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UPSC Success Story: छठी कक्षा में हो गई थीं फेल, UPSC सिविल सेवा में बनीं Topper, पढ़ें रूकमणि रियार की कहानी

UPSC Success Story: यूपीएससी सिविल सेवा में हर साल लाखों बच्चे मेहनत करने के साथ अपनी किस्मत आजमाते हैं। इसके लिए छात्र महंगी-महंगी कोचिंग में पढ़ाई करते हैं, लेकिन फिर भी सफलता निश्चित नहीं होती है। आज हम आपको रूकमणि रियार की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने बिना कोचिंग के ही पढ़कर सिविल सेवा में दूसरी रैंक प्राप्त कर आइएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।

UPSC Success Story: छठी कक्षा में हो गई थीं फेल, UPSC सिविल सेवा में बनीं Topper, पढ़ें रूकमणि रियार की कहानी
UPSC Success Story: छठी कक्षा में हो गई थीं फेल, UPSC सिविल सेवा में बनीं Topper, पढ़ें रूकमणि रियार की कहानी

UPSC Success Story: देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक है सिविल सेवा, जिसके लिए हर साल लाखों बच्चे आवेदन करते हैं और परीक्षा देने के लिए पहुंचते हैं। हालांकि, इन लाखों बच्चों में से केवल सैंकड़ों की संख्या में ही बच्चों को सफलता मिलती है। इसमें भी कुछ कोचिंग वाले बच्चे होते हैं, जो कई सालों से कोचिंग कर सिविल सेवा परीक्षा में बैठ रहे होते हैं। हालांकि, इनमें से ही कुछ बिना कोचिंग वाले होते हैं, जो अपनी मेहनत के दम पर सिविल सेवा की परीक्षा पास करते हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही स्टोरी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने बिना कोचिंग के ही इस कठिन परीक्षा को पास किया। हम बात कर रहे हैं पंजाब की रूकमणि रियार की, जिन्होंने अपने पहले प्रयास में ही दूसरी रैंक हासिल कर सफलता की कहानी गढ़ी है।

 

बचपन में छठी कक्षा में फेल होने का किया सामना

रुकमणि रियार की शुरुआती स्कूली शिक्षा गुरदासपुर से हुई है। वह चौथी कक्षा में डलहौजी के सेक्रेड हार्ट स्कूल पढ़ने के लिए गई। रुकमणि बचपन में पढ़ाई में ज्यादा अच्छी नहीं थी। ऐसे में परिवार ने उन्हें बोर्डिंग स्कूल भेजा। रुकमणि जब छठी कक्षा में पढ़ रही थी, तब परीक्षाएं अच्छी नहीं हुई और वह उस कक्षा में फेल हो गई।  

 

हालांकि, परीक्षा में मिली इस असफलता का रुकमणि पर खासा असर पड़ा। वह डिप्रेशन में रहने लगी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह असफलता के बाद परिवार, शिक्षक और दोस्तों के सामने जाने से डरती थी। कई महीनों तक वह तनाव में रही और उन्होंने इस बात का निर्णय लिया कि वह फिर कभी असफल नहीं होंगी। साथ ही असफलता से प्रेरणा लेकर वह एक होनहार छात्रा के रूप में नई शुरुआत भी करेंगी।

यूपीएससी का सफर

12वीं की पढ़ाई पूरी होने के बाद रुकमणि ने अमृतसर के गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से सोशल साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ मुंबई से सोशल साइंस में मास्टर डिग्री प्राप्त की और गोल्ड मेडलिस्ट भी बनीं। पोस्ट-ग्रेजुएशन के बाद रुकमणि रियार ने योजना आयोग के अलावा मैसूर में अशोदया और मुंबई में अन्नपूर्णा महिला मंडल जैसे एनजीओ के साथ इंटर्नशिप की। इस दौरान वह सिविल सेवा की ओर आकर्षित हुई और सिविल सेवा में करियर बनाने का निर्णय लिया।

 

बिना कोचिंग के खुद से की तैयारी

रुकमणि रियार ने आईएएस की तैयारी के लिए कहीं से कोचिंग लेने के बजाय खुद से तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने कक्षा छठी से 12वीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई शुरू की थी। इसके साथ ही इंटरव्यू की तैयारी के लिए रोजाना अखबार पढ़ना शुरू किया। कई मॉक टेस्ट में शामिल हुई व बीते वर्षों के प्रश्न पत्रों को हल किया। साल 2011 में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा को देशभर में दूसरी रैंक के साथ पास किया।

 

परीक्षा पास करने के बाद रूकमणि ने अपनी सेवा के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। रुकमणि रियार को अपर आयुक्त (निवेश और एनआरआईएस), बीआईपी और कार्यकारी निदेशक, रीको (RIICO), जयपुर के पद से श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर के पद पर स्थानांतरित किया गया था। इससे पहले वह संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राज्य स्वास्थ्य आश्वासन एजेंसी, बूंदी जिला कलेक्टर, डूंगरपुर जिला परिषद सीईओ, आईटी में अतिरिक्त आयुक्त, बांसवाड़ा एसडीएम के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।

 

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