चीन ने 30 मार्च, 2021 को हांगकांग की चुनाव प्रणाली के सबसे विवादास्पद और व्यापक परिवर्तन/ कायापलट के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है. इस पारित प्रस्ताव से शहर की विधायिका में निर्वाचित सीटों की संख्या सीधे तौर पर आधी से लगभग पांचवां हिस्सा हो जाएगी और विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (SAR) में बीजिंग का कड़ा नियंत्रण हो जाएगा.
इससे पहले, बीजिंग में नेशनल पीपल्स कांग्रेस के वार्षिक सत्र में मार्च, 2021 में बड़े बदलावों की घोषणा की गई थी जिन्हें 30 मार्च को NPC की स्थायी समिति के 167 सदस्यों द्वारा पारित किया गया था.
हांगकांग की चुनाव प्रणाली में क्या बदलाव आएगा?
चीनी सरकार द्वारा इस नए प्रस्ताव के पारित होने के साथ:
• हांगकांग विधान परिषद के भौगोलिक निर्वाचन क्षेत्रों को 35 से 20 सीटों तक कम कर दिया जाएगा, जो प्रत्यक्ष मतदान के महत्त्व को नाटकीय रूप से कम कर देगा. पहले इसके 70 सदस्यों में से 35 सदस्य सीधे चुने गए थे.
• राष्ट्रीय सुरक्षा पुलिस इकाई उम्मीदवारों की जांच करने में मदद करेगी और नवगठित वेटिंग समिति को एक रिपोर्ट सौंपेगी.
• इस नवगठित समिति में विषम संख्या में लोग होंगे और अध्यक्ष एक टाईब्रेकर के तौर पर कार्य करेंगे.
हांगकांग के लोग अब कैसे करेंगे मतदान: विवरण
इस नए प्रस्ताव के तहत, हांगकांगर्स अब केवल 20 प्रतिनिधियों को सीधे/ प्रत्यक्ष वोट दे पाएंगे, जबकि विधान परिषद का आकार 70 से बढ़ाकर 90 कर दिया गया है. यह खुद-ब-खुद चुने हुए प्रतिनिधियों की हिस्सेदारी को कम कर देता है.
अन्य 70 प्रतिनिधियों को मुख्य रूप से स्थापना समर्थक निकायों से चुना जाएगा.
दूसरी ओर, 1200 सदस्यीय चुनाव समिति, जो हांगकांग के मुख्य कार्यकारी को चुनती है, में भी 300 सदस्य बढ़ा दिए गये हैं और अब इस कम्युनिस्ट पार्टी-नियंत्रित विधायिका में हांगकांग का प्रतिनिधि भी शामिल होगा.
नई वेटिंग समिति की क्या भूमिका होगी?
इस नए प्रस्ताव के तहत, उम्मीदवारों की पात्रता की समीक्षा और पुष्टि करने के लिए उम्मीदवार पात्रता समीक्षा समिति का गठन किया जाएगा.
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गठित सुरक्षा समिति यह जान पाएगी कि चुनाव समिति के सदस्य या मुख्य कार्यकारी कार्यालय के लिए उम्मीदवार कानूनी आवश्यकता को पूरा करता है या नहीं.
चुनाव प्रणाली में बड़े बदलाव के लिए समर्थन
हांगकांग के नेता कैरी लैम ने यह दावा किया है कि, शहर की राजनीति में असंतुष्ट आवाज अभी भी मौजूद रहेगी.
निर्वाचन प्रणाली में किये गये इस बड़े परिवर्तन का NPC की स्थायी समिति द्वारा भी समर्थन किया गया था.
चिंता बढ़ाने वाला है चीन का यह कदम
चीन द्वारा हाल ही में उठाए गए इन कदमों ने यह चिंता बढ़ाई है कि, बीजिंग वर्ष, 1997 में हांगकांग के लिए लागू किए गए ‘वन कंट्री टू सिस्टम’ को खारिज कर सकता है.
भयंकर अंतर्राष्ट्रीय निंदा का सामना करने के बाद भी, चीन ने इस प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दी है.
पृष्ठभूमि
वर्ष, 2019-20 में हांगकांग में हुए विरोध प्रदर्शन को बीजिंग अपने अधिकार के लिए सीधी चुनौती के तौर पर देख रहा है. हांगकांग सरकार द्वारा भगोड़े अपराधी संशोधन विधेयक पेश किए जाने के कारण हांगकांग में ये विरोध प्रदर्शन हुए थे.
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