इतिहास का वह एक्ट, जिससे भारत को मिला था पहला शिक्षा बजट
यह बात हम सभी जानते हैं कि अंग्रेजों ने भारत में 200 सालों तक राज किया था। इस दौरान अंग्रेजों की ओर से भारत में कई कड़े कानून लागू किए गए थे। इन कानूनों में से एक चार्टर एक्ट, 1813 का नाम भी सुनने को मिलता है, जिससे भारत को पहला शिक्षा बजट मिला था। क्या आप इसके बारे में जानते हैं, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारत में अंग्रेजों ने करीब 200 सालों तक राज किया। इस दौरान अंग्रेजों ने भारत में कई महत्त्वपूर्ण बदलाव किए। इनमें से एक चार्टर एक्ट 1813 का नाम भी आता है, जिसने भारत में कई बड़े बदलाव किए थे। इनमें से एक भारत में आधुनिक शिक्षा के लिए बजट देना था। इसे भारतीय इतिहास में नई शिक्षा प्रणाली को जन्म देने वाला एक्ट माना जाता है। क्या था चार्टर एक्ट 1813, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
क्या था चार्टर एक्ट 1813
चार्टर एक्ट 1813 को ब्रिटिश संसद में पेश किया गया था। इस अधिनियम के तहत कंपनी को भारत में मिले शासन को अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया था, लेकिन कंपन की शक्तियों को सीमित कर दिया गया था।
खत्म हुआ कंपनी का एकाधिकार व्यापार
इस एक्ट के तहत व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार खत्म कर दिया गया था और भारत में व्यापार के दरवाजों को सभी व्यापारियों के लिए खोल दिया गया। हालांकि, कंंपनी का चाय और चीन के साथ एकाधिकार व्यापार बना रहा था।
इतिहास में पहली बार शिक्षा का बजट
आपको बता दें कि चार्टर एक्ट 1813 के तहत भारत में पहली बार शिक्षा का बजट तय किया गया था। इसकी राशि सालाना 1 लाख रुपये रखी गई थी, जिससे भारत में पश्चिमी शिक्षा की नींव रखी गई थी। हालांकि, बाद में इससे विवाद भी हुआ, जिसे ओरिएंटलिस्ट एंगिलिस्टिक विवाद भी कहते हैं।
चार्टर एक्ट से मिला ईसाई मिशनरियों को प्रवेश
भारत में ईसाई मिशनरियों का प्रवेश 1813 के चार्टर एक्ट के बाद ही हुआ था। इससे पहले प्रवेश पर प्रतिबंध था। इस एक्ट के तहत ईसाई मिशनरियों को भारत में लाइसेंस प्रणाली के तहत ईसाई धर्म का प्रचार और प्रसार करने की अनुमति मिली थी।
ब्रिटिश क्राउन का प्रभुत्व
चार्टर एक्ट 1813 के तहत यह स्पष्ट किया गया था कि ईस्ट इंडिया कंपनी के पास भारत का क्षेत्र बेशक ही है, लेकिन इसकी संप्रभुता ब्रिटिश क्राउन के पास ही है। यानि कि असली अधिकार ब्रिटिश सरकार के पास है, जिससे कंपनी का किरदार सिर्फ प्रबंधक के रूप में रह गया था।
क्यों लागू हुआ था चार्टर एक्ट 1813
अब सवाल है कि आखिर चार्टर एक्ट 1813 क्यों लागू किया गया था। दरअसल, उस समय यूरोप में नोपोलियन बोनापार्ट का दबदबा हुआ करता था, जिसने बर्लिन डिक्री के माध्यम से यूरोप में ब्रिटिश व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे ब्रिटिश व्यापारियों को नुकसान हुआ, ऐसे में उन्होंने भारत में व्यापार के लिए मांग की, जिससे उन्हें इसका लाभ मिल सके।
वहीं, मिशनरी भी काफी समय से भारत में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार को लेकर मांग कर रही थी। ऐसे में इन सभी दबावों के बीच ब्रिटिश संसद में चार्टर एक्ट 1813 पास किया गया।
पढ़ेंः अंग्रेजों के समय क्या था ‘सूर्यास्त कानून’, जानें यहां
A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.