दवाई की बोतल से मिनरल वॉटर तक का सफर, पढ़ें Bisleri के ब्रांड बनने की दिलचस्प कहानी
आज भारत में बोतलबंद पानी का एक बड़ा बाजार है, जिसमें पानी का ब्रांड Bisleri 60 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। एक समय में यह कंपनी दवाई की बोतल बेचा करती थी, लेकिन बाद में कंपनी ने बोतलबंद पानी बेचना शुरू किया।
आज भारत में बोतलबंद पानी का एक बड़ा बाजार बन गया है। इस बाजार में 60 फीसदी की हिस्सेदारी अकेले Bisleri की है, जो कि भारत का जाना-माना पानी का ब्रांड है। एक समय था, जब भारत में कहा जाता था कि यहां बोतलबंद पानी कौन ही खरीदेगा, लेकिन आज शुद्धता के लिए लोग बोतलबंद पानी को तवज्जों देते हैं।
बिस्लेरी कंपनी पहले दवाई बेचा करती थी, जो कि बाद में पानी की कंपनी में तब्दील हो गई और आज पानी का दूसरा नाम बन गई है। इस लेख में हम बिस्लेरी की सक्सेस स्टोरी के बारे में जानेंगे।
1851 में इतली से हुई थी शुरुआत
बिस्लेरी कंपनी एक इतालवी कंपनी हुआ करती थी, जिसकी शुरुआत 1851 में एक उद्यमी सिग्नोर फेलिस बिस्लेरी ने की थी। वह कांच की शीशी में हेल्थ टॉनिक भरकर बेचा करता थे। हालांकि, उनकी मृत्यु के बाद उनके पारिवारिक डॉक्टर सेसारे रोसी ने कंपनी को संभाला।
1965 में भारत आई बिस्लेरी
बिस्लेरी का भारत में आगमन 1965 में मुंबई के ठाणे से हुआ था। यहां डॉ. सेसारे ने भारतीय व्यवसायी खुशरू सुंतकू के साथ मिलकर बिस्लेरी की बोतल में हेल्थ टॉनिक के बजाय पानी बेचने का व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में यह केवल अमीरों के लिए हुआ करता था और कांच की बोतलों में मिलता था।
1969 में पार्ले ने बदल दी कहानी
साल 1969 में पार्ले कंपनी के मालिक रमेश चौहान ने सिर्फ 4 लाख रुपये में बिस्लेरी ब्रांड को खरीद लिया था। क्योंकि, उस समय उन्हें सोडा के लिए पानी की बहुत जरूरत थी।
पार्ले कंपनी ने किये ये बड़े बदलाव
रमेश चौहान ने बिस्लेरी को खरीदकर इसे कांच की बोतलों से प्लास्टिक की बोतलों में बदल दिया, जिससे इसका परिवहन आसान हो गया और परिवहन लागत भी कम हुई।
-चौहान ने बिस्लेरी को अमीर वर्ग से निकालकर छोटे मध्यम लोगों तक पहुंचाया। पानी को बोतलों में बंद कर छोटे दुकानदारों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया गया। उन्होंने ब्रांड को लोगों की जरूरत बना दिया, जिससे बाजार में पानी के लिए बिस्लेरी का मांग बढ़ गई।
विज्ञापन और ब्रांडिंग ने दी नई दिशा
बिस्लेरी कंपनी ने अपने विज्ञापन और ब्रांडिंग पर भी काम किया। कंपनी के ऊंट वाले विज्ञापन ने ब्रांड वैल्यू को मजबूत करने के साथ लोगों के दिमाग में पानी को लेकर बिस्लेरी की छाप छोड़ी। वहीं, कंपनी का प्रसिद्ध कैंपन रहा "Har Paani Ki Bottle Bisleri Nahi Hoti" ने ग्राहकों का भरोसा जीता।
बीते वर्षों में क्यों चर्चाओं में थी बिस्लेरी
बीते वर्ष बिस्लेरी कंपनी चर्चाओं में थी। दरअसल, 2022-23 में मार्केट में यह खबर थी कि टाटा समूह द्वारा बिस्लेरी को खरीदा जा रहा है। हालांकि, रमेश चौहान ने कंपनी की कमान अपनी बेटी जयंती चौहान को दे दी, जिसके बाद इन अटकलों पर विराम लग गया।
पढ़ेंः हलवाई से शुरू किया था सफर, आज कहलाते हैं पूरे भारत के ‘भुजिया किंग
A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.