केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2010-11 की आर्थिक समीक्षा लोकसभा में 25 फरवरी 2011 को प्रस्तु्त की. ठोस आर्थिक वृद्धि और सतत वित्तीय सुदृढ़ीकरण वित्तवर्ष 2010-11 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषता रही. वर्ष 2010-11 में देश की आर्थिक विकास दर 8.6 प्रतिशत रही. जबकि वित्तवर्ष 2011-12 में आर्थिक विकास दर 9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया. वित्तवर्ष 2010-11 में सकल वित्तीय घाटा जीडीपी का 4.8 प्रतिशत और राजस्व घाटा जीडीपी का 3.5 प्रतिशत रहा. बचत और निवेश में वृद्धि और निजी उपभोग में बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप बाजार भाव पर जीडीपी में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई. वर्ष 2009-10 के दौरान बचत दर में 33.7 प्रतिशत और निवेश दर में 36.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
विनिर्माण और सेवा क्षेत्र ने प्रभावी विकास दर दर्ज की है. बचत और निवेश में वृद्धि होने एवं निर्यात भी बढ़ने का अनुमान है, तथापि खाद्य महंगाई दर, जिंसों के ऊंचे दाम और वैश्विक जिंस बाजार में अस्थिरता चिंता का विषय रहा. दिसम्बर 2010 में खाद्य मुद्रास्फीति का थोक बिक्री मूल्य सूचकांक 13.6 प्रतिशत तक पहुंच गया. सामान्य मुद्रास्फीति में खाद्य एवं ईंधन की कीमतों में वृद्धि के संकेत हैं. यदि देश आर्थिक विकास के रास्ते पर न होता तो मुद्रास्फीति 13.6 प्रतिशत से 1.5 प्रतिशत कम होती.
11वीं पंचवर्षीय योजना के प्रथम चार वर्षों में कृषि क्षेत्र की विकास दर 2.87 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया. अनाज का उत्पादन वित्तवर्ष 2009-10 के 21.81 करोड़ टन की तुलना में बढ़कर वित्तवर्ष 2010-11 में 23.21 करोड़ टन हो गया. अपेक्षाकृत बेहतर मॉनसून के कारण कृषि क्षेत्र की विकास दर वित्तवर्ष 2010-11 में 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
वित्तवर्ष 2010-11 में औद्योगिक उत्पादन विकास दर 8.6 प्रतिशत रही जबकि विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि 9.1 प्रतिशत रही. अप्रैल से नवंबर 2010 के दौरान दूरसंचार, कच्चा तेल उत्पादन, नागर विमानन क्षेत्रों में भी विकास किया. छह प्रमुख उद्योगों ने अप्रैल से दिसंबर 2010 के दौरान 5.3 प्रतिशत (अनंतिम) की वृद्धि दर्ज की. शहरी क्षेत्रों में दूरसंचार घनत्व वर्ष 2010 में बढ़कर 143.95 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 30.18 प्रतिशत हो गया.
सामाजिक सेवाओं और ग्रामीण विकास (योजना और गैर-योजना) के क्षेत्र में केंद्र सरकार का व्यय वित्तवर्ष 2005-06 के 13.75 प्रतिशत से बढ़कर 2010-11 में 19.27 प्रतिशत हो गया. इस बीच इस क्षेत्र पर व्यय में कुल 5.52 प्रतिशत की वृद्धि हुई. सामाजिक सेवाओं पर होने वाला व्यय वर्ष 2005-06 में जीडीपी का 5.49 प्रतिशत की तुलना में 2010-11 में जीडीपी का 6.63 प्रतिशत (बजटीय अनुमान) हो गया.
सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों पर होने वाले व्यय में पिछले पांच वर्षों में जीडीपी के 5 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है. सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत सितम्बर 2010 तक 309727 नए विद्यालय खोले गए. 254935 विद्यालय भवनों का निर्माण और 1166868 अतिरिक्त कक्षों का निर्माण किया गया. 8.70 करोड़ बच्चों को पाठ्यपुस्तकों की नि:शुल्क आपूर्ति तथा 11.13 लाख अध्यापकों की नियुक्ति की गई. इसके अतिरिक्त 14.02 लाख अध्यापकों को सेवाकालीन प्रशिक्षण दिया गया.
समावेशी विकास की पहल के रूप में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत अब तक 8.33 लाख सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता- आशा का, 1572 विशेषज्ञ, 8284 एमबीबीएस डॉक्टर, 26734 स्टाप नर्स, 53552 सहायक नर्स, 18272 अर्द्ध- चिकित्सीय कर्मचारी नियुक्त किए गए.
वर्ष 2010-11 के दौरान करीब 4.10 करोड़ लोगों को दिसंबर 2010 तक रोजगार प्रदान किए गए. वर्ष 2009-10 के दौरान राजस्थान में अधिकतम रोजगार के बाद आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और बिहार रहा.
वर्ष 2009-10 के लिए सीएसओ के त्वरित अनुमानों में सकल घरेलू बचतें वर्तमान बाजार कीमतों (बचत दर) पर सकल घरेलू उत्पाद के 33.7 प्रतिशत पर आकलित की गई. वर्ष 2008-09 के लिए बचत दर को भी 32.5 प्रतिशत के स्तर से संशोधित करके 32.2 प्रतिशत किया गया था. निजी क्षेत्र की बचतें वर्ष 2005-11 में 30.1 प्रतिशत से 31.9 प्रतिशत की सीमा के बीच ही रहीं. वैश्विक अर्थव्यवस्था में 5 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि का अनुमान लगाया गया. उदीयमान अर्थव्य्वस्थाओं में वृद्धि सशक्त बनी रही.
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की मानव विकास रिपोर्ट (एचडीआर) 2010 (वर्ष 2008) के अनुसार 2010 में भारत की एचडीआई 0.519 और 169 देशों में इसकी रैंकिंग 119 रही. वहीं एचडीआर 2009 (वर्ष 2007) में भारत की रैंकिंग कुल 182 देशों में 134 रही थी. इस प्रकार वर्ष 1980 से 2010 के बीच भारत की एचडीआई सुधार रैंक 6 रही.
वर्ष 2010 में भारत की औसत जीवन प्रत्याशा 64.4 वर्ष रही. यह वैश्विक औसत जीवन प्रत्याशा 69.3 से लगभग 5 साल कम है. लिंग समानता के मामले में सूचकांक मान 0.748 के साथ भारत 2008 में कुल 168 देशों में 122वें स्थान पर रहा.
बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश वर्ष 2008-09 के 7.18 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2011-12 में 8.37 प्रतिशत हो जाने का अनुमान. आर्थिक समीक्षा 2010-11 के अग्रिम अनुमान के अनुसार सेवा क्षेत्र की विकास दर 9.6 प्रतिशत रहेगी. वित्तवर्ष 2009-10 में इस क्षेत्र की विकास दर 10.1 प्रतिशत रही थी. वित्तवर्ष 2010-11 की आर्थिक समीक्षा में भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान जीडीपी का 55.2 प्रतिशत हो गया. यह प्रति वर्ष 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है.
अप्रैल-दिसंबर 2010-11 में भारत की समग्र निर्यात वृद्धि 29.5 प्रतिशत और आयात में वृद्धि 19 प्रतिशत रही. अप्रैल-दिसंबर 2010-11 में भारत ने 164.7 अरब अमरीकी डॉलर का निर्यात किया. वित्तवर्ष 2010-11 की पहली छमाही में भी संयुक्त अरब अमीरात चीन के बाद भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना रहा. वित्तवर्ष 2009-10 और 2010-11 (अप्रैल सितंबर) में संयुक्त अरब अमीरात ने भारत से सबसे अधिक आयात किया. अमरीका के साथ भारत का व्यापार 2007-08 में पहले स्थान पर था जो वित्तवर्ष 2008-09 में तीसरे स्थान पर पहुंच गया. सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 2009-10 और 2010-11 में किए गए व्यापार नीति संबंधी उपाय निर्यात तथा निर्यात संबंधी रोजगार बढ़ाने पर केन्द्रित रहे.
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