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आईआईएम्स से एमबीए : ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर | जनरलिस्ट बनाम स्पेशलिस्ट | केस मेथड

ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर एक ऐसा क्षेत्र है जिसके अंतर्गत ऑर्गनाइजेशन तथा लोगों के बीच अंतरसंबंधों को समझने की कोशिश किया जाता है.किसी भी ऑर्गनाइजेशन की स्थापना करने तथा उनके कार्य करने के तौर तरीके में ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर का महत्वपूर्ण रोल होता है.

Mar 18, 2019 16:44 IST
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MBA at IIMs: Organizational Behaviour | Generalist vs Specialist | Case Method
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अधिकांश छात्रों का सपना होता है भारत के किसी प्रीमियर बी स्कूल में पढ़ाई करना.जब उन्हें इन बी स्कूल्स में एडमिशन मिलता है तो उनके सपने तो सच हो जाते हैं लेकिन उनमें से कुछ ही छात्रों को पता होता है कि किसी बी स्कूल में पढ़ाई करते समय अपने कोर्स में टॉप करने पर किस तरह की स्थिति उनके लिए बनती हैं ? इन सभी तथ्यों की सही समझ के लिए आईआईएम कलकत्ता के ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर ग्रुप के प्रोफेसर अभिषेक गोयल अपनी राय अभिव्यक्त कर रहे हैं. प्रोफेसर गोयल ने मैनेजमेंट एजुकेशन के फील्ड में ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर के महत्व पर प्रकाश डाला है. इसके अतरिक्त एमबीए को लेकर इस दुविधा का कि एमबीए देश से करना सही होगा या फिर विदेश से, पर भी अपने विचार व्यक्त किये हैं. अपनी अंतिम टिप्पणी में उन्होंने मैनेजमेंट स्टडी के अंतर्गत केस स्टडी अथवा केस मेथड के महत्व और प्रभाव पर भी अपने विचार शेयर किये हैं.

इन्टरव्यू का सारांश

एमबीए के अंतर्गत फंक्शनल एरिया के रूप में ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर

ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर एक ऐसा क्षेत्र है जिसके अंतर्गत ऑर्गनाइजेशन तथा लोगों के बीच अंतरसंबंधों को समझने की कोशिश किया जाता है. इसके साथ ही किसी ऑर्गनाइजेशन में काम करने वाले लोगों के बीच के अंतर संबंधों को भी समझने का प्रयत्न किया जाता है. किसी भी ऑर्गनाइजेशन की स्थापना करने तथा उनके कार्य करने के तौर तरीके में ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर का महत्वपूर्ण रोल होता है. इस प्रकार हम देखते हैं कि ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर मुख्य रूप से इन तीन बिन्दुओं (क्षेत्रों) को कवर करता है-

1.व्यक्ति

2. व्यक्तियों के बीच आतंरिक सम्बन्ध

3. व्यक्तियों और ऑर्गनाइजेशन के बीच अंतरसंबंध

जहां तक ​​मैनेजमेंट का सवाल है, ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर बिजनेस मैनेजर्स के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि उन्हें व्यक्तियों यानी कर्मचारियों, कर्मचारियों के व्यवहार और समग्र ऑर्गनाइजेशनल स्ट्रक्चर का मैनेजमेंट करना होता है.

एमबीए जनरलिस्ट बनाम स्पेशलिस्ट : वर्तमान और भविष्य

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और अन्य जैसे नए टेक्नोलॉजी के आगमन से एमबीए जनरलिस्ट या एमबीए स्पेशलिस्ट के बीच का अंतर बहुत कम होता जा रहा है तथा यह छात्रों के लिए दुविधाजनक स्थिति पैदा कर रही है.मैनेजमेंट की दुनिया में स्पेशलिस्ट का मुख्य काम किसी भी स्पेशल फील्ड की समस्या को गहराई से समझना तथा उसका समय के अनुरूप तकनीकी रूप से सर्वश्रेष्ठ समाधान निकालना होता है.लेकिन जब फाइनल डिसीजन की बात आती है तो इसे किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा लिया जाना चाहिए जो विभिन्न विशिष्टताओं के बीच की पेचीदगियों को समझने में सक्षम हो. इसी समय एच आर के जनरलिस्ट की भूमिका स्पष्टतः समझ में आती है.जनरलिस्ट स्पेशलिस्ट द्वारा प्रस्तुत किए गए समाधानों का मूल्यांकन करने के बाद उन समाधानों की व्यावहरिकता तथा उपयोगिता आदि को समझने के बाद सही निर्णय लेते हैं. इसलिए मैनेजेमेंट के क्षेत्र में स्पेशलिस्ट तथा जनरलिस्ट दोनों ही अपने स्पष्ट और निश्चित भूमिकाओं के कारण बहुत डिमांड में रहते हैं.

वैसे मैनेजेरियल भूमिकाओं में नित्य प्रति हो रहे विकास के कारण अब जनरलिस्ट और स्पेशलिस्ट की भूमिकाओं में मामूली सा अंतर रह गया है. धीरे–धीरे इनके बीच का अन्तर लगभग समाप्त ही होता जा रहा है. इसलिए एमबीए के बाद छात्र करियर के रूप में एक स्पेशलिस्ट की भूमिका में जाना पसंद करते हैं. बाद में अगर आप किसी एकेडमिक क्षेत्र में जाते हैं तो आप उस क्षेत्र में कुछ निश्चित रूप से विशेष कर सकते हैं.

इसी तरह, यदि आप बिजनेस के फील्ड में हैं, तो आप स्पेशलाइजेशन से दूर जाने लगते हैं अथवा स्पेशलाइजेशन का इस्तेमाल अधिक सामान्य तरीके से करना शुरू कर देते हैं.उदाहरण के तौर पर ऐसे कई सीईओ हैं जिन्होंने अपने करियर एक स्पेशलिष्ट के रूप में शुरू किया लेकिन बाद में वे जनरलिस्ट बन गए. अतः यह बात आप पर निर्भर करती है कि आप अपना विकास किस तरह करते हैं ?

केस मेथड का महत्व 

हाल के दिनों में केस मेथड भारत और विदेशों में टॉप एमबीए कॉलेजों में मैनेजमेंट एजुकेशन ग्रुप के बीच लोकप्रियता और वरीयता प्राप्त कर रहा है. केस मेथड लोगों को विभिन्न दृष्टिकोणों से मैनेजमेंट से जुड़ी समस्या को देखने की अंतर्दृष्टि प्रदान करता है. इससे एनालिटिकल स्किल्स में सुधार होता है. यह एक असंरचित समस्या को भी उचित सन्दर्भ में  देखते हुए उस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए एक सही सन्दर्भ प्रदान करता है. इससे समस्या को समझने तथा उसका विश्लेषण करने में मदद मिलती है. केस मेथड से समस्या की जड़ को समझने के बाद उसका व्यावहारिक हल निकालने में भी मदद मिलती है. अगर दूसरे शब्दों में कहें तो केस मेथड किसी भी समस्या की जड़ तक पहुँच कर उसका सही समाधान निकालने की प्रक्रिया पर जोर देता है.यह अंतिम निर्णय तक पहुंचने के लिए विभिन्न डोमेन से प्राप्त ज्ञान के आधार पर विभिन्न दृष्टिकोणों के जरिये किसी समस्या का विश्लेषण करने की अनुमति देता है.

एक्सपर्ट के बारे में

 

प्रोफेसर अभिषेक गोयल आईआईएम कलकत्ता में ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर ग्रुप के फैकल्टी हैं. वर्तमान में  वह आईआईएम  कलकत्ता में प्लेसमेंट सेल के चेयर पर्सन भी हैं. उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद से (पीएचडी के समकक्ष) और इंटरनेशनल बिजनेस में एमबीए, एफएमएसआर, एएमयू से फेलोशिप प्राप्त की है. आईआईएम कलकत्ता में वे माइक्रो ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर,मैक्रो ऑर्गनाइजेशनल बिहैवियर, ऑर्गनाइजेशन स्ट्रक्चर एंड डिजाइन,चेंज मैनेजमेंट, ऑर्गनाइजेशन डेवेलपमेंट और क्रॉस कल्चरल मैनेजमेंट आदि विषय पढ़ाते हैं. वे लीडरशिप डेवलपमेंट, लीडरशिप और ऑर्गनाइजेशन कल्चर और सेंसमेकिंग / सिस्टम व्यू आदि विषयों पर कंसल्टिंग का कार्य भी करते हैं.

 

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