नर्सिंग

Jul 5, 2011, 12:55 IST

इंवेस्टमेंट कमीशन ऑफ इंडिया के अनुसार देश का हेल्थ केयर सेक्टर लगभग 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में इससे संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे। नर्सिंग भी इन्हीं में से एक है। इसमें किस तरह के हैं करियर...

नर्सिंग: बढ़ता बाजार संभावनाएं अपार
नर्सिंग: बढ़ता बाजार संभावनाएं अपार

नर्सिंग : बढ़ता बाजार संभावनाएं अपार

इंवेस्टमेंट कमीशन ऑफ इंडिया के अनुसार देश का हेल्थ केयर सेक्टर लगभग 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में इससे संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे। नर्सिंग भी इन्हीं में से एक है। इसमें किस तरह के हैं करियर...

जनसंख्या वृद्घि एवं शहरीकरण की गति तीव्र होने से चिकित्सा सेवाओं की मांग में इजाफा हो रहा है। इस मांग के कारण नए-नए अस्पताल और नर्सिंग होम खुल रहे हैं। इन परिस्थितियों में प्रशिक्षित नर्सों की मांग में इजाफा होना लाजमी है।

मानवता का कार्य
नर्सिंग एक सेवाभाव का कार्य है जिसमें रोगी का उपचार कर उसे शरीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रखा जाता है। एक अच्छी नर्स केवल मरीज का उपचार ही नहीं करती है, वह उसे स्वस्थ्य होने का भरोसा दिलाकर मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत भी करती है।

चुनौतीपूर्ण कार्य
नर्सिंग आसान काम नहीं है। इसमें हर कदम पर चुनौतियां हैं। नर्सों को मरीज के दुख-दर्द में हिस्सेदार बनना पड़ता है। मरीज की भलाई के लिए कभी-कभी अपनी भावनाओं की बलि देकर उसके साथ सख्त व्यवहार भी किया जाता है। हर व्यक्ति यह नहीं कर सकता है। लगभग एक हजार ईसा पूर्व चरक ने लिखा था कि उपचारिका (नर्स) को पवित्रता, चतुरता, ममता और सेवा भाव से परिपूर्ण होने के साथ पूरी तरह अनुशासित होना नितांत आवश्यक है।

देश-विदेश में कार्य के अवसर

आज अधिकतर देशों में प्रशिक्षित नर्सों की कमी है। अपने देश की भी यही स्थिति है। यहां आबादी के हिसाब से जितनी नर्सें होनी चाहिए, वास्तविक संख्या उससे कहीं कम हैै। एक अनुमान के अनुसार इस समय देश में लगभग चार लाख प्रशिक्षित नर्सें हैं। जबकि आवश्यकता इससे कहीं अधिक की है।  जिस तरह जनसंख्या बढ़ रही है उसे देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले दो वर्षों में भारत में कम से कम दस लाख प्रशिक्षित नर्सों की आवश्यकता होगी। इस तरह के अनुमानों और चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे विस्तार से स्पष्टï है कि आने वाले कई वर्षों तक नर्सिंग सेक्टर में पर्याप्त संख्या में रोजगार उपलब्ध होंगे।

भारतीय नर्सों की मांग

मरीजों के साथ मानवीय व्यवहार और काम के प्रति निष्ठा एवं निपुणता के कारण भारतीय नर्सें विश्व में सबसे अच्छी नर्सें मानी जाती हैं। दूसरे देशों में जाकर काम करने के मामले में सबसे अधिक संख्या भारतीय नर्सों की ही है। अमेरिका के साथ-साथ यूरोपीय देशों में भारतीय नर्सों की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है। ब्रिटेन में नर्सिंग का काम करने वाली विदेशी महिलाओं में सबसे अधिक संख्या भारतीयों की ही है। भारतीय राज्य केरल से सर्वाधिक लोग इस पेशे में आते हैं।

सम्मानित पेशा
मानवीय सेवा का कार्य होने के कारण नर्सिंग को सम्मान की दृष्टिï से देखा जाता है। अमेरिका और पश्चिमी देशों में तो नर्सों को अच्छे-खासे वेतन के साथ-साथ अन्य विशेष सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती हैं।

विदेश के लिए जरूरी..
देश से प्रति वर्ष करीब 15 से 20 हजार नर्सें नौकरी के लिए विदेश जाती हैं। इनमें से भी अधिकांश दक्षिण भारतीय राज्यों विशेषत: केरल प्रांत की होती हैं। इस फील्ड से संबंधित जो लोग विदेश में काम करना चाहते हैं उन्हें भलीभांति अंग्रेजी लिखना और बोलना आना चाहिए। अंग्रेजी की अच्छी जानकारी के बिना विदेश में काम करना मुश्किल है।

महिलाओं के लिए

नर्सिंग के काम में जिन मानवीय गुणों की आवश्यकता होती है, वे पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाए जाते हैं। यही कारण है कि इस फील्ड में काम के लिए महिलाओं को प्राथमिकता दी  जाती है। चिकित्सा क्षेत्र का विस्तार शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों दोनों में लगभग समान रूप से हो रहा है इसलिए दोनों ही जगहों की महिलाएं इस क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर भविष्य बना सकती हैं।

नर्सिंग शिक्षा को प्रोत्साहन

स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और प्रत्येक नागरिक की पहुंच में लानेे के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। हाल ही में नर्सों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा बड़ी संख्या में नर्सिंग ट्रेनिंग सेंटर खोलने की घोषण की गई है।

तेजी से बढ़ता सेक्टर

एनवेस्टमेंट कमीशन ऑफ इंडिया के अनुसार देश का हेल्थ केयर सेक्टर लगभग 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से आगे बढ़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार सन 2020 तक यह इंडस्ट्री 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर की हो जाएगी। तथ्य दर्शा रहे हैं कि आने वाले समय में मेडिकल से संबंधित सभी क्षेत्रों में पर्याप्त रोजगार होंगे, नर्सिंग भी उसी में हैं।

कोर्स एवं पाठ्यक्रम

नर्सिंग से संबंधित कई तरह के कोर्स विभिन्न संस्थानों द्वारा चलाए जा रहे हैं। इन कोर्सों में अल्प अवधि से लेकर पूर्णकालिक कोर्स तक शामिल किये गये हैं। कोर्सों के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षिक योग्यता अलग-अलग है।  नर्सिंग के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने की चाह रखने वाले अधिकतर लोग इस विषय से बीएससी एवं एमएससी ही करना चाहते हैं। इनके अलावा भी कई तरह के कोर्स हैं जो इस सेक्टर में काम करने वालों की वरीयता सूची में शामिल हैं।

प्रमुख कोर्स

  • नर्सिंग एंड मिडवाइफरी

जेनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कोर्स में प्रवेश के लिए उम्मीदवार को विज्ञान वर्ग से 12वीं पास होना अनिवार्य है। कोर्स की अवधि साढ़े तीन साल की है।

  • आक्जिलरी नर्सिंग

10वीं पास की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता रखने वाले इस कोर्स को कर सकते हैं। आक्जिलरी नर्सिंग के कोर्स की अवधि 18 महीने है। छोटे स्तर पर काम करने के लिए यह कोर्स उपयोगी है।

  • बीएससी (नर्सिंग)

नर्सिंग की फील्ड में जाने की चाहत रखने वाले लोगों का यह पसंदीदा कोर्स है। बीएससी (नर्सिंग) के कोर्स की अवधि तीन से चार वर्ष तक की होती है और जिसने 12वीं की परीक्षा विज्ञान वर्ग में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की है, वह इस कोर्स को कर सकता है।

  • एमएससी (नर्सिंग)

नर्सिंग में एमएससी करने के बाद विदेश में रोजगार पाने की संभावनाएं और भी बढ़ जाती हैं। डिग्री धारकों को नर्सिंग की ट्रेनिंग देने वाले संस्थानों में शिक्षक के रूप में होने वाली नियुक्ति में भी वरीयता दी जाती है। यह कोर्स नर्सिंग में बीएससी करने के बाद ही किया जा सकता है। एमएससी (नर्सिंग) के पाठ्यक्रम की अवधि दो वर्ष है।

संस्थान

  • एम्स, नई दिल्ली
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एजुकेशन, चंडीगढ़
  • धनवंतरि कॉलेज ऑफ  नर्सिंग, तमिलनाडु
  • केएमसीटी कॉलेज ऑफ नर्सिंग, केरल
  • अपोलो स्कूल ऑफ नर्सिंग, चेन्नई
  • बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी ऐंड रिसर्च, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
  • श्री गंगा राम हास्पिटल, राजेन्द्र नगर, बिहार
  • वीएमएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी, बटाला, पंजाब



प्रस्तुति : शरद अग्निहोत्री

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Education Desk

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