भारतीय मूल की अमेरिकी लेखिका झुम्पा लाहिड़ी की पुस्तक ‘लोलैंड’ का 8 अप्रैल 2014 को बेलीज वुमेंस प्राइज 2014 के लिए चयन किया गया. इस पुरस्कार के लिए पांच और किताबों का चयन किया गया. यह ब्रिटेन का एक मात्र वार्षिक पुस्तक पुरस्कार है जो कि महिला काल्पनिक कथाकारों को दिया जाता है और इस वर्ष इस पुरस्कार की घोषणा 4 जून 2014 को लंदन में की जाएगी.
लोलैंड 2013 में प्रकाशित हुई थी. किताब की कहानी कोलकाता और अमेरिका के रोड द्वीप के इर्द– गिर्द घूमती है और इसमें दो भाइयों (सुभाष और उदयन) के जीवन, उनकी पसंद और उनके भाग्य की कहानी है. इससे पहले, इस किताब को मान बुकर पुरस्कार के लिए भी शॉर्टलिस्ट किया गया था.
पुरस्कार के लिए चुनी गई अन्य लेखक और उनकी पुस्तकें
• चीमामान्दा नगोजी अदिची– अमेरिकानाह
• हान्ना केंट– ब्रूएल राइट्स
• ऑड्रे मागी– द अंडरटेकिंग
• एमर मैकब्राइड– ए गर्ल इज ए हाल्फ फॉर्म्ड थिंग
• डोन्ना टार्ट्ट– द गोल्डफिंच
झुम्पा लाहिड़ी के बारे में
• पुलित्जर पुरस्कार विजेता भारतीय मूल की अमेरिकी उपन्यासकार हैं.
• उनका उपन्यास नेमसेक (2003) पर इसी नाम से एक बहुचर्चित फिल्म बनी थी.
• लाहिड़ी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नियुक्त किए गए कला और मानविकी के राष्ट्रपति समिति की सदस्य हैं.
• उनकी लघु कथाओँ का संग्रह इंटरप्रेटर ऑफ मालदीव (1999) को साल 2000 में फिक्शन का पुलित्जर पुरस्कार मिला था.
बेलीज वुमेंस प्राइज फॉर फिक्शन के बारे में
इस पुरस्कार की शुरुआत 1996 में महिलाओं द्वारा लिखित अंतरराष्ट्रीय फिक्शन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरु किया गया था. पहले इसे ऑरेंज प्राइज के नाम से जाना जाता था.
यह पुरस्कार हर वर्ष दिया जाता है और यह विश्व भर की महिला लेखिकाओं की उत्कृष्टता, मौलिकता और पहुंच का उत्सव मनता है. पुरस्कार की विजेता को £30000 का चेक और ग्रीजेल निवेन द्वारा कांसे की बनाई गई प्रतीक चिह्न बेस्सी प्रदान किया जाता है.
बेलीज वुमेंस प्राइज फॉर फिक्शन की पूर्व विजेताओं के नाम
• 2013 : ए.एच. होम्स की मे वी बी फॉरगीवन
• 2012: मेडलिन मिलर की द सॉन्ग ऑफ अकीलीज
• 2011: टी ओबरेट की द टाइगर्स वाइफ
• 2010: बारबरा किंगस्लोवर की द लाकुना
पुरस्कार की प्रथम दो विजेता
• 1996: हेलेन डुनमोन की अ स्पेल ऑफ विंटर
• 1997: ऐनी माइकल्स की फ्यूगिटिव पीसेस


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