भारतीय मूल के छह वैज्ञानिकों को ब्रिटेन के रॉयल सोसायटी की प्रतिष्ठित फेलोशिप हेतु चयनित किया गया. वर्ष 2012 के लिए रॉयल सोसायटी की प्रतिष्ठित फेलोशिप के लिए इम्पीरियल कॉलेज लंदन में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर तेजिंदर सिंह विरदी, बंगलुरु स्थित नेशनल सेंटर फॉर बॉयोलाजिकल साइंसेस के निदेशक प्रोफेसर कृष्णस्वामी विजय राघवन, यूनीवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया में प्रोफेसर चंद्रशेखर बालचंद्र खरे, यूनीवर्सिटी आफ टैक्सास के प्रोफेसर मत्थुककुमाली विद्यासागर, यूनीवर्सिटी आफ कैंब्रिज के प्रोफेसर शंकर बालसुब्रह्मण्यम और यूनीवर्सिटी आफ ब्रिस्टल के प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार अग्रवाल को चुना गया. भारतीय मूल के छह वैज्ञानिक, उन 44 विशेषज्ञों में शामिल हैं जिन्हें वर्ष 2012 के लिए रॉयल सोसायटी फेलोशिप हेतु चयनित किया गया.
इम्पीरियल कॉलेज लंदन में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर तेजिंदर सिंह विरदी को सीईआरएन लार्ज हैड्रोन कोलाइडर में काम्पैक्ट मुओन सोलेनाएड (सीएमसी) प्रयोग करने के लिए डिजाइन, निर्माण और उपयोग के लिए जाना जाता है. प्रोफेसर तेजिंदर सिंह विरदी ने करीब वर्ष 1990 के आसपास चार सहयोगियों के साथ मिलकर सीएमएस की परिकल्पना दी थी.
ज्ञातव्य हो कि रॉयल सोसायटी का गठन वर्ष 1660 में विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य की पहचान करने, प्रोत्साहित करने और उसका समर्थन करने के लिए किया गया था. सोसायटी ने गत वर्षों के दौरान आइजक न्यूटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, स्टीफन हाकिंग और टिम बर्नर्स ली सहित करीब 1500 वैज्ञानिकों को फेलोशिप प्रदान की है. फेलोशिप के लिए वैज्ञानिकों का चुनाव आजीवन समय के लिए किया जाता है.
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