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A200 Drone: एस्टेरिया एयरोस्पेस को मिला भारत का पहला माइक्रो कैटेगरी ड्रोन टाइप सर्टिफिकेट, जानें A200 ड्रोन के बारें में

A200 Drone: एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड को, स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किए गए A200 ड्रोन के लिए, DGCA से भारत का पहला सूक्ष्म श्रेणी ड्रोन टाइप प्रमाणन हासिल किया है. यह एक स्वचालित टेक-ऑफ और लैंडिंग, मल्टीपल फेल-सेफ़, सिंगल पायलट ऑपरेशन वाला ड्रोन है.

एस्टेरिया एयरोस्पेस को मिला भारत का पहला माइक्रो कैटेगरी ड्रोन टाइप सर्टिफिकेट
एस्टेरिया एयरोस्पेस को मिला भारत का पहला माइक्रो कैटेगरी ड्रोन टाइप सर्टिफिकेट

A200 Drone: एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड को, स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किए गए A200 ड्रोन के लिए, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से भारत का पहला सूक्ष्म श्रेणी ड्रोन टाइप प्रमाणन हासिल किया है. एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड एक ड्रोन टेक्नोलॉजी कंपनी है. इसे ड्रोन नियम 2021 के अनुसार डीजीसीए से प्रमाणित होने वाली पहली कंपनी बन गई है.

एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड ने घोषणा की कि A200 ड्रोन को जनवरी 2022 में मानव रहित विमान प्रणालियों के लिए, प्रमाणन योजना का पूरी तरह से अनुपालन किया है.

A200 ड्रोन की क्या है खासियत?

  • यह एक स्वचालित टेक-ऑफ और लैंडिंग, मल्टीपल फेल-सेफ़, सिंगल पायलट ऑपरेशन वाला ड्रोन है.
  • यह 40 मिनट तक की उड़ान भरने में सक्षम है. इसमे टूल-लेस असेंबली और डिसेंबली तकनीकी का उपयोग किया गया है.
  • यह ड्रोन हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग कैमरा और एक सर्वेक्षण-ग्रेड GPS से लैस है. जो लैंड मैपिंग में उपयोगी है.

A200 ड्रोन की उपयोगिता:

  • इस प्रकार के ड्रोन का आज के समय में बहुत ही आवश्क हो गए है. जो विभिन्न प्रकार की मैपिंग और अन्य कार्य सरलता से कर सकते है. 
  • लैंड मैपिंग: इस तरह के ड्रोन की मदद से आज बैंक या अन्य कोई संस्था अपने जरूरतों और सर्वेक्षणों के लिए इस A200 ड्रोन का उपयोग कर सकता है. इसमे लगे हाई रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग कैमरा की मदद से सटीक और कम समय में लैंड मैपिंग जैसे कार्यों को किया जा सकता है.
  • स्वामित्व (SVAMITVA) योजना: सरकार के स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के बेहतर क्रियान्वयन में यह ड्रोन बहुत ही कारगर साबित होगा. जिसकी मदद से सही स्वामित्व डेटा को एकत्र किया जा सकता है. साथ ही यह स्वामित्व डेटा को डिजिटाइज़ करने और स्पष्ट रूप से चित्रित करने में मदद कर सकता है.
  • एग्रीकल्चर में उपयोगी: A200 ड्रोन को कृषि क्षेत्र में फसल की वृद्धि और स्वास्थ्य की निगरानी, क्षति का मूल्यांकन करना और बीमा दावों के लिए दृश्य रिकॉर्ड कैप्चर करने में किया जा सकता है.
  • रिमोट पायलट सर्टिफिकेशन: यह ड्रोन रिमोट पायलट सर्टिफिकेट प्राप्त करने के इच्छुक लोगों की भी प्रशिक्षण में मदद कर सकता है. लोग रिमोट पायलट प्रशिक्षण संगठनों से पायलट प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते है.

DGCA द्वारा ड्रोन का वर्गीकरण:

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा ड्रोन को उनके भार के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है. भारतीय गुणवत्ता परिषद ने बिज़नेस, सरकार और शिक्षा जगत के अधिकारियों के साथ परामर्श के बाद ड्रोन प्रमाणन कार्यक्रम शुरू किया है. माइक्रो ड्रोन वे होते हैं जिनका असेंबल करने के बाद भार 250 ग्राम से 2 किलोग्राम के बीच होता है.

भारत में ड्रोन पहल:

सरकार ने ड्रोन (संशोधन) नियम, 2022 पारित किया है जिसमें कहा गया है कि गैर-व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए 2 किलोग्राम तक के छोटे से मध्यम आकार के ड्रोन उड़ाने के लिए रिमोट पायलट सर्टिफिकेट (पहले इसे लाइसेंस कहा जाता था) की आवश्यकता नहीं होगी.