न्यूजीलैंड की संसद ने सर्वसम्मति से ऐसे कानून को मंजूरी दे दी है जो उन जोड़ों को - जिन्हें गर्भपात या स्टिलबर्थ/ मृत प्रसव का सामना करना पड़ा है - तीन दिन का सवेतन अवकाश देगा.
इसके साथ ही, न्यूजीलैंड इस तरह के लाभ प्रदान करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन गया है, क्योंकि इस तरह के कानून वाला भारत एकमात्र अन्य देश है.
यह शोक भत्ता, जिसे न्यूज़ीलैंड की संसद में सर्वसम्मति से पारित किया गया था, इसके मुताबिक अगर गर्भावस्था के दौरान गर्भपात या स्टिलबर्थ होता है, तो कर्मचारी के बीमारी अवकाश के अतिरिक्त, ऐसे कर्मचारियों को तीन दिन की छुट्टी दी जाती है.
मुख्य विवरण
• इस नए नए कानून के तहत भुगतान सहित अवकाश प्रावधान माताओं, उनके जीवन-साथी के साथ-साथ उन माता-पिता पर भी लागू होंगे जो सरोगेसी और गोद लेने के माध्यम से बच्चा पैदा करने की योजना बना रहे हैं.
• लेबर पार्टी के सांसद गिन्नी एंडरसन के अनुसार, न्यूजीलैंड में चार में से एक महिला को गर्भपात का सामना करना पड़ा है.
• भारत ऐसा एकमात्र अन्य देश है जिसमें ऐसा ही कानून पहले से लागू है.
न्यूजीलैंड ने प्रगतिशील कानून के लिए बनाया रास्ता
लेबर पार्टी के सांसद गिन्नी एंडरसन, जिन्होंने इस बिल को प्रस्तुत किया था, ने यह कहा कि इस बिल के पारित होने से यह पता चलता है कि, न्यूजीलैंड करुणा और प्रगतिशील कानून का मार्ग एक बार फिर प्रशस्त कर रहा है और यह गर्भपात और स्टिलबर्थ के लिए सवैतनिक अवकाश प्रदान करने वाल्स दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है.
उन्होंने आगे यह भी कहा कि, इस बिल से महिलाओं और उनके जीवन साथियों को अपने बीमारी अवकाश में बिना किसी नुकसान के इस दुःख से निपटने का पर्याप्त समय मिलेगा. क्योंकि वे जिस दुःख का सामना करते हैं वह कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह एक ऐसा नुकसान है जिससे निपटने में समय लगता है.
महिलाओं के अधिकारों के लिए न्यूजीलैंड का रवैया
न्यूजीलैंड विभिन्न महिला अधिकारों के मुद्दों पर एक तरह से अग्रणी रहा है. यह महिलाओं को मतदान का अधिकार देने वाला दुनिया का पहला देश था और ऐसे सभी मुद्दों पर अग्रणी रहा है जो महिला अधिकारों पर केंद्रित रहे हैं.
न्यूजीलैंड में सत्तारूढ़ सेंटर-लेफ्ट सरकार का नेतृत्व प्रधानमंत्री जैकिंडा अर्डर्न द्वारा किया जाता है, जिन्हें महिलाओं के लिए वैश्विक चैंपियन के तौर पर भी देखा और जाना जाता है. वर्ष, 2020 में उनकी सरकार ने गर्भपात को गैर-क़ानूनी या एक अपराध नहीं मानने के लिए एक ऐतिहासिक कानून पारित किया था.
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