केंद्र सरकार 27 मार्च 2018 को केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ साझेदारी की, ताकि अपनी ‘सौभाग्य’ योजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए छह राज्यों में श्रम बल को प्रशिक्षित किया जा सके.
सौभाग्य योजना को प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना के रूप में भी जाना जाता है. इस योजना का लक्ष्य समयबद्ध ढंग से देश के सभी हिस्सों में अवस्थित समस्त घरों में बिजली पहुंचाना है. इस योजना के तहत लगभग 4 करोड़ घरों में बिजली पहुंचाए जाने की आशा है.
परियोजना से संबंधित मुख्य तथ्य
- विद्युत क्षेत्र की जरूरतों की पूर्ति के लिए लगभग 47,000 वितरण लाइनमैन- मल्टी स्किल और 8500 तकनीकी सहायकों को प्रशिक्षित किया जाएगा.
- इस परियोजना को क्रियान्वित कर रहे ठेकेदारों द्वारा जिस श्रम बल से पहले से ही काम लिया जा रहा है उस पर कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए सबसे पहले विचार किया जाएगा.
- श्रम बल अपर्याप्त होता है तो कम पड़ने वाले श्रम बल की पूर्ति स्थानीय आईटीआई से पास करने वाले आईटीआई इलेक्ट्रिशियन से की जाएगी.
इस साझेदारी की आवश्यकता क्यों थी?
- प्रशिक्षित श्रम बल का अभाव ‘सौभाग्य’ योजन के तहत सरकार के विद्युतीकरण कार्यक्रम के त्वरित क्रियान्वयन में मुख्य बाधा है.
- विद्युत क्षेत्र के विभिन्न कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित श्रम बल की आवश्यकता है और अकेले ‘सौभाग्य’ योजना के लिए 35,000 से भी अधिक प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है.
- यह प्रशिक्षित श्रम बल उपलब्ध हो जाएगा तो इससे विद्युतीकरण के हमारे दैनिक लक्ष्यों की पूर्ति में हमें काफी मदद मिलेगी.
सौभाग्य योजना
यह योजना केंद्र सरकार की प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) का एक हिस्सा है.
सौभाग्य एक ऐसी योजना है जिसमें 16,000 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आएगा और इसमें से 25 प्रतिशत को इस परियोजना के लिए तैनात किए जाने वाले मानव संसाधन एवं उनके पारिश्रमिक पर खर्च किए जाने का अनुमान है.
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