गुर्जर आंदोलन की मांग को देखते हुए राजस्थान सरकार ने सरकारी नौकरियों में गुर्जरों सहित विशेष पिछड़े वर्गों (SBC: Special Backward Class) के लिए 4 फीसदी आरक्षण का निर्णय लिया. राजस्थान सरकार ने 28 दिसंबर 2010 को मंत्रिपरिषद की बैठक में यह फैसला लिया और गुर्जर आंदोलन को वापस लेने की अपील की.
ज्ञातव्य हो कि राज्य में 100000 सरकारी रिक्तियों में से 4000 रिक्तियां विशेष पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित की गई. गुर्जरों के लिए 1 फीसदी आरक्षण पहले से ही निर्धारित है. राज्य सरकार के अनुसार ये आरक्षित रिक्तियां राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा विशेष पिछड़े वर्गों के लिए 5 फीसदी आरक्षण के निर्णय तक यथास्थित रहेगी.
राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण मिश्र और न्यायमूर्ति महेश भगवती की खंडपीठ ने 22 दिसंबर 2010 को एक याचिका की सुनवाई में गुर्जरों को विशेष आरक्षण नहीं दिए जाने का निर्णय दिया था. न्यायमूर्ति अरुण मिश्र और न्यायमूर्ति महेश भगवती की खंडपीठ ने राजस्थान अधिनियम 2008 का संदर्भ देते हुए निर्णय दिया कि इस अधिनियम में गुर्जर जाति को विशेष आरक्षण मिलने का उल्लेख नहीं है. खंडपीठ ने गुर्जरों को 1 फीसदी आरक्षण देने पर सहमति जताई. साथ ही राज्य सरकार से एक वर्ष के भीतर विशेष पिछड़े वर्ग (बंजारा, गाड़िया लुहार, गुर्जर और राईकाओं) की आर्थिक स्थिति का ब्यौरा संग्रह करने का निर्देश भी दिया.
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक केएस बैंसला ने न्यायालय के निर्णय पर खेद जताया और गुर्जर आंदोलन को और तेज करने का आह्वान किया.
महत्वपूर्ण तथ्य: राजस्थान अधिनियम 2008 का विस्तृत नाम: राजस्थान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, विशेष पिछड़ा वर्ग और आर्थिक पिछड़ा वर्ग (राज्य की शैक्षिक संस्थाओं में सीटों और राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्तियों और पदों का आरक्षण) अधिनियम, 2008.
राजस्थान सरकार ने जुलाई 2009 में राजस्थान अधिनियम 2008 को पारित कर दो नए वर्गों को आरक्षण मुहैया कराया था. इसमें विशेष पिछड़े वर्ग [बंजारा, गाड़िया लुहार, गुर्जर और राईकाओं (रेबारी/देवासी)] को 5 फीसदी और आर्थिक पिछड़े वर्ग को 14 फीसदी आरक्षण दिया गया था. राजस्थान अधिनियम 2008 से पहले राज्य में अनुसूचित जातियों (16 फीसदी), अनुसूचित जनजातियों (12 फीसदी) और पिछड़े वर्गों (21 फीसदी) के लिए आरक्षण निर्धारित था. राजस्थान अधिनियम 2008 में शामिल दो वर्गों को दिए गए आरक्षण से राज्य में कुल आरक्षण 68 फीसदी हो गया था. कुल आरक्षण 50 फीसदी से अधिक होने के कारण अक्टूबर 2009 में राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य में विशेष पिछड़े वर्ग और आर्थिक पिछड़े वर्ग के आरक्षण पर रोक लगाई थी.
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