मानसिक स्वास्थ्य और कुशलता: अपने बच्चों और अपने मानसिक स्वास्थ्य को किस तरह सहयोग दें।

हमारा मानसिक स्वास्थ्य हमारे समग्र स्वास्थ्य और कुशलता यानी सलामती का महत्वपूर्ण अंग है। एक अभिभावक होने के नाते, आप अपने बच्चे की मानसिक सलामती को सहयोग देने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हो। पालन-पोषण और प्यारभरी देखभाल एक मजबूत नींव की आधारशिला रखती है।

Mental Health Among Children: What Every Child Needs For Good Mental Health? | Expert Speak
Mental Health Among Children: What Every Child Needs For Good Mental Health? | Expert Speak

हमारा मानसिक स्वास्थ्य हमारे समग्र स्वास्थ्य और कुशलता यानी सलामती का महत्वपूर्ण अंग है। एक अभिभावक होने के नाते, आप अपने बच्चे की मानसिक सलामती को सहयोग देने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हो। पालन-पोषण और प्यार भरी देखभाल एक मजबूत नींव की आधारशिला रखती है। यह आप के बच्चे में सामाजिक व भावात्मक कौशल विकसित करने में मदद करती है जिनकी उन्हें एक खुश, स्वस्थ और संतुष्ट जिंदगी बिताने के लिए जरूरत होती है।

इस परवरिश माह में, यूनिसेफ युवा लोगों और बच्चे के लिए परवरिश परध्यान केंद्रित करता है और संबंध व सुरक्षा के महत्व को, और सहायक रिश्ते को मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक अहम रक्षात्मक कारक के रूप में रेखांकित करता है।

किशोर किस तरह परिवार , समुदाय के साथ बातचीत करते हैं, इस पर अभिभावकों का प्रभाव होता है और सामाजिक कारक जो उनके विकास को प्रभावित करते हैं। सकारात्मक परवरिश किशोर विकास पर पड़ने वाले बहारी नकारात्मक कारकों को कम कर सकती है। उदाहरण के लिए, दोस्ती पर निगाह रखते हुए, अभिभावक अपने किशोर बच्चे को हम उम्र के साथ रक्षात्मक और दृढ़ रिश्ता बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।

सोलेडेड हेरेरो, चीफ ऑफ चाइल्ड प्रोटेक्शन, यूनिसेफ ने बच्चों के उज्जवल भविष्य एवं मातापिता के अहम् योगदान के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण विचार रखे हैं. उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा- ‘’जब हम बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और परिवरिश पर ध्यान नहीं देते हैं, तो हम सार्थक संबंध बनाने, सीखने और बढ़ने की उनकी क्षमता को सीमित कर देते हैं। अगली पीढ़ी के सृजन और उन्हें सशक्त बनाने में माता-पिता की दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस चुनौती पूर्ण वतावरण में हमें माता-पिता एवं उनका देखभाल करने वालों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के क्षेत्र में भी कार्य करना होगा. इस वर्ष, पेरेंटिंग मंथ में किशोरों के पालन-पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि महत्वपूर्ण किशोरावस्था के दौरान सुरक्षित, सहायक संबंधों के महत्व को रेखांकित करते हुए पूर्ण क्षमता के साथ विकास किया जा सके.’’

यूनिसेफ की स्टेट ऑफ द वर्ल्ड कम्पैन्यन रिपोर्ट में, युवा लोगों ने बताया कि जबकि परिवार सपोर्ट का एक अद्भुत स्त्रोत हो सकता है, लेकिन समग्र सपोर्ट की कमी, दुर्व्यवहार और नजर अंदाज, दबाव और नियंत्रण,  और आर्थिक अस्थिरता के चलते कुशलता के लिए महत्वपूर्ण खतरे भी खड़े हो सकते हैं।

बॉडी इमेज के मुददों को संबोधित करना

तरुण अवस्था के बारे में बात करना

अपने बच्चे को विस्तार से बताओ कि मानव शरीर कैसे काम करता है और तरुण अवस्था एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसका अनुभव हर कोई करता है। उनके शरीर में बदलाव भी आएंगे।

सकारात्मक प्ररेणा

दूसरे लोगों की किसी नकारात्मक शारीरिक लक्षण की ओर इशारा करके या किसी को अपमानजनक उपनाम से पुकार कर उदाहरण नहीं स्थापित करें। बच्चे इसी से सीखते हैं और हो सकता है, ऐसा ही करें  या अपने शरीर के साथ असहज महसूस करें। इसकी बजाए, आप अपने बच्चे और दूसरों में जो अच्छे गुण देखते हो, उसकी प्रंशसा करो।

एक अच्छा उदाहरण स्थापित करो

आप अपने शरीर व दूसरों के शरीर को किस तरह स्वीकारते हो, इसकी छाप आप के बच्चे पर पड़ सकती है। उन्हें बताए कि सक्रिय और स्वस्थ खुराक का उद्वेश्य महज अच्छा दिखना ही नहीं है, इसके और भी कई फायदे होते हैं।

सोशल मीडिया के इक्स्पोशर को सीमित करना यानी बच्चे की सोशल मीडिया तक पहुंच को सीमित करना

इसमें कोई शक नहीं कि बच्चे सोशल मीडिया पर जो देखते हैं,उससे प्रभावित हो रहे हैं। नया-नवैला बनने के बीच, बच्चे इक्स्पोश हो रहे हैं और संवेदनशील भी, और शारीरिक खामियों वाली आलोचना का भी अनुभव कर सकते हैं।

अपने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने हेतु अभिभावकों के लिए टिप्स

जिस पल वे पैदा होते हैं, शिशु तभी से देखभाल करने वालों की ओर इस उम्मीद से देखने लगते हैं कि वे उनकी सीखने, विकसित होने व फलने-फूलने में मदद करेंगे। चाहे अभिभावक हो, दादा-दादी-नाना-नानी हो या देखभाल करने वाला अन्य कोई व्यस्क, देखभाल करने वाले बच्चे की शारीरिक, भावात्मक और ज्ञान संबंधी विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन पेरेंटिंग यानी परवरिश कोई आसान नौकरी नहीं है, और जैसा कि कोई भी देखभाल करने वाला जानता है, यह अनुदेश पुस्तिका से भी नहीं आती है।

एक बेहतर संबंध स्थापित करना

अपने बच्चे के साथ प्रभावशाली सवांद करने के लिए तीन महत्वपूर्ण कदमों का याद रखना।

सुनना, प्रोत्साहित, और सुनिश्चित करना कि अपने विचारों और भावनाओं को साझा करना ठीक है व सुरक्षित भी। जब आपका बच्चा कुछ साझा कर रहा हो तो उस समय उसे सुनते और प्रोत्साहित करते वक्त, अपना सिर बराबर हिलाते रहो या शब्दों में छोटे सकारात्मक जबाव देते रहो। फैसला सुनाने वाले मत बनो। उन पर भरोसा करो और धीरज रखो।

अपने बच्चे की ओर ध्यान दो, ऐसे में संगीत सुनने की ओर, टीवी देखने की ओर, समाचार पत्र पढ़ने आदि या फोन पर बात करने, घर के किसी काम को करने या आफिस के काम में अपना ध्यान मत लगाओ। उनके साथ आंखों से संपर्क बनाए रखें और उन्हें सुनते वक्त या उनके साथ बात करते वक्त दूसरी ओर अपना ध्यान नहीं लगाएं।

ईमानदार रहें और उन्हें (अपने शब्दों और शारीरिक हाव-भाव) से अहसास कराएं कि आप उनकी सपोर्ट के लिए हैं। और उनकी रुचियों के बारे में बात करें-उस संगीत या टीवी शो के बारे में बात करें, जो उन्हें अच्छा लगता है, किसी प्रसिद्व हस्ती के बारे में बात करें, या कोई कहानी साझा करे। उनकी संगत का आनंद ले और इस खूबसूरत रिश्ते को आगे बढ़ने दे। आप यह सब तब कर सकते हैं, जब आप अपने बच्चे के साथ सैर कर रहे हों या फिल्म देख रहे हों या उन्हें कोई कहानी सुना रहे हों।  एक साझा रुचि विकसित करें जैसे कि भोजन बनाना या योगा या आर्ट।

आपके बच्चे ने कुछ अच्छा किया है, उसकी प्रंशसा करें।

और किसी भी मुददे पर चर्चा नहीं करें, जब आप गुस्से में हों या आप के बच्चे का मुड अच्छा नहीं हो। जब कोई टकराव हो तो , तो कुछ वक्त लें कि कैसे आप व आपका बच्चा मिलकर इसे सुलझा सकते हैं।

चाहे आप और आपका बच्चा और किशोर मिलजुल कर रहे हों या चुनौतियों का सामना कर रहे हो, यह दिखाना महत्वपूर्ण है कि आप उन्हें प्यार करते हो और उन्हें सहयोग भी देते हो, और आप उनका मुश्किल वक्त में मार्गनिर्देशन भी कर सकते हैं और आप हमेशा उनके साथ हैं।

जब आप अपने किशोर से उसके हाल-चाल के बारे में पूछें और यह जताए कि आप उसके साथ हैं, तो ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करना

यह निश्चित कर लें कि आपका बच्चा यह जानता है कि वे अकेले नहीं हैं। उन्हें आश्वस्त करें कि जब भी उन्हें किसी भी प्रकार की मदद की जरूरत होगी या वे अपनी भावनाओं या विचारों को साझा करना चाहेंगे, वे वहां होंगे। उन्हें बताए कि यहां तक कि व्यस्कों की भी समस्याएं होती हैं और वे खुद उनका हल नहीं निकाल सकते। उन्हें यह समझाए कि जब आपके साथ कोई होता है तो मदद के लिए कहना आसान होता है।

अपने बच्चे के साथ जुड़े रहने के तरीके देखें। उनसे उनके दिन के बारे में बात करें और पूछें कि वे क्या कर रहे हैं। उन्हें उचित समय और उनका स्पेस देने की प्रयास करें। उन्हें बताए कि बच्चे के लिए चिंतित होना, दबाव महसूस करना या उदास होना सामान्य है।

अपने बच्चे को बताएं कि वे क्या सोचते हैं और वे कैसा अनुभव करते हैं, इस बारे में उनके लिए बात करना खौफनाक हो सकता है लेकिन साझा करना ठीक है और मदद के लिए कहना सही है। अगर वे आपसे बात करना नहीं चाहते, तो उन्हें अन्य लोगों से जैसे कि आंटी या अंकल, नजदीकी पारिवारिक दोस्त, भरोसेमंद अध्यापक या किसी फेथ लीडर, किसी बड़े या आपके डाक्टर से बात करने की सलाह दें।

अपने बच्चे को स्कूल के काम, घर के काम, या अन्य गतिविधियों से ब्रेक लेने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि वे वो काम कर सकें जिसे करने में उन्हें मजा आता हो। अपनी पंसद के अनुरूप कुछ स्वस्थ वैकल्पिक गतिविधियों के बारे में भी सुझाव दें जिसमें वे खुद को जोड़ सकें।

अपने बच्चे के साथ बराबरी का व्यवहार करें

खुल कर बात करें और आपके बच्चे का लिंग कुछ भी हो, उसे स्वीकार करें और उन्हें उनकी भावनाओं को अभिव्यक्त करने व अपनी पहचान की अभिव्यक्ति को लेकर प्रोत्साहित करें। बच्चे का पालन-पोषण, प्यार और देखभाल समानता के भाव से करें, उनका लिंग और लैंगिक रुझान चाहे कुछ भी हो।

लैंगिक पूर्वाग्रहों को चुनौती देते हुए एक सकारात्मक प्ररेणा स्त्रोत बनो। मिसाल के तौर पर पिता भोजन बनाने व सफाई के काम में व माएं आऊटडोर खेलों में हिस्सा ले सकती हैं।

अपने किशोर लड़के से कहो कि भवानात्मक होना ठीक है। उन्हें प्यार, गुस्सा, खुशी, उदासी या जिस भी स्थिति से वे गुजर रहे हैं, को अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित करें। परिवारों के बीच में ही हो रहे लैंगिक भेदभाव को जिसका पालन-पोषण, मानसिक स्वास्थ्य व लड़कियों की गतिशीलता पर असर पड़ता है, उसे संबोधित करने के लिए अग्रसक्रिय कदम उठाना।

एलजीबीटीक्यूआई समुदाय के किशोर घर, स्कूल या समुदाय में भेदभाव का सामना कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें शिक्षा, पोषण व खेलने में बराबर के मौके मिले।

घर में बेहतर वातावरण को सिंचित करना

बच्चे उन नियमों, सीमाओं और परिणामों में सुरक्षित महसूस करते हैं जो परस्पर सहमति से बनाए गए हों। आप के बच्चे की उन पारिवारिक नियमों को अनुसरण करने की संभावना अधिक है जिन्हें बनाने में उसने मदद की हो। वे आप के बच्चे को परिवार के मानकों (उसकी ताकत व सकारात्मक प्रभाव) को समझने और उन्हें तोड़ने की सूरत में होने वाले परिणामों के बारे में भी जानते हैं। अपने बच्चे के साथ नियमों के अनुपालन को लेकर बातचीत करने से बच्चे की चिंता, गुस्सा, अविश्वास कम हो सकता है और टकराव को संभाला जा सकता है।

सकारात्मक पारिवारिक रस्मो-रिवाज, प्रथाएं और आदतें बच्चे को संबंधों को बनाने व मजबूती देने का अवसर प्रदान करती हैं। अपने बच्चे से पारिवारिक प्रथाओं के बारे में जैसे कि उनकी शिक्षा, विवाह और करिअर आदि के मामलों में वास्तविक अपेक्षाएं रखें। परिवार के बीच यौन, नशा, शराब आदि कुछ विषयों पर बात करना मुश्किल हो सकता है लेकिन खुदको किशोरों के साथ इन पर बातचीत करने के लिए तैयार करें। विश्वासघात वाले मामले को शांति से संभाले।

बच्चे को घरेलू जिम्मेदारियों में शमिल करें, उन्हें उनकी आयु, योग्यता के अनुसार काम बांटे। घरेलू जिम्मेदारियों पर चर्चा करें और उन्हें इसमें रुचि लेने के लिए प्रोत्साहित करें और वे जिम्मेदारियों को उठाने के लिए अपनी इच्छा दिखाएं। आयु आधारित घरेलू काम किशोरों में योगदान की भावना पैदा करते हैं। इसमें काम, खरीदारी, परिवार के सदस्यों की मदद करना आदि शमिल है।

अपने बच्चे की मानसिक कुशलता को सुनिश्चित करने के लिए 16 तरीके

हमारा मानसिक स्वास्थ्य हमारे समग्र स्वास्थ्य और कुशलता का महत्वपूर्ण अंग है। एक अभिभावक होने के नाते, आप अपने बच्चे की मानसिक कुशलता को सहयोग देने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। पालन-पोषण और प्यारभरी देखभाल एक मजबूत नींव की आधारशिला रखती है। यह आप के बच्चे में सामाजिक व भावात्मक कौशल विकसित करने में मदद करती है जिनकी उन्हें एक खुश, स्वस्थ और पूर्ण जिंदगी बिताने के लिए जरूरत होती है।

आप अपने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य को कैसे सपोर्ट दें, इस बारे में विशेषज्ञों के कुछ टिप्स का यहां जिक्र किया जा रहा है, जो आपकी मदद कर सकते हैं। अभिभावकों के लिए UNICEF के कुछ महत्वपूर्ण सुझाव.

  1. यह सुनिश्चित कर लें कि आपका बच्चा यह जानता है कि वे अकेले नहीं हैं। उन्हें आश्वस्त करें कि जब भी उन्हें किसी प्रकार की मदद कीजरूरत होगी या वे अपनी भावनाओं या विचारों को साझा करना चाहेगें, वे वहां होंगे।
  2. उन्हें बताए कि यहां तक कि बड़ों की भी समस्याएं होती हैं, और वे उन्हें स्वतंत्र रूप से नहीं हल कर सकते। उन्हें यह समझाए कि जब आपके साथ कोई होता है तो सहायता के लिए कहना आसान होता है।
  3. भावात्मक रूप से खुलें और आपके बच्चे का लिंग कुछ भी हो, उसे स्वीकार करें।
  4. अपने किशोरों को उनकी भावनाएं व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करें।
  5. अपने किशोरों के साथ जुड़े रहने के तरीके देखें। उनसे पूछे कि उनका दिन कैसा रहा और वे क्या कर रहे हैं।
  6. उन्हें उचित समय व उनका स्पेस देने का प्रयास करें।
  7. अपने बच्चे को बताएं कि किशोर के लिए चिंतित होना, दबाव महसूस करना या उदास होना सामान्य है।
  8. अपने बच्चे को बताएं कि वे क्या सोचते हैं ओर वे कैसा अनुभव करते हैं, इस बारे में उनके लिए बात करना भयावह हो सकता है लेकिन साझा करना ठीक है और सहायता के लिए कहना सही है।
  9. अगर आपका बच्चा आप से बात नहीं करना चाहता, तो उन्हें अन्य लोगों से जैसे कि आंटी या अंकल, नजदीकी पारिवारिक दोस्त, भरोसेमंद स्पोटर्स कोच या धार्मिक नेता, किसी बड़े या अपने डाक्टर से बात करने की सलाह दें।
  10. यदि आपका किशोर कुंठित अनुभव करता है तो उनकी समस्याओं केसमाधान के लिए उनके साथ मंथन करें।
  11. अपने बच्चे को बताए कि अपने डाक्टर या अन्य स्वास्थ्य पेशेवर से बातकरना सुरक्षित है।
  12. उन्हें बताए कि विराम लेना, थोड़ी देर के लिए रूकना या आराम के लिए वक्त निकालना ठीक है।
  13. अपने किशोर को स्कूल के काम, घर के काम या अन्य गतिविधियों से ब्रेक लेने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि वे वो काम कर सकें जिसे करने में उन्हें आंनद मिलता हो। अपनी पंसद के अनुरूप कुछ स्वस्थ वैकल्पिक गतिविधियों के बारे में उन्हें सुझाव दें जिसमें वे खुद को शमिल कर सकें।
  14. आप अपने बच्चे का सकारात्मक और सुरक्षित माहौल में पालन-पोषण कर सकें, उन्हें बढ़ने व विकसित होने दें, इसके लिए जरूरी है कि पहले आप अपनी अǔछी तरीके से देखभाल करें। यह ऐसा बेहतर माहौल बनाने में मदद करता है।
  15. आपने जो भी अच्छा किया है, उसकी सराहना करें।
  16. अगर आप व्यथित हैं, तो मदद तलाशे। अपने डाक्टर या अन्य स्वास्थ्यपेशेवरों से बात करना सुरक्षित है।

चिड़चिड़ेपन के दौरों को संभालना

प्रत्येक अभिभावक बच्चे के उदास होने पर और चिड़चिड़ेपन के दौरों के वक्त चिंतित हो जाता है, विशेष तौर पर कोविड-19 महामारी के दौरान जब हम से अधिकांश घर पर हैं। इन दौरों को समझना या समाधान निकालने के लिए कौशल की जरूरत नहीं है, जैसा कि हमारे विशेषज्ञ चिड़चिड़ेपन के दौरों और उनसे कैसे निपटे संबधित सवालों के बारे में अपने टिप्स साझा करते हैं।

क्या चिड़चिड़ेपन का दौरा सामान्य है?

चिड़चिड़ेपन का दौरा एक अप्रिय और हानिकारक भावात्मक आवेग है। ऐसी स्थिति तब पैदा होती है, जब बच्चे को वो काम करने से रोका जाता है,  जो वो करना चाहता है या उन्हें वो चीज हासिल नहीं होती जिसकी वो इच्छा रखते हैं, ऐसे में वो अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाते हैं। चिड़चिड़ेपन के दौरे 1.5 से 5 साल की आयु के बच्चे के व्यवहार का एक सामान्य हिस्सा है। वे दिन में एक बार होते हैं और प्रायः 5-10 मिनट तक रहते हैं।

चिड़चिड़ेपन का दौरा कब सामान्य नहीं होता?

अगर ये घटनाएं बार-बार होती हैं और बच्चे की नियमित दिनचर्या को बाधित करने वाली हैं और बच्चे को नुकसान पहुंचाने वाली हैं, तो ऐसे में पेशेवर से परामर्श करना और ऐसे व्यवहार का निवारण जरूरी है।

चिड़चिड़ेपन के दौरो वाली घटनाओं के उचित जबाव के लिए , चिड़चिड़ेपन के दौरों के चरणों को आप को समझने की जरूरत है। इस दौर को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है, और इन चरणों की समझ आपको प्रभावशाली जवाब देने में मदद करेगी।

  1. चिल्लाना, जोर से चिल्लाना, रोना और शिकायत करना
  2. जमीन पर गिरना, लगातार चिल्लाना, जमीन पर लेटना,लोटना
  3. लगातार कराहना

एक विशिष्ट चिड़चिड़ेपन वाले दौरे वाली घटना से मैं कैसे निपट सकता हूं?

चरण 1: चिल्लाना, रोना और शिकायत करना

उपायः बच्चे को किसी अलग जगह ले जाओ।

ध्यान खींचना  छोटे बच्चे की ध्यान संबधित अवधि छोटी होती है। इसका इस्तेमाल करो और बच्चे का ध्यान दूसरी ओर लगाने की कोशिश करो और उसके सामने कुछ अलग देने का पेशकश करें। उसे किसी अन्य गतिविधि से जोड़ दें और बच्चे को उस चिड़चिड़ेपन के दौरे वाले माहौल से दूर ले जाएं।

बातचीत करेः बच्चा जो कह रहा है/या चाहता है, उसके विकल्प उसे मुहैया कराएं।

चरण 2: जमीन पर गिरना, लगातार चिल्लाना, जमीन पर लोटनायह सुनिश्चित करें कि वहां जगह पर्याप्त है/कोई चीज तो नहीं रखी है ताकि बच्चे को किसी भी तरह की कोई शारीरिक चोट न लगे।

बच्चे की अपनी ओर ध्यान खींचने वाले व्यवहार को नजरअंदाज करें व उपेक्षा करें।

चरण 3: लगातार कराहना

बच्चे को शारीरिक तौर पर आराम महसूस कराएं व उसे शांत करे।

बच्चे को वैकल्पिक गतिविधियां/वस्तुंए देने की पेशकश करें। दौरा कम होने पर बच्चे को सहज महसूस कराएं।

ऐसी अन्य क्या चीजें हैं, जो हम भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम केलिए कर सकते हैं ?

हमें बच्चे के चिड़चिड़ेपन के दौरे वाले व्यवहार के प्रबधंन के लिए कुछ खास सिद्धांतो को अपना सकते हैं। इसमें बच्चे का अपनी ओर ध्यान खींचने वाले व्यवहार को नजरअंदाज व उपेक्षा करना, और दौरा कम होने पर उसे आराम महसूस कराना व शांत करना शमिल है। प्रारंभ में ही उसका ध्यान दूसरी ओर खींचना व उसके साथ बातचीत करना जैसे हस्तेक्षप भी समाधान हैं।

एक अभिभावक होने के नाते आपको यह करने की जरूरत हैः

सकारात्मक एंटेशन दें: अपने बच्चे के सकारात्मक व्यवहार को नोट करेंऔर उसकी प्रशंसा करे व इनाम दें।

विकल्प मुहैया कराएं:  बच्चे को चुनने और छोटी चीजों पर नियंत्रण वाले अवसर दे। उदाहरण के लिए, उनसे पूछें आप सेब या केले में से क्या चाहते हैं?

ध्यान खींचना और बातचीतः छोटे बच्चे की एंटेशन अवधि छोटी होती है। कृपया इसका इस्तेमाल करें ओर बच्चे का ध्यान दूसरी ओर ले जाने का प्रयास करें और उसे कुछ अन्य देने की पेशकश करें। उसे अन्य गतिविधि में शमिल करें, बच्चे को उस माहौल से दूर ले जाएं।

आपका बच्चा जो मांग रहा है, उसे देने से इंकार करने से पहले सोचे कि क्या ऐसा करना व्यावहारिक है।

अपने बच्चे को जानिएः यदि आपका बच्चा थका हुआ है, उनींदा है या चिड़चिड़ा है, ऐसे हालात में बच्चे को बहार ले जाने से बचो, खासतौर पर खरीदारी के लिए। जब बच्चे उनींदा, भूखे और/ थके हुए हों तो बच्चे को जबरन ऐसा कोई भी काम करने के लिए नहीं बोले जो उसे पसंद नहीं हो।

अनुबंध/सहमति बनाएं: आप अपने बच्चे के व्यवहार को लेकर उनसे जो अपेक्षाएं रखते हैं, उसके बारे में उन्हें अǔछी तरह से अवगत करा दें। उनकी मांगों को लेकर उनके साथ अनुबंध कर लें या सहमति बना लें(क्या लेने की इजाजत है और क्या नहीं लेने की)और यह उन्हें बार-बारयाद दिलाते रहें।

इन चुनौतियों भरे वक्त में,  घर में बच्चे को खुश और तनावमुक्त महसूसकराने के लिए घर में सकारात्मकता का माहौल बनाना सुनिश्चित कर लें।

अपना ध्यान रखें क्योंकि अगर आप खुश हैं तो आपका परिवार भी खुशरहेगा।

यूनिसेफ के बारे में

UNICEF Destacadaसंयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की स्थापना का आरंभिक मुख्य उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध में नष्ट हुए राष्ट्रों के बच्चों को खाना और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना था। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने 11 दिसंबर 1946 को की थी।यूनीसेफ को साल 1965 में उसके बेहतर कार्य के लिए शान्ति के क्षेत्र मेंनोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बता दें इसके 120 से अधिक शहरों में कार्यालय हैं तथा 190 से अधिक स्थानों पर इसके कर्मचारी कार्यरत हैं। यूनीसेफ का सप्लाई प्रभाग कार्यालय कोपनहेगन, डेनमार्क में है।

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