भारत सरकार ने 22 दिसंबर, 2020 को आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में सुरक्षित और हरित राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों (ग्रीन नेशनल हाइवे कॉरिडोर्स) के विकास के लिए विश्व बैंक के साथ 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.
भारत सरकार और विश्व बैंक के बीच इस समझौते पर अतिरिक्त सचिव, आर्थिक मामले विभाग, सीएस महापात्र, और विश्व बैंक की तरफ़ से भारत में कार्यवाहक देश निदेशक, सुमिला गूलानी द्वारा हस्ताक्षर किए गए. यह ऋण 5 वर्ष की छूट अवधि के साथ 18.5 वर्ष की अवधि के लिए दिया गया है.
हरित राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारे परियोजना
यह परियोजना 783 किलोमीटर राजमार्गों के निर्माण में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी, जिसके तहत औद्योगिक उप-उत्पाद, स्थानीय और सीमांत सामग्री, और अन्य जैव-अभियांत्रिकी समाधान जैसे सुरक्षित और हरित प्रौद्योगिकी डिजाइनों का संयोजन किया जाएगा.
उद्देश्य
• यह परियोजना चार प्रमुख राज्यों में सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए सुव्यवस्थित परिवहन प्रदान करेगी.
• यह परियोजना लोगों को बाजार और सेवाओं से जोड़ेगी, यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी, और दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों के ह्रास को कम करने के लिए निर्माण सामग्री और पानी के सदुपयोग को बढ़ावा देगी.
• जल निकासी सुविधाओं, नए फुटपाथ, बाईपास का निर्माण करके यह परियोजना मौजूदा संरचनाओं को भी चौड़ा और मजबूत करेगी. यह जंक्शनों में भी सुधार करेगी और सड़क सुरक्षा उपायों को आरंभ करेगी.
जलवायु-लचीली संरचना सुनिश्चित करना
यह सुनिश्चित करने के लिए कि, संरचना निवेश जलवायु-लचीले हैं, इस परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के 5000 किमी का आपदा जोखिम प्रबंधन, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की सहायता से किया जाएगा. इसके तहत, कार्यान्वयन और परियोजना के डिजाइन में जलवायु लचीलापन पहलू शामिल होंगे.
यह परियोजना माल ढुलाई की मात्रा के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर आवाजाही पैटर्न के मानचित्रण के लिए एनालिटिक्स का भी समर्थन करेगी, अभिनव रसद समाधान प्रदान करेगी, और बाधाओं की पहचान करेगी.
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