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सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त विवरण

Last Updated: Feb 8, 2018, 10:32 IST

सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) की अर्थव्यवस्था कृषि और व्यापार पर आधारित थी| कृषि कार्य हड़प्पाकालीन शहरों के आसपास के दूरस्थ और अविकसित क्षेत्र में किया जाता था, जहाँ से शासक वर्ग भविष्य में उपयोग हेतु कृषि अधिशेष को लाकर धान्यकोठारों में जमा करते थे| यहाँ हम सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

Summary on the Economy of the Indus Valley Civilization in hindi
Summary on the Economy of the Indus Valley Civilization in hindi

सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) की अर्थव्यवस्था कृषि और व्यापार पर आधारित थी| कृषि कार्य हड़प्पाकालीन शहरों के आसपास के दूरस्थ और अविकसित क्षेत्र में किया जाता था, जहाँ से शासक वर्ग भविष्य में उपयोग हेतु कृषि अधिशेष को लाकर धान्यकोठारों में जमा करते थे|

सिंधु घाटी सभ्यता की मुख्य फसलें गेहूं, जौ, सरसों आदि थी| लोथल और रंगपुर में चावल के साक्ष्य भी मिले हैं| कालीबंगा एकमात्र ऐसा जगह है जहाँ से खेतों के साक्ष्य मिले हैं| इस सभ्यता के लोग कपास की भी खेती करते थे| यूनानी लोग कपास को “सिन्डन” (sindon) अर्थात (सिंध से) कहते थे| मोहनजोदड़ो से बुने हुए कपास का एक टुकड़ा भी प्राप्त हुआ है|

सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था

Economy of Indus Valley Civilisation

कृषि: सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी जिसे व्यापार और वाणिज्य का भी समर्थन प्राप्त था| उस समय की मुख्य खाद्य फसलें गेहूं और जौ थी, लेकिन राई, मटर, तिल एवं सरसों आदि की भी खेती होती थी|

व्यापार एवं वाणिज्य: सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान धात्विक मुद्राओं के उपयोग के बिना व्यापार एवं वाणिज्य का अत्यधिक विकास हुआ था क्योंकि उस समय का व्यापार वस्तु-विनिमय प्रणाली पर आधारित था| हालांकि, उस समय के कुछ मुहरों के भी साक्ष्य मिले हैं लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उनका उपयोग कुछ गिने-चुने वस्तुओं के व्यापार के लिए ही होता था|

विभिन्न देशों से संपर्क: पुरातात्विक साक्ष्य के रूप में प्राप्त मुहरों से पता चलता है कि इस सभ्यता का संपर्क उर, उम्मा, कीश, लागश, सूसा और तेल अस्मर जैसे मेसोपोटामियाई शहरों के साथ था| मेसोपोटामिया के साहित्यिक स्रोतों से पता चलता है कि 2500 ईसा पूर्व में उनका व्यापार 'मेहुला' (सिंधु क्षेत्र) के साथ होता था और उनके दो महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र 'दिलमन' (बहरीन) और ‘मकान’ (मकरान) थे|

वजन और माप: इस सभ्यता के लोगों ने अपनी खुद की वजन और माप प्रणाली विकसित की थी जो 16 के गुणज पर आधारित था|

पशुपालन: सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान कूबड़ वाले सांड, बैल, भैस, बकरी, भेड़, सूअर, बिल्ली, कुत्ता और हाथियों को पाला जाता था|

सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान कृषि, उद्योग, शिल्प और व्यापार जैसे आर्थिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों में काफी प्रगति हुई थी| कारीगरों के विशेष समूहों में सुनार, ईंट निर्माता, पत्थर काटने वाले, बुनकर, नाव बनाने वाले और टेराकोटा निर्माता शामिल थे| पीतल और तांबे के बर्तन इस सभ्यता के धातु शिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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First Published: Feb 8, 2018, 10:32 IST

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