प्रकाश तरंगों का व्यतिकरण क्या है?

Apr 9, 2018, 14:20 IST

जब समान आव्रत्ति की दो प्रकाश तरंगे किसी माध्यम में एक ही दिशा में गमन करती हैं तो उनके अध्यारोपण के फलस्वरूप प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन हो जाता है जिसे व्यतिकरण कहते हैं. आइये इस लेख के माध्यम से प्रकाश की तरंगों का व्यतिकरण (Interference of Light Waves) और उसके प्रकार के बारे में अध्ययन करते हैं.

What is Interference of Light Waves?
What is Interference of Light Waves?

व्यतिकरण (Interference) सभी प्रकार की तरंगों का एक गुण है. ये हम सब जानते हैं की प्रकाश तरंगों के रूप में चलता है, अत: प्रकाश तरंगें भी व्यतिकरण की घटना को दर्शाती हैं.
क्या आप जानते हैं की इस धारणा का समावेश भौतिक प्रकाशिकी में टॉमस यंग (Thomas Young)  ने किया था. उनके बाद व्यतिकरण का व्यवहार किसी भी तरह की तरंगों या कंपनों के समवेत या तज्जन्य प्रभावों को व्यक्त करने के लिए किया जाता रहा है.
व्यतिकरण (Interference) क्या होता है?
जब समान आव्रत्ति और लगभग समान आयाम की दो प्रकाश तरंगे किसी माध्यम में एक साथ एक ही दिशा में गमन करती हैं तो अध्यारोपण के सिद्धांत के अनुसार परिणामी तरंग का निर्माण करती हैं. परिणामी तरंग का आयाम मूल तरंगों के आयाम से भिन्न होता है. चूकी प्रकाश की तीव्रता आयाम के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है, प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन हो जाता है. कुछ स्थानों पर प्रकाश की तीव्रता अधिकतम, कुछ स्थानों पर न्यूनतम अथवा शून्य होती है. इस घटना को प्रकाश का व्यतिकरण कहते हैं.
अत: जब समान आव्रत्ति की दो प्रकाश तरंगे किसी माध्यम में एक ही दिशा में गमन करती हैं तो उनके अध्यारोपण के फलस्वरूप प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन हो जाता है. इस घटना को प्रकाश का व्यतिकरण कहते हैं.
व्यतिकरण (Interference) कितने प्रकार का होता है?
व्यतिकरण दो प्रकार के होते हैं: (i) संपोषी या रचनात्मक व्यतिकरण और (ii) विनाशी व्यतिकरण.

Types of Interference of light waves
Source: www.reachoutmichigan.org.com

प्रकाश का परावर्तन
(i) संपोषी या रचनात्मक व्यतिकरण (Constructive Interference)
माध्यम के जिस बिन्दु पर दोनों तरंगें समान कला में मिलती हैं अर्थात दोनों तरंगों के शीर्ष या गर्त एक साथ पड़ते हैं, उस बिन्दु पर दोनों तरंगे एक-दूसरे के प्रभाव को बढ़ाती हैं. अत: प्रकाश की परिणामी तीव्रता अधिकतम होती है. इस प्रकार के व्यतिकरण को संपोषी या रचनात्मक व्यतिकरण कहते हैं.
(ii) विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference)
माध्यम के जिस बिन्दु पर तरंगें विपरीत कला में मिलती हैं अर्थात एक तरंग के शीर्ष पर दूसरी तरंग का गर्त या एक तरंग के गर्त पर दूसरी तरंग का शीर्ष पड़ता है , उस बिन्दु पर दोनों तरंगें एक-दूसरे के प्रभाव को नष्ट कर देती हैं. अत: उस बिन्दु पर प्रकाश की परिणामी तीव्रता न्यूनतम या शून्य होती है. इस प्रकार के व्यतिकरण को विनाशी व्यतिकरण कहते हैं.

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Shikha Goyal is a journalist and a content writer with 9+ years of experience. She is a Science Graduate with Post Graduate degrees in Mathematics and Mass Communication & Journalism. She has previously taught in an IAS coaching institute and was also an editor in the publishing industry. At jagranjosh.com, she creates digital content on General Knowledge. She can be reached at shikha.goyal@jagrannewmedia.com
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