केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने 14 जुलाई 2015 को दिल्ली के लिए ट्रांज़िट ओरिएंटेड विकास नीति (टीओडी) को मंजूरी दी. इस नीति को दिल्ली के मास्टर प्लान-2021 की समीक्षा के भाग के रूप में अनुमोदित किया गया था.
नीति का उद्देश्य राज्य में प्रदूषण, भीड़ कम करना तथा गरीब एवं मध्यम वर्ग के लिए घरों की कमी जैसी समस्याओं का समाधान करना है.
शहरी विकास मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि टीओडी एक मुख्य नीतिगत पहल है जिससे कार्बन उत्सर्जन, अधिक जनसंख्या घनत्व तथा छोटे स्थानों में रह रहे लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं. टीओडी ज़ोन में दिल्ली के कुल क्षेत्र का लगभग 20 प्रतिशत शामिल होगा.
नीति की विशेषताएं
मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (एमआरटीएस) के आसपास निर्माण के लिए भूभाग क्षेत्र अनुपात (एफएआर) को दोगुना कर के 400 कर दिया गया है. इससे दिल्ली में यातायात से होने वाली भीड़ तथा आवास की कमी के मुद्दों से निपटने में मदद मिलेगी.
इस एफएआर का लाभ 1 हेक्टेयर या उससे अधिक आकार के प्लाट पर लिया जा सकता है. इसके विपरीत पुनर्विकास क्षेत्र के बाहर टीओडी क्षेत्र का आकार 4 हेक्टेयर से अधिक है.
टीओडी नीति के तहत विकास कार्य करने के लिए कम से कम 3000 स्क्वायर मीटर का प्लाट होना आवश्यक है.
मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के तहत विकास कार्यों के लिए डीएमआरसी, रैपिड रेल ट्रांज़िट सिस्टम तथा रेलवे के लिए प्लाट का आकार न्यूनतम 3000 स्क्वायर मीटर होना चाहिए.
यह नागरिकों के लिए कम समय में यात्रा और सार्वजनिक परिवहन की आसान उपलब्धता के लिए मिश्रित भूमि उपयोग की अनुमति देता है.
टीओडी नीति के प्रभाव क्षेत्र में मेट्रो गलियारे के दोनों ओर का 500 मीटर क्षेत्र शामिल होगा.
यदि अभियोजित क्षेत्र का 50 प्रतिशत से अधिक प्रभावी क्षेत्र में आता है तो एक योजना का सम्पूर्ण लेआउट प्लान उस प्रभाव क्षेत्र में शामिल कर लिया जायेगा.
कुल एफएआर क्षेत्र का 30 प्रतिशत रिहाइशी उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जायेगा. 10 प्रतिशत भाग को वाणिज्यिक उपयोग तथा 10 प्रतिशत सामुदायिक लाभ के लिए उपयोग किया जायेगा.
एफएआर क्षेत्र का 50 प्रतिशत भाग ज़ोनल प्लान के अनुरूप उपयोग किया जायेगा.
20 प्रतिशत क्षेत्र सड़कों तथा परिसंचरण के लिए उपयोग किया जायेगा. 20 प्रतिशत भाग हरित क्षेत्र रहेगा जिसे आम नागरिकों के लिए खुला रखा जायेगा, जबकि बाकी बचा 10 प्रतिशत भाग किसी विशेष निर्माण के लिए उपयोग किया जा सकता है.
एमआरटीएस एजेंसियों को अनिवार्य 30 प्रतिशत आवासीय घटक प्रदान करने से छूट दी गई है, यह टीओडी नीति का एक विशेष भाग है जो सभी निर्माण संस्थाओं के लिए लागू होता है.
रात के समय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाली महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी इसमें शामिल है.
गरीबी रेखा से नीचे तथा गरीबी रेखा पर रह रहे मध्यम वर्ग के लोगों को 'सभी के लिए आवास' मिशन के तहत ईडब्ल्यूएस इकाइयों का आकार 32-40 वर्ग मीटर के बीच रखा गया है.
1 हेक्टेयर क्षेत्र के अतिरिक्त 45 प्रतिशत क्षेत्र (18,000 वर्ग मीटर) गरीब और मध्यम वर्ग के लिए आवासीय इकाइयों को उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किया जायेगा.
हालांकि टीओडी मानदंड लुटियन बंगला जोन, सिविल लाइन्स क्षेत्र, स्मारकों के इर्द-गिर्द जोन 'ओ' (यमुना नदी के आसपास) तथा कम घनत्व वाले आवासीय क्षेत्र पर लागू नहीं होगा.
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