बोर्ड एग्जाम और सी.सी.ई. पैटर्न, दोनों में क्या है अंतर और कौन सा सिस्टम है बेहतर?

Apr 2, 2018, 15:57 IST

इस लेख में हम कक्षा 10वीं में अपनाए जाने वाले पूर्व व वर्तमान मुल्यांकन प्रणालियों का विश्लेषण करते हुए यह जानने की कोशिश करेंगे कि बोर्ड एग्जाम और सी.सी.ई. पैटर्न में क्या अंतर है और दोनों में से कौनसा पैटर्न ज़्यादा बेहतर है.

Analysis of CBSE Board Exams and CCE Pattern of Assessment
Analysis of CBSE Board Exams and CCE Pattern of Assessment

बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) ने अकादमिक सेशन 2017-2018 से कक्षा 10वीं में सतत समग्र मूल्यांकन यानी सी.सी.ई. पैटर्न को समाप्त करते हुए बोर्ड की परीक्षा को सभी छात्रों के लिए अनिवार्य बना दिया था। बोर्ड के इस फैसले पर अध्यापक व पेरेंट्स की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही. कुछ ने इसे छात्रों के लिए एक सही फैसला बताते हुए कहा कि इससे देश भर में एक समान परीक्षा का आयोजन करने से हर छात्र को विभिन्न स्कूलों के छात्रों की तुलना में अपना लेवल पता चलेगा और उन्हें आने वाले बड़े इम्तिहानों के लिए आवशयक आत्मविश्वास भी मिलेगा. वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना था कि इससे पहले हर विषय के पाठ्यक्रम को दो हिस्सों में बाँटते हुए परीक्षा ली जाती थी जिससे छात्रों पर पढ़ाई का कम दबाव पड़ता था लेकिन बोर्ड एग्जाम के लिए उन्हें पूरे साल के विशाल पाठ्यक्रम को एक बार में तैयार करना होगा जो कि काफी मुश्किल है. इस तरह सभी हितधारकों की सकारात्मक और नकारात्मक प्रतिक्रियाओं के बीच, दसवीं कक्षा में नई मूल्यांकन योजना की शुरुआत की गई जिसके तहत वर्ष 2017-2018 की बोर्ड परीक्षा का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया. हालांकि कुछ विषयों में पेपर लीक के मामले सामने आने से परीक्षा में खलल ज़रूर पड़ा.

एक बार फिर से नये सेशन, 2018-2019 की शुरुआत होने जा रही है जिसमे विद्यार्थी अपनी अगली कक्षा में प्रवेश करेंगे. इसके साथ ही एक बार फिर से बोर्ड परीक्षा की पुर्नस्थापना के साथ मूल्यांकन प्रणाली में किये गये बदलाव पर चर्चा होगी. अब इस प्रणाली में सम्बंधित प्राधिकरण (authority) की तरफ से अन्य बदलाव लाने तक कक्षा 10वीं में यह असेसमेंट पैटर्न आने वाले कुछ वर्षों तक जारी रहेगा. यहाँ हम कक्षा 10वीं के वर्तमान व पूर्व अस्सेमेंट पैटर्न्स के नुकसान व फ़ायदों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे.

वर्तमान अस्सेमेंट पैटर्न

वर्तमान अस्सेमेंट पैटर्न के अनुसार विद्यार्थियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन 100 अंक के फाइनल एग्जाम के आधार पर किया जाता है जिसमें से 80 अंक बोर्ड परीक्षा के लिए रखे गए हैं और अन्य 20 अंक इंटरनल असेसमेंट के लिए. आइए यहाँ जानते हैं इस पैटर्न के कुछ मुख्य फ़ायदे व नुकसान.

फ़ायदे:

  • बोर्ड एग्जाम्स छात्रों को अपने स्कूल व कम्फर्ट लेवल से बाहर जाकर किसी नये स्कूल में, नये छात्रों के साथ परीक्षा लिखने का मौका देते हुए उन्हें पैन इंडिया एग्जाम्स के लिए तैयार करते हैं.
  • एक ही बोर्ड द्वारा पुरे देश में परीक्षा का आयोजन करने से, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता आती है.
  • स्कूल एग्जाम्स में पक्षपात की संभावना रहती है क्योंकि कुछ स्कूलों में प्रश्न पत्र काफी आसान लेवल के हो सकते हैं जबकि कुछ अन्य में मुश्किल. जबकि बोर्ड परीक्षा में सभी छात्रों को एक समान दर्जे पर टेस्ट किया जाता है.
  • क्योंकि वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली के अनुसार छात्रों को प्रत्येक विषय के पूरे पाठ्यक्रम के आधार पर बोर्ड परीक्षा लिखनी होती है, तो उसे अपने पाठ्यक्रम को कई बार दोहराने का मौका मिलता है जिससे छात्र के अकादमिक आधार को मजबूत बनाने में मदद मिलती है.
  • कक्षा 10वीं में दिए जाने वाले बोर्ड एग्जाम्स कक्षा 12वीं के बोर्ड एग्जाम्स के लिए पूर्व परीक्षण का काम करते हैं और छात्रों को बेहतरीन प्रदर्शन के लिए तैयार करते हैं.

नुकसान:

  • बोर्ड परीक्षा में अधिक से अधिक अंक लाने के महत्त्व पर अतिरिक्त ज़ोर देने से छात्रों में रटने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल रहा है.
  • वर्तमान प्रणाली में बोर्ड परीक्षा को 80% भार दिया गया है जिससे परीक्षा केंद्रित शिक्षा पर ज़्यादा फोकस किया जाता है और गैर अकादमिक गतिविधियों पर कम जोर दिया जाता है.
  • छात्रों के बोर्ड रिजल्ट को लेकर पेरेंट्स व टीचर्स की बड़ी उम्मीदों की वजह से छात्रों के ऊपर मानसिक दबाव बढ़ता है.
  • sesssesaaaबहुत से छात्रों को साल के अंत में एक साथ सम्पूर्ण पाठ्यक्रम पढ़ने की वजह से बोर्ड परीक्षा के लिए तैयारी करने में मुश्किल होती है.

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पूर्व अस्सेमेंट पैटर्न (सी.सी.ई. पैटर्न)

पूर्व असेसमेंट पैटर्न सतत समग्र मूल्यांकन (सी.सी.ई.) पर आधारित था जिसमें विद्यार्थी के सम्पूर्ण विकास पर जोर दिया जाता था. इसमें अकादमिक व गैर अकादमिक दोनों गतिविधियों को एक समान महत्त्व दिया जाता था. इसमें चार तिमाही टेस्ट व दो छिमाही टेस्ट शामिल थे जिन्हें क्रमशः फॉरमेटिव अस्सेमेंट और सम्मेटिव अस्सेमेंट का नाम दिया गया था. मूल्यांकन की यह प्रणाली भी कई फ़ायदों व नुकसानों के साथ आई.

फ़ायदे:

  • इस अस्सेमेंट पैटर्न में छात्रों की लर्निंग संबंधित जरूरतों व उनकी क्षमता पर अधिक ध्यान दिया जाता था.
  • इस सिस्टम से छात्रों की सीखने की प्रगति को सतत (continuous) तौर पर मॉनिटर करने में काफी मदद मिलती थी.
  • हर फॉरमेटिव व सम्मेटिव अस्सेमेंट में छात्रों को अपने प्रदर्शन को और बेहतर करने का मौका मिलता था.
  • छात्रों को अकादमिक एक्टिविटीज़ के साथ-साथ एक्स्ट्रा करीकुलर एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता था.
  • सीबीएसई के विशाल पाठ्यक्रम को दो भागों में बांटकर उसके आधार पर छात्रों का टेस्ट लिया जाता था जिससे छात्रों से पाठ्यक्रम के बोझ को कम किया जा सके.

नुकसान:

  • सी.सी.ई. पैटर्न की ज़्यादा आलोचना इस वजह से की गई कि इसकी वजह से छात्रों में बोर्ड परीक्षा के लिए गंभीरता कम हो रही थी.
  • इस अस्सेमेंट पैटर्न में सतत मूल्यांकन (continuous evaluation) की वजह से छात्रों को पूरा साल पढ़ना होता था जिसके चलते उन्हें शायद ही फ्री टाइम मिल पाता था.
  • इंटरनल एग्जाम पेपर्स स्कूल टीचर्स द्वारा ही सेट किये जाने की वजह से पक्षपात की संभावना बनी रहती थी.

तो इन सब बातों को जानने के बाद हम यह कह सकते हैं कि कोई भी सिस्टम परफेक्ट नहीं हो सकता जो कि समस्त हितधारकों को संतुष्ट कर सके. और बेहतर बनाने के संकल्प में हर सिस्टम में लगातार बदलाव होते रहेंगे.

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Gurmeet Kaur
Gurmeet Kaur

Assistant Manager

Gurmeet Kaur is an Education Industry Professional with 10 years of experience in teaching and creating digital content. She is a Science graduate and has a PG diploma in Computer Applications. At jagranjosh.com, she creates content on Science and Mathematics for school students. She creates explainer and analytical articles aimed at providing academic guidance to students. She can be reached at gurmeet.kaur@jagrannewmedia.com

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