संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने 6 मार्च 2018 को कहा कि आज से 10 साल पहले 47 प्रतिशत लड़कियों का विवाह 18 वर्ष की उम्र से पहले कर दिया जाता था जो अब घटकर 27 प्रतिशत हो गया है.
यूनिसेफ ने बताया कि बाल विवाह के आंकड़ों में वैश्विक स्तर पर कमी आई है. रिपोर्ट के मुताबिक बाल विवाह के घटने की दर संतोषजनक है.
मुख्य तथ्य:
• रिपोर्ट में बताया गया कि एक दशक पहले हर 4 में से एक लड़की की शादी 18 साल की उम्र से पहले ही हो जाती थी.
• भारत में हुई इस कमी ने वैश्विक स्तर पर बाल विवाहों की संख्या में कमी लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
• बाल्यावस्था में शादी करने वाले लड़कियों के अनुपात में 15 प्रतिशत कमी आई है.
• यूनिसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस सालों में ढाई करोड़ बाल विवाह रोके गए.
• इनमें सबसे ज्यादा कमी दक्षिण एशिया में दर्ज की गई जहां भारत शीर्ष पर था.
• दक्षिण एशिया में बाल विवाह 50 फीसदी से घटकर 30 फीसदी के स्तर तक पहुंच गया है.
बाल विवाह में गिरावट का मुख्य कारण:
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के मुताबिक बाल विवाह में गिरावट की बड़ी भूमिका निभाने वाले कारकों में लड़कियों की शिक्षा दर बढ़ना, सरकारी योजनाओं से किशोर लड़कियों को प्रोत्साहन देना और बाल विवाह से होने वाले नुकसान को लेकर बढ़ती जागरूकता शामिल हैं.
पृष्ठभूमि:
संयुक्त राष्ट्र ने सतत विकास लक्ष्यों के तहत इस कुप्रथा को 2030 तक पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है. बाल विवाह के चलते लड़कियों का स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन खतरे में पड़ जाता है. इसके कारण पीढ़ी दर पीढ़ी गरीबी की आशंका बढ़ती है. देश के बाल विवाह निषेध कानून के अंतर्गत नाबालिग बच्चों के विवाह की कोशिश करने वाले अभिभावकों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना और दो साल की जेल का प्रावधान है.
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