दुनिया का सबसे बड़ा लीची उत्पादक देश कौन-सा है, जानें यहां
लीची को सबसे मीठे फलों में गिना जाता है। यह दुनियाभर के देशों में उत्पादित होता है। हालांकि, लीची का सबसे बड़ा उत्पादित देश एशिया में मौजूद है, जहां हर साल 20 से 25 लाख मीट्रिक टन लीची का उत्पादन होता है।
लीची की गिनती प्रमुख फलों में होती है। यह दुनियाभर के देशों में उत्पादित होता है। इस कड़ी में यदि लीची के सबसे बड़े उत्पादक देश की बात करें, तो यह एशियाई देश चीन है। ऐसा होने के पीछे भौगोलिक, ऐतिहासिक और अन्य कारण मौजूद हैं।
आपको बता दें कि वैश्विक लीची उत्पादन का करीब 70 से 75 फीसदी हिस्सा चीन से आता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर किस प्रकार चीन में लीची का सबसे अधिक उत्पादन होता है।
चीन में कितना होता है लीची का उत्पादन
चीन में कुल लीची उत्पादन की बात करें, तो यह 20 से 25 लाख मीट्रिक टन रहता है। साल 2025 में यह 20.2 लाख मीट्रिक टन रिकॉर्ड किया गया है।
आदर्श जलवायु और भौगोलिक स्थिति जिम्मेदार
लीची के लिए एक विशेष प्रकार की जलवायु चाहिए होती है, जो कि चीन के दक्षिणी हिस्से में मिलती है।
उप-उष्णकटिबंधीय जलवायु का प्रभाव
दक्षिणी चीन के ग्वांगडोंग और फुजियान में प्रांतों में सर्दी में हल्की ठंड और गर्मी में उच्च आर्द्रता होती है, जिससे लीची उत्पादन में मदद मिलती है।
अधिक एरिया में होती है लीची की खेती
चीन में लाखों हेक्टेयर भूमि पर लीची की खेती होती है। यहां लीची के बड़े-बड़े बागान मौजूद हैं। यहां मौजूद ग्वांगडोंग प्रांत में लीची का क्षेत्रफल बहुत अधिक है।
अनुसंधान पर केंद्रित है चीन
चीन कृषि में अनुसंधान पर केंद्रित है। यहां लीची की सैकड़ों किस्मों पर शोध किया गया है, जिससे लीची की किस्मों को अलग-अलग मौसम में उगाया जा सकता है।
अब मार्च से अगस्त तक होती है लीची
चीन ने अपने शोध की मदद से लीची के सीजन को भी बढ़ा दिया है। अब यहां मार्च से लेकर अगस्त तक लीची उपलब्ध रहती है। इसमें यहां की कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स का भी सहयोग है, जिससे यहां लीची की कोल्ड स्टोरेज बढ़ी है और फास्ट ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बना है।
यही वजह है कि लीची को बागों के बाद सीधा बाजारों तक बहुत ही कम समय में पहुंचा दिया जाता है।
क्या है लीची का इतिहास
लीची का मूल स्थान दक्षिण चीन और उत्तरी वियतनाम कहा जाता है। चीन में बीते 2000 सालों से लीची की खेती हो रही है। यहां राजा-महाराजाओं के समय से ही लीची की खेती को संरक्षण दिया गया था, जिससे यहां के किसानों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी लीची की खेती को प्राथमिकता दी और यहां लीची की पैदावार बढ़ी।
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