टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स, 27 मई 2021 के अंतर्गत आज के शीर्ष करेंट अफ़ेयर्स को शामिल किया गया है जिसमें मुख्य रूप से माउंट न्यारागोंगो ज्वालामुखी और कोरोना वायरस आदि शामिल हैं.
भारत सरकार का बड़ा फैसला, LAC पर तैनात होंगे नए इजरायली हेरॉन ड्रोन
इन ड्रोन का इस्तेमाल पूर्वी लद्दाख और चीन की सीमा के साथ अन्य क्षेत्रों में दुश्मन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के लिए किया जाएगा. भारतीय सेना को पूर्वी लद्दाख और अन्य क्षेत्रों में तैनाती के लिए जल्द ही चार इजरायली ड्रोन मिलने जा रहे हैं. हालांकि, कोरोना महामारी की वजह से ड्रोन की डिलीवरी में देरी हुई है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार ने चीन से जारी विवाद के बीच 500 करोड़ रुपये का इमरजेंसी फंड जारी किया था. इन ड्रोन की खरीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की तरफ से दिए गए आपात वित्तीय अधिकार के तहत की गई है.
फाइजर ने भारत सरकार से मांगी मंजूरी, कहा- हमारा टीका 12 साल से अधिक उम्र पर प्रभावी
फाइजर ने अपनी वैक्सीन के बारे में बताते हुए कहा कि उनका ये टीका 12 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को दिया जा सकता है. इसके साथ ही इसे स्टोर करना भी आसान है. इसे एक महीने के लिए 2-8 डिग्री के तापमान में रखा जा सकता है. इतना ही नही कंपनी का कहना ये भी है कि फाइजर भारत में फैले कोरोना स्ट्रेन पर काफी प्रभावी है.
फाइजर ने अमेरिका सहित 116 देशों से क्षतिपूर्ति के करार किये हैं. दुनियाभर में फाइजर टीके की अब तक 14.7 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं. देश में इस समय दो वैक्सीन भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड लोगों को दी जा रही है. सरकार ने स्पुतनिक V को भी मंजूरी दी है.
कांगो में माउंट न्यारागोंगो ज्वालामुखी लगभग दो दशकों के बाद फटा, 500 से अधिक घर हुए नष्ट
लगभग दो दशकों के बाद कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में माउंट न्यारागोंगो ज्वालामुखी फट गया, जिससे हजारों लोगों को अपने घरों से पलायन करना पड़ा. इस लावे ने गोमा शहर के बाहरी इलाके में 500 से अधिक घरों को नष्ट कर दिया लेकिन गामा शहर को बड़े पैमाने पर बचा लिया गया है.
रवांडा के आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय के अनुसार, विस्फोट के बाद कम से कम 8,000 लोगों ने सीमा पार कर उनके देश में प्रवेश किया है. अन्य 25,000 ने कथित तौर पर सेंक में उत्तर-पश्चिम में शरण ली है. कांगो के अधिकारियों ने कोई निकासी आदेश जारी नहीं दिया था.
हैप्पी हाइपोक्सिया क्या है और युवाओं लिए कैसे जानलेवा बन रहा है?
विशेषज्ञ कोरोना मरीजों की अचानक बिगड़ती तबियत के पीछे हैप्पी हाइपोक्सिया को मान रहे हैं. सामान्य कोरोना मरीजों में ये लक्षण ज्यादा हैं और बुखार, खांसी नहीं होने की वजह से जब तब आक्सीजन का स्तर कम होता है, तब तक हालत ज्यादा ही बिगड़ जाती है.
हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण सामने नहीं आते हैं इसलिए सावधान रहें. शरीर में, रंग में बदलाव होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. ऑक्सीमीटर से सेचुरेशन लेवल चेक करें और डॉक्टर से संपर्क करें. इस बीमारी को साइलेंट किलर कहा गया है क्योंकि इसमें ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल कम हो जाता है और एकदम से उसकी मृत्यु हो जाती है.
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