हलवाई से शुरू किया था सफर, आज कहलाते हैं पूरे भारत के ‘भुजिया किंग

Last Updated: Apr 8, 2026, 13:35 IST

भारत में जब भी भुजिया की बात होती है, तो इसमें सबसे ऊपर गंगाबिशन अग्रवाल का नाम लिया जाता है। वह एक बड़े नमकीन ब्रांड के पीछे का मुख्य चेहरा हैं। आज उनका परिवार इस विरासत को संभाल रहा है।

भारत के भुजिया किंग
भारत के भुजिया किंग

चाय के साथ स्नैक्स सभी को पसंद होता है। स्नैक्स में भुजिया का साथ स्वाद को और भी बढ़ा देता है। हालांकि, क्या आप भारत के ‘भुजिया किंग’ के बारे में जानते हैं ? भारत में गंगाबिशन अग्रवाल को भुजिया किंग के नाम से जाना जाता है। आज यह उपाधि उनके पोते मोतीलाल अग्रवाल के नाम है, जिन्होंने भारत की भुजिया के स्वाद को न सिर्फ भारत में फैलाया, बल्कि विदेशों में भी इसे पहुंचाने में मदद की।

1937 में छोटी से दुकान से शुरू हुई कहानी

गंगाबिशन अग्रवाल ने 1937 में बिकानेर में अपने पिता की एक छोटी से दुकान में भुजिया के स्वाद में बदलाव कर दिया था। उन्होंने भुजिया बनाने में मोठ की दाल का उपयोग किया, जिससे भुजिया पहले से अधिक कुरकरी और स्वादिष्ट हो गई थी। बाद में उन्होंने इसे पतला भी किया, जिससे इसे खाने के तरीके में बदलाव हुआ।

शुरुआत में दिया डूंगर सेवा नाम

उस समय बीकानेर में महाराजा डूंगर सिंह हुआ करते थे। उनके नाम पर ही भुजिया का नाम डूंगर सेव रख दिया गया और यह रातों-रात लोगों के बीच लोकप्रिय हो गई।

मोतीलाल अग्रवाल ने किया विस्तार

भुजिया किंग कहे जाने वाले मोतीलाल अग्रवाल, गंगाबिश अग्रवाल के पोते हैं। उन्होंने अपने इस व्यवसाय को राजस्थान से बाहर फैलाने का निर्णय लिया। इस कड़ी में उन्होंन अपने भाइयों के साथ कोलकाता, नागपुर और दिल्ली के बाजार में अपने भुजिया ब्रांड को स्थापित किया।

मोतीलाल ने की आधुनिक पैकेजिंग की शुरुआत

मोतीलाल अग्रवाल 1970-80 के दशक में समझ गए थे, यदि भुजिया का स्वाद दूर तक पहुंचाना है, तो कंपनी को अपनी पैकेजिंग पर भी काम करना होगा। इस कड़ी में उन्होंने जिप-लॉक वाली पैकेजिंग पर काम किया और भुजिया को नए पैकेट में पैक कर दूर-दूर तक पहुंचाया। 

दिल्ली से मिली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान

अग्रवाल द्वारा दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में 1982 में पहला भुजिया स्टोर खोला गया। इसकी कमान अब मनोहर लाल और मधुसुदन अग्रवाल के हाथ में है, जो कि दिल्ली-एनसीआर का बिजनेस संभालते हैं। यहां स्थापित होने के बाद ब्रांड स्टोर चल पड़ा, जिसके बाद 1990 में कंपनी का विनिर्माण संयंत्र भी स्थापित किया गया। 

तीन ग्रुप में बंटा है परिवार का बिजनेस

मोतीलाल अग्रवाल के बाद उनकी यह विरासत उनके बेटे शिवकिशन अग्रवाल ने संभाली, जिनके पास नागपुर ग्रुप है। यह महाराष्ट्र व पश्चिमी भारत का बिजनेस देखते हैं। वहीं, उनके अन्य बेटे मनोहर लाल और मधुसुदन अग्रवाल दिल्ली का बिजनेस देखते हैं, जबकि प्रभु शंकर अग्रवाल कोलकाता समूह का बिजनेस देखते हैं। आपको बता दें कि शिवकिशन अग्रवाल ने ही समूह को नमकीन से निकालकर मिठाई में काजू कतली का ब्रांड और रेस्तरां चेन में बदलने का परिवर्तन किया था। 

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Apr 8, 2026, 13:35 IST

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