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जानिये कैसे शुरू हुई थी देश में STD की सेवा

भारत में दिन-प्रतिदिन अत्याधुनिक तकनीक का विकास हो रहा है. विशेष तौर पर देश में मोबाइल क्रांति का अपना एल अलग स्तर है लेकिन वहीं एक ऐसा समय भी था जब किसी से कॉल पर बात करने के लिए सेकंड के हिसाब से पैसे देने पड़ा करते थे..जानें कैसे देश में STD सेवा शुरू हुई और इतनी जल्दी उसका अस्तित्व कमजोर भी पड़ गया.

know how std call service started in india
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भारत में टेलीफोन का विकास बेहद दिलचस्प कहानी है.  एक समय ऐसा था की लोगों के पास टेलीफोन होना दुर्लभ हुआ करता था लेकिन आज के समय में लगभग हर दूसरे इंसान के पास मोबाइल फ़ोन है और उसमें अनलिमिटेड रिचार्ज होता है जिसमें कॉलिंग और इंटरनेट सुविधा मिलती है और इसकी मदद से चंद सेकंडों में हम इंसान को वीडियो कॉल के द्वारा देख भी सकते हैं और साथ ही इन रिचार्ज प्लान्स में OTT प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन अलग से मिलता है.

 देश में मोबाइल की इस क्रांति के कारण STD महज़ एक इतिहास बनकर रह गया. एक समय था की लोग केवल कुछ मिनट के लिए फ़ोन पर बात करने के लिए STD की लंबी कतारों में खड़े हुआ करते थे परन्तु आज समय पूरी तरह से बदल गया है.

क्या है STD  

source: the quizopedia

सब्सक्राइबर ट्रंक डायलिंग ( SUbscriber trunk dialing) को STD कहा जाता है. STD का अर्थ होता है की टेलीफोन यूज़र को बिना ऑपरेटर की सहायता के ट्रंक कॉल करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए. STD से पहले यूज़र ऑपरेटर की मदद से किसी दूसरे व्यक्ति से बात कर पाता था. 

कैसे काम करती है STD

STD सर्विस के द्वारा शहर से लेकर गाँवों तक कॉल करने के लिए STD कोड दिया जाता था. उपलब्ध कराए गये कोड के साथ यूज़र का नंबर डायल किया जाता था. इन कोड को जानने के लिए टेलीफोन डायरेक्टरी के साथ STD कोड की एक किताब मिला करती थी. 

देश में STD की शुरुआत 

भारत में STD सेवा की शुरुआत 25 नवंबर 1960 को हुई थी. देश में STD सर्विस की शुरुआत के तहत पहली कॉल कानपुर से लखनऊ के बीच की गयी थी. देश में यह पहली बार था की फ़ोन पर बात करने के लिए ट्रंक कॉल की ज़रूरत नहीं थी. 

देश में STD का अस्तित्व 

भारत एक विकासशील देश है जहाँ एक बड़ी आबादी के पास निजी मोबाइल या टेलीफोन नही हुआ करते थे. ऐसे में यह STD बूथ बिना निजी टेलीफोन के कुछ शुल्क के साथ फ़ोन करने का एक बेहतरीन ऑप्शन था. 

गौरतलब है की देश में टेलीफोन का विकास उस समय काफी कम था इसलिए कॉल करना काफी महंगा हुआ करता था बल्कि इन STD कॉल्स के लिए सेकंडों के हिसाब से पैसे देना पड़ा करते थे लेकिन जैसे-जैसे देश में टेलीफोन क्रांति हुई वैसे-वैसे कॉल का रेट कम हो गया.

देश में पहले STD कॉल्स के लिए केवल STD बूथ्स पर ही जाना पड़ता था लेकिन धीरे-धीरे देश में STD का विकास हुआ और इन बूथों को किराना व स्टोर के तौर पर विकसित होता हुआ देखा गया.  

देश में STD का पतन 

वर्ष  2008 में देश में करीब 50 लाख STD बूथ थे जो 2009 में घटकर 45 लाख रह गये और वर्ष 2010 के बाद से देश में STD का प्रचलन और अधिक कम हो गया और तकरीबन 6 साल बाद यह संख्या घटकर महज़ 6 लाख के आस-पास ही रह गयी. 

वर्ष 2018 से पहले रेलवे स्टेशन पर STD बूथ होना अनिवार्य हुआ करता था लेकिन वर्ष 2018 के बाद भारतीय रेलवे स्टेशन पर भी इन बूथ की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया.