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भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अगला बड़ा नाम हो सकते हैं विरल आचार्य

आरबीआई के चार डिप्टी-गवर्नर हैं। डिप्टी गवर्नर्स आरबीआई के आधिकारिक निर्देशक होते हैं। इन चार पदों को केंद्रीय बैंक के पदों में प्रोन्नति द्वारा भरा जाता है। अन्य दो में से एक पद की जिम्मेदारी एक वाणिज्यिक बैंकर द्वारा पूरी की जाती है, जबकि दूसरा पद एक अर्थशास्त्री को दिया जाता है।

Apr 6, 2017 12:13 IST
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हाल में ही भारतीय बैंकिंग उद्योग में विरल आचार्य का नाम एक नया और बड़ा नाम बन के उभरा है। 42 साल के युवा विरल को भारतीय रिजर्व बैंक के उप-गवर्नर के रूप में नियुक्त किया गया है। वह वर्तमान में मौद्रिक नीति, कॉर्पोरेट वित्त, बजट और वित्तीय बाजार परिचालन, आर्थिक नीति तथा अनुसंधान आदि की देखरेख कर रहे हैं। कई लोग इस युवा केंद्रीय बैंकर में आरबीआई के पूर्व तेज- तर्रार गर्वनर रहे रघुराम जी राजन की छवि देखते हैं। आपको बता दें कि रघुराम राजन ने सितंबर 2016 में रिजर्व बैंक के गवर्नर पद से त्यागपत्र दे दिया था।  केंद्रीय बैंकर होने के साथ-साथ विरल आचार्य एक क्रिकेटर, कवि और गायक के सेगमेंट में भी काफी फिट बैठते हैं। 20 जनवरी 2017 को उन्होंने अपना पदभार संभाला था जो आने वाले अगले तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इससे पहले, विरल आचार्य न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत थे।

विरल आचार्य व रघुराम राजन : समानताएं

डॉ. राजन और विरल आचार्य में बहुत सारी ऐसी समानताएं हैं जो उन्हें केंद्रीय बैंक के पूर्व गवर्नर का योग्य उत्तराधिकारी बना सकती हैं। दोनों ने आईआईटी से अध्ययन किया है और बाद में न्यूयॉर्क वापस चले गए l

  • आईआईटी दोनों के बीच एक आम कड़ी है: मौजूदा डिप्टी गवर्नर और पूर्व गवर्नर दोनों ने ही अपने करियर के शुरुआती दिनों में आईआईटी से अध्ययन किया था। जहां एक ओर राजन दिल्ली आईआईटी से पास आउट थे तो वहीं दूसरी तरफ विरल आईआईटी मुंबई के पूर्व छात्र रहे हैं। इन दोनों की इंजीनियरिंग की डिग्री में भी समानता है।
  • दोनों न्यूयार्क से संबंध रखते हैं: डॉ. राजन शिकागो विश्वविद्यालय में बूथ स्कूल ऑफ बिज़नेस में पढ़ाते थे, जबकि विरल आचार्य न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्न स्कूल ऑफ बिज़नेस विश्वविद्यालय से जुड़े हुए हैं। इससे पहले, आचार्य लंदन स्कूल ऑफ बिजनेस के साथ भी जुड़े रहे हैं।
  • दोनों ही इस विचार का समर्थन करते हैं कि संपत्ति की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है: डा. राजन कुछ हद तक बैंकों में परिसंपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा के लिए मशहूर रहे, जिसके परिणामस्वरूप कई बैंकों ने वित्त वर्ष 2015-16 में घाटे में चलने की घोषणा की। आचार्य भी उसी के समर्थक हैं लेकिन उनके अनुसार, यह शेड्यूल से दो वर्ष पीछे था।
  • आचार्य की रूचि बैंकों के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी है: राजन को एक रॉक स्टार गवर्नर के रूप में जाना जाता है, लेकिन आचार्य के बारे में भी यही कहा जा सकता है। वह गिटार भी बजाते हैं।  वह एक शानदार व्यक्तित्व वाले इंसान है जो गरीब और वंचित बच्चों की मदद भी करते हैं। श्री विरल आचार्य प्रथम फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं और उन्होंने इसके अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है।
  • दोनों ही बैंकों के पूंजीकरण की आवश्यकता का समर्थन करते हैं: रघुराम राजन और विरल आचार्य का मानना ​​है कि भारत में बैंकों को ठीक तरह से काम करने के लिए उनका अच्छी तरह से पूंजीकृत होना जरूरी है। वह बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी दखलंदाजी देने के समर्थक नहीं है।
  • विरल आचार्य ने राजन के साथ सह-लेखन कर पेपर प्रकाशित किए हैं: राजन और विरल आचार्य दोनों ने ही एक दूसरे के साथ विभिन्न विषयों पर काम किया है और दोनों ने एक साथ कई पेपर प्रकाशित किए हैं। दोनों के पास स्वयं के क्रेडिट के दो सेमीनार पेपर हैं।
  • दोनों ने युवा उम्र में बहुत कुछ हासिल किया है: जहां रघुराम राजन भारत के केंद्रीय बैंक के सबसे छोटे उम्र के गवर्नर रहे हैं, वहीं विरल आचार्य ने भी देश के शीर्ष बैंक का सबसे युवा डिप्टी गवर्नर होने का गौरव हासिल किया है। हो सकता है कि केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह भारतीय रिजर्व बैंक के इतिहास में सबसे कम उम्र के गवर्नर भी बन जाएं।रघुराम राजन और विरल आचार्य दोनों ही देश के बैंकिंग क्षेत्र में अत्यधिक सरकारी दखल देने के खिलाफ रहे हैं। व्यापक रूप से यह माना जा रहा है कि अगर विरल आचार्य सरकार के साथ अच्छा तालमेल करने में सफल रहते हैं तो वह निकट भविष्य में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का पदभार ग्रहण कर सकते हैं। फिलहाल कुछ समय के लिए आरबीआई को वास्तव में अपना पहला संगीतकार (म्यूजिशियन) गवर्नर मिला है जो मुंबई स्थित केंद्रीय बैंक के गलियारों में भी कुछ गंभीर संगीत ला सकता है।


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