जिद और जुनून से मिली सफलता

May 19, 2011, 19:15 IST

सिविल सेवा परीक्षा के अंतिम परिणाम आ चुके हैं। नंबर एक और नंबर दो पर महिलाओं ने बाजी मारी है और तीसरे स्थान पर वरुण कुमार ने परचम लहराया है।

सिविल सेवा परीक्षा के अंतिम परिणाम आ चुके हैं। नंबर एक और नंबर दो पर महिलाओं ने बाजी मारी है और तीसरे स्थान पर वरुण कुमार ने परचम लहराया है। इस बार हम नंबर एक पोजीशन पाने वाली एस. दिव्यदर्शिनी के साथ ही नौवीं पोजीशन लाने वाले अजय प्रकाश और अखबार के एजेंट का लड़का आदित्य जैन से उनकी सफलता के बारे में बात की है। सुनते हैं आईएएस टॉपर की जुबानी से उनकी सफलता की कहानी...   

खुद को कर बुलंद इतना...

कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। यदि आप आईएएस की परीक्षा पास करना चाहते हैं, तो आपको जुनूनी और मेहनती होना ही होगा। जिस स्टूडेंट्स में इस तरह के गुण हैं, वे इस परीक्षा में सफल हो सकते हैं-यह कहना है इस बार की  आईएएस टॉपर एस.दिव्यदर्शिनी का। डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु से लॉ ग्रेजुएट दिव्यदर्शिनी कहती हैं कि आईएएस में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और लॉ विषय थे। दोनों विषयों की तैयारी प्लानिंग के तहत की और निरंतर अपनी कमियों को दूर करती रही। इसमें पारिविारिक सदस्य के साथ ही मेंटर प्रभाकरण सर की अहम भूमिका रही। उन्होंने हमें काफी सहयोग किया। मां हाउस वाइफ और पिता कस्टम कंसल्टेंट हैं। ग्रेजुएट करने के बाद से ही तैयारी के लिए जुट गई थी। इंटरव्यू रजनी राजदान बोर्ड में हुआ। इंटरव्यू काफी शानदार रहा। परीक्षा के बाद सेलेक्ट होने की आशा तो थी, लेकिन टॉप करूंगी, इसकी आशा कम थी। इस परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से यही कहना चाहती हूं कि आप खुद को सक्षम मानें तो सफलता आपके पास खुद चलकर आएगी। असफल होने पर घबराएं नहीं, बल्कि दोगुने प्रयास से मेहनत करें, क्योंकि हो सकता है कि आप अंतिम प्रयास में अपने मंजिल को प्राप्त कर लें।

                                                                                                                                                   एस. दिव्यदर्शिनी, आईएएस टॉपर

प्रॉपर प्लानिंग से मिली कामयाबी
प्रॉपर प्लानिंग से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। यदि आपने अपना लक्ष्य सिविल सर्विसेज बनाया है और उसकी तैयारी के लिए निरंतर पढ़ाई करते हैं, तो कोई कारण नहीं कि आप सफल न हो सकें-यह कहना है आईएएस की परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में 9वीं रैंक लाने वाले अजय प्रकाश का। इस परीक्षा की तैयारी और सीसैट के बारे में क्या हैं उनके विचार...

  • इसकी तैयारी के लिए आदर्श समय क्या है?
    सिविल परीक्षा की तैयारी के लिए आदर्श समय ग्रेजुएशन फाइनल ईयर होता है, उस समय स्टूडेंट्स को वैकल्पिक विषय का चयन कर लेना चाहिए। इस समय स्टूडेंट्स के पास सोचने के लिए काफी वक्त होता है। अपनी कमजोरी और स्ट्रेंथ के हिसाब से विषय का चयन करना चाहिए और हमेशा अपने मन की बात सुननी चाहिए। इससे कॉन्फिडेंस लेवल हमेशा बना रहता है।
  • आप अपने शैक्षिक बैकग्राउंड के बारे में बताएं?
    मैं बिहार के समस्तीपुर जिले का हूं। बारहवीं बोकारो से और ग्रेजुएशन डीयू से किया। वर्तमान में जेएनयू से एमफिल कर रहा हूं। इस परीक्षा की तैयारी से पहले एक ऑप्शन बना लेना चाहता था। इस कारण एमफिल में एडमिशन के बाद आईएएस की परीक्षा दी। इस परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के पास कम से कम एक कॅरियर विकल्प अवश्य होना चाहिए। यदि आपके पास एक विकल्प रहता है, तो तैयारी में बेहतर तरीके से होती है।
  • इस परीक्षा की तैयारी के लिए कितने घंटे की पढ़ाई जरूरी होती है?
    इसके लिए कोई नियम नहीं है। आप अपनी क्षमता के अनुरूप पढ़ाई कर सकते हैं। मेरे समझ से यदि चार से पांच घंटे की पढ़ाई आप नियमित करते हैं, तो आप इस परीक्षा में सफल हो सकते हैं। इस परीक्षा में सफल होने के लिए घंटे की पढ़ाई पर न जाकर सिलेबस के अनुरूप पढ़ाई करनी चाहिए। यदि चार से पांच घंटे की पढ़ाई आप नियमित करते हैं, तो इस परीक्षा में सफल हो सकते हैं।
  • परीक्षा में आपके वैकल्पिक विषय क्या थे और यह कौन सा प्रयास था। तैयारी की स्ट्रेटेजी क्या थी।
    यह मेरा पहला प्रयास था। इसमें वैकल्पिक विषय इंग्लिश लिटरेचर और सोशियोलॉजी था। प्रारंभिक परीक्षा सोशियोलॉजी से दिया। तैयारी के लिए सबसे पहले सिलेबस के अनुरूप बेहतर पुस्तक का चयन किया और उसकी तैयारी के लिए प्रॉपर प्लानिंग की। इसके लिए मैंने एक वर्ष की प्लानिंग की और उसी के अनुरूप सभी विषयों पर समय देते हुए प्रारंभिक, मुख्य और इंटरव्यू की तैयारी की। यदि आपका प्रारंभिक परीक्षा से पहले ही मुख्य परीक्षा की तैयारी हो जाती है, तो आगे की राह आसान होती है।
  • सीसैट आने के बाद अंग्रेजी प्रारंभिक परीक्षा से ही अनिवार्य हो गई है। हिंदी भाषी क्षेत्र के स्टूडेंट्स इसकी तैयारी किस तरीके से करे।
    अक्सर इस तरह की चर्चा होती है कि आईएएस की परीक्षा में हिंदी माध्यम के स्टूडेंट्स को अंग्रेजी में समस्या आती है। इस तरह की बातें सही नहीं है। इंटरव्यू में हिंदी माध्यम से अपनी बात रख सकते हैं। आईएएस परीक्षा में अंग्रेजी के सिलेबस इस तरह से हैं कि सिर्फ आपकी अंग्रेजी समझ की जांच हो सके। इतनी अपेक्षा तो हर सर्विसेज में की जाती है। यदि दसवीं तक की अंग्रेजी अच्छी है और आप लिखने व समझने में समर्थ हैं, तो इस परीक्षा में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी। एक आईएएस से आप भी कम से कम इतनी अंग्रेजी की अपेक्षा तो करेंगे ही, क्योंकि उन्हें देश के किसी भी कोने में भेजा जा सकता है।
  • इस परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स को आप क्या सलाह देंगे?
    यदि मन में विश्वास हो और कठिन परिश्रम करने का जुनून हो, तो कोई भी परीक्षा कठिन नहीं होती है। आप इस परीक्षा को तभी दें, जब आपकी पूरी तैयारी हो जाए और आप अपनी तैयारी से पूरी तरह संतुष्टï हो जाएं। यदि कुछ कमी दिखे, तो उसे दूर करने के बाद ही परीक्षा दें, तो बेहतर होगा। यदि आप इस तरह की तैयारी करके परीक्षा देते हैं और अपने पहले प्रयास में पूरी शक्ति लगा देते हैं, तो आपको सफलता अवश्य मिलती है। हालांकि इस परीक्षा में अभ्यर्थियों का चार चांस मिलते हैं, लेकिन आप अपने पहले चांस को ही लास्ट चांस मानकर अपना सर्वस्व देंगे, तो एक सीट आपके लिए ही होगा। अंग्रेजी से भागें नहीं, उसे पढऩे की कोशिश करें। बिना पढ़े कोई भी भाषा कठिन होती है, लेकिन पढऩे के बाद वही काफी आसान हो जाती है।

निरंतर पढ़ाई है सफलता का राज

सफलता राह चलते कोई वस्तु नहीं है, जिसे पाया जा सकता है। इसके लिए स्वप्न देखने होते हैं और प्रयास करने होते हैं। यह बात ललित जैन पर सटीक बैठती है, जिसने संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में अभावों से जूझते हुए अपने चौथे प्रयास में 41 वां स्थान प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि आईएएस में सफलता हार्ड वर्क और जुनूनी व्यक्ति को ही मिलती है। दैनिक जागरण एजेंट शशि पाल जैन के बेटे की आरंभिक पढ़ाई खरड़ से चंडीगढ़ सेंट जोंस हाई स्कूल सेक्टर-26 में हुई। उन्होंने अपने पिता के साथ अखबार बेचे व घरों में अखबार पहुंचाए। इस संबंध में ललित जैन से विस्तार से बातचीत की गई। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश...

  • आपको सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा कैसे मिली?
    जहां तक प्रेरणा की बात है, मुझे अपनी दादी स्व. विद्यावती जैन व नाना देशराज जैन जो पीडब्ल्यूडी में अभियंता थे। अफसरी की लत वहीं से लगी। यही कारण है कि मैं बचपन से ही इसके बारे में सोचता रहा और समय आने पर इसकी जमकर तैयारी की। इसके अतिरिक्त समाज सेवा की भावना भी प्रेरणा बढ़ाने का काम किया।
  • अपने परिवार के बारे में बताएं?
    मेरी माता रजनी जैन पंजाबी में एमए व पिता शशिपाल जैन तीन विषय में एमए पंजाब विश्वविद्यालय से की है। वे वरिष्ठ पत्रकार भी हैं और दैनिक जागरण के एजेंट है।
  • अपने बारे में विस्तार में बताएं?
    डीएवी से विज्ञान में 12वीं किया। इंजीनियरिंग में रुचि नहीं थी। इस कारण राजकीय कालेज सेक्टर-11 से बीए आनर्स राजनीतिशास्त्र में किया (75 प्रतिशत अंकों के साथ)। इसके बाद मैंने एलएलबी भी किया। मैं आरंभिक दिनों से ही समाज सेवा करना चाहता था। इसी रुचि के कारण कॉलेज में छात्र नेता भी बना। भाषण प्रतियोगिता में करीब करीब सौ से अधिक इनाम जीता। मुझे प्रतिष्ठित पुरस्कार केके ग्र्रोवर तीन बार मिला है। अब आईएएस जैसा प्लेटफॉर्म मिला है। इस माध्यम से मैं समाज की सेवा बेहतर ढंग से कर सकता हूं।
  • सफलता का श्रेय किसे देना पसंद करेंगे?
    अपनी सफलता का श्रेय ईश्वर के साथ-साथ माता पिता को ही देना चाहूंगा। इसके बाद मित्रगण को देना चाहता हूं। यदि आप मध्यवर्गीय परिवार से हैं, तो इस परीक्षा में धैर्य की परीक्षा हमेशा ली जाती है। जब-जब आत्मविश्वास डगमगाया, ईश्वर से दिशा दिखाई।
  • परीक्षा के लिए कितने घंटे की पढ़ाई की और यह आपका कौन सा प्रयास था। 
    इस परीक्षा की तैयारी के लिए रेगुलर स्टडी जरूरी है। मैं आठ से दस घंटे की पढ़ाई करता था और सभी विषयों की तैयारी के लिए समय निर्धारित कर लिया था। आईएएस में समाज शास्त्र व लोक प्रशासन विषय थे। प्रारंभिक परीक्षा में  समाज शास्त्र विषय थे। यह मेरा अंतिम प्रयास था। तैयारी के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें, इग्नू के नोट्स, प्रवीण बंसल के क्लास नोट्स, होरोलम्बस की पुस्तक, पेपर में जागरण आदि का अध्ययन किया। लोकप्रशासन के लिए इग्नू की अध्ययन सामग्री, प्रसाद व प्रसाद, महेश्वरी और अवस्थी आदि को खूब पढ़ा। सामान्य अध्ययन के लिए एनसीईआरटी की सभी विषयों की पुस्तकें (11वीं व 12वीं), अखबार, एक मैगजीन, भारत-2010, योजना, एनबीटी प्रकाशन की भारतीय संविधान व हमारी संसद (सुभाष कश्यप) का अध्ययन किया।
  • आने वाले अन्य प्रतियोगियों को कुछ संदेश?
    कम पढ़ें व बार-बार पढ़ें। कड़ी मेहनत करें, अपने अध्ययन के प्रति सजग रहें और खुद पर विश्वास रखें। अध्ययन के लिए ऐसी नीति बनाएं, जो आपके लिए अनुकूल हो। जो पढ़ाई करें, उसकी समीक्षा करें। अपनी कमियों को पहचानें और समय रहते उसे दूर अवश्य करें। आर्थिक परेशानियों से न घबराकर उन्हें दूर करने के लिए कठिन मेहनत करें। समस्याएं सभी के साथ होती हैं, लेकिन समस्याओं से जूझने और उससे निकलने की काबिलियत आप में है। यदि आप खुद को पहचान लेते हैं, तो कोई भी समस्या दीर्घजीवी नहीं होती है। 
    प्रस्तुति : पीयूष द्विवेदी
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