी 45 किलोमीटर की यात्रा पूरी करती है। इस दौरान यह थानागाजी तहसील के पास साहबी नदी से मिल जाती है। इसके बाद साहबी नदी आगे बढ़ते हुए हरियाणा पहुंचती है। साहबी नदी की तुलना में यह नदी बहुत ही छोटी है, लेकिन साहबी नदी को समृद्ध करने में इस नदी का योगदान माना जाता है।
1998 में अरवारी संसद का हुआ गठन
नदी को लेकर एक ऐतिहासिक कदम भी उठाया गया है। साल 1998 में नदी के जल प्रबंधन को लेकर अरवारी संसद का गठन किया गया था, जो कि प्रबंधन के लेकर अपने आप में एक अनूठा उदाहरण था।
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