करनाल का वह युद्ध, जिसके बाद लुट गया था भारत का कोहिनूर हीरा
भारत में आपने पानीपत के युद्ध के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आपने कभी करनाल युद्ध के बारे में पढ़ा या सुना है। यह युद्ध मुगल काल में निर्णायक युद्ध रहा था, जिसने दुनिया को दिखा दिया था कि मुगलों में अंदर ही अंदर विरोध चल रहा है और मुगल सेना अब कमजोर हो चुकी है।
भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें अलग-अलग युद्धों के बारे में पढ़ने और सुनने को मिलता है। इन युद्धों में सबसे प्रमुख पानीपत का युद्ध रहा है, जिसकी जमीन इतिहास के तीन बड़े युद्धों की गवाह रही है। हालांकि, पानीपत से कुछ ही दूरी पर करनाल भी इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।
क्योंकि, यहां इतिहास का वह युद्ध हुआ था, जिसने भारत में मुगलों की सत्ता को और कमजोर कर दिया था और भारत का सोना-चांदी सब लूट लिया गया था। क्या आपने कभी इस युद्ध के बारे में पढ़ा या सुना है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
कब और किसके बीच हुआ करनाल का युद्ध
करनाल का युद्ध 22 फरवरी, 1739 को ईरानी शासक नादिर शाह और दिल्ली की गद्दी पर बैठे मुगल सम्राट मोहम्मद शाह रंगीला के बीच हुआ था। यह युद्ध तीन घंटे चला था, जिसमें मुगलों की हार हुई थी।
क्यों हुआ था करनाल का युद्ध
इतिहासकारों ने करनाल युद्ध के अलग-अलग कारण बताए हैं, जिनमें से एक राजनीतिक कारण भी है।
क्या था राजनीतिक कारण
नादिर शाह ने कंधार जीत लिया था, जिसके बाद उसने मोहम्मद शाह से अफगान विद्रोहियों को काबुल में शरण देने के लिए मना किया था। हालांकि, शाह ने यह बात नहीं मानी।
क्या था आर्थिक कारण
उस समय यह विख्यात था कि दिल्ली के लाल किले में भारी मात्रा में सोना-चांदी और कीमती रत्न हैं। ऐसे में नादिर शाह ईरान की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए भारत से दौलत लूटना चाहता था।
इन नवाबों पर है आरोप
नादिर शाह के दिल्ली आक्रमण को लेकर अवध के नवाब सादत खान और हैदराबाद के निजाम-उल-मुल्क पर भी आरोप लगाया जाता है कि उन्होंने ही नादिर शाह को दिल्ली आक्रमण के लिए आमंत्रित किया था।
क्या रहे युद्ध के परिणाम
नादिर शाह ने करनाल में युद्ध जीतने के बाद दिल्ली के लाल किले की ओर रूख किया था। यहां पहुंच उसने दिल्ली के लाल किले से सभी सोना-चांदी के भंडार को खाली कर दिया था। वहीं, दिल्ली की स्थानीय जनता ने नादिर शाह और उसकी सेना का विरोध किया, तो नादिर शाह ने दिल्ली में कत्ल-ए-आम मचाया था। इस दौरान दिल्ली में एक ही दिन में करीब 26,000 लोगों को ईरानी सैनिकों ने मार दिया था।
भारत ने खोया कोहिनूर और सिंहासन
नादिर शाह दिल्ली में करीब 53 दिनों तक रहा था और जाते समय अपने साथ बेशकीमती हीरा कोहिनूर और कीमती रत्नों से जड़ा हुआ सोने का मयूर सिंहासन ले गया था। इस युद्ध के बाद दुनिया को मुगलों की कमजोरी के बारे में पता चल गया था, जिसका फायदा बाद में मराठों और ब्रिटिश ने उठाया।
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