भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच वुहान में आयोजित की गई अनौपचारिक बैठक के बाद दोनों देशों की सेनाओं के मध्य हॉटलाइन स्थापित किये जाने की घोषणा की गई है.
विदित हो कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-चीन संबंध को मजबूत करने के लिए दो दिवसीय अभूतपूर्व शिखर वार्ता में शी चिनफिंग से मुलाकात की थी. दोनों देशों के नेता अपने-अपने सैन्य मुख्यालयों के बीच एक हॉटलाइन बनाने पर कथित तौर पर सहमत हो गए हैं.
हॉटलाइन का लाभ
भारत और चीन के नेता अपने-अपने सैन्य मुख्यालयों के बीच एक हॉटलाइन बनाने पर कथित तौर पर सहमत हो गए हैं. इस हॉटलाइन को विश्वास पैदा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है क्योंकि इससे दोनों मुख्यालयों को 3488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) में सीमा गश्ती दल के बीच तनाव और डोकलाम जैसे गतिरोध से बचने के लिए संवाद बढ़ाने में मदद मिलेगी. यह हॉटलाइन दोनों देशों के बीच विशवास बढ़ाने का भी काम करेगी.
भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल्स ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) के बीच हॉटलाइन सुविधाएं हैं लेकिन चीन के संबंध में ऐसी किसी सुविधा का संचालन करने के लिए चीनी सेना को एक नामित अधिकारी की पहचान करनी होगी.
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हॉटलाइन सेवा क्या है?
हॉटलाइन एक तरह की विशेष दूरभाष सुविधा है जिसमें एक व्यक्ति (दूरभाष) को दूसरे व्यक्ति (दूरभाष) से सीधे सुरक्षित तरीके से जोड़ा जाता है. इस प्रणाली में रिसीवर उठाते ही सम्बंधित व्यक्ति से ही संपर्क हो जाता है. इसमें डायल नहीं करना पड़ता है. यह संचार सेवा की सबसे सुरक्षित प्रणाली मानी जाती है. इसमें एक दूरभाष से पहले से निर्धारित दूसरे दूरभाष से ही सम्पर्क होता है और संपर्क कहीं और नहीं जुड़ता. मास्को और वाशिंगटन के मध्य विश्व की सबसे प्रसिद्ध हॉटलाइन सेवा है. इसे रेड टेलीफोन भी कहते हैं. यह हॉटलाइन सेवा 20 जून 1963 को प्रारम्भ हुई थी.
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