केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने 'दुर्लभ बीमारियों के लिए राष्ट्रीय नीति 2021' को मंजूरी दी है. इस नीति का उद्देश्य दवाओं के देशी अनुसंधान और उसके स्थानीय उत्पादन पर अधिक ध्यान देने के साथ दुर्लभ बीमारियों के इलाज की उच्च लागत को कम करना है.
राष्ट्रीय आरोग्य निधि योजना के तहत उन दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए बीस लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है, जो दुर्लभ बीमारी नीति में समूह एक के तहत सूचीबद्ध हैं.
#HealthForAll
— Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) April 3, 2021
Union Health Minister @drharshvardhan approves the National Policy for Rare Diseases, 2021 today.https://t.co/frj0XxzEry @PMOIndia @drharshvardhan @AshwiniKChoubey @PIB_India @mygovindia @NITIAayog
मुख्य बिंदु
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि इस तरह की वित्तीय सहायता के लाभार्थी बीपीएल परिवारों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि यह लाभ लगभग चालीस प्रतिशत आबादी तक पहुंचाया जाएगा, जो प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र हैं.
बयान में कहा गया कि दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए वित्तीय सहायता का प्रस्ताव राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) योजना के तहत किया गया है.
इसके अलावा, नीति में एक क्राउड फंडिंग व्यवस्था की भी परिकल्पना की गई है जिसमें कॉरपोरेट और लोगों को दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए एक मजबूत आईटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से वित्तीय सहायता देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने 30 मार्च को ’दुर्लभ बीमारियों के लिए राष्ट्रीय नीति 2021’ को मंजूरी दी.
असामान्य या दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीज अब आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत एक बार इलाज के लिए पात्र होंगे.
वित्तीय सहायता के लाभार्थी केवल बीपीएल परिवार के ही नहीं होंगे बल्कि यह सहायता उस आबादी के लगभग 40 प्रतिशत तक विस्तारित होगी, जो पीएमजेएवाई के 23 नॉर्म्स के तहत केवल सरकारी टर्शियरी हॉस्पिटल्स में इलाज के लिए पात्र हैं.
Comments
All Comments (0)
Join the conversation