भारत और अफगानिस्तान ने 28 अप्रैल 2015 को द्विपक्षीय समझौते को उच्च स्तर तक ले जाने के लिए एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया. यह संयुक्त वक्तव्य अफगानिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद जारी किया गया. मोहम्मद गनी 27 अप्रैल से 29 अप्रैल 2015 तक भारत की यात्रा पर आए थे. राष्ट्रपति पद पर आसीन होने के बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आमन्त्रण पर गनी की यह पहली भारत यात्रा थी.
संयुक्त वक्तव्य का विवरण
• दोनों देश आपसी रिश्तों को व्यवस्थित और धैर्य के साथ दीर्घकालिक संबंधों की ओर ले जाने तथा भारत-अफगानिस्तान के बीच सामरिक भागीदारी को मजबूत करने पर सहमत हुए.
• दोनों देशों ने रणनीतिक भागीदारी अनुबंध के तहत परिकल्पना सहयोग के सभी क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की.
• प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति को भारत की ओर से 2015-24 के दशक और इसके आगे के लिए अफगानिस्तान में चल रहे महत्वपूर्ण आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक बदलावों में समर्थन देने का भरोसा दिलाया.
• दोनों देशों ने सहमति जताई कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी अन्य देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में नहीं होने देंगे.
• दोनों देशों ने आतंकवाद और इसके सभी रूपों का अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर मुकाबला करने का दृढ़ संकल्प जताया.
• राष्ट्रपति गनी ने दोनों देशों के बीच व्यापार को प्रोत्साहित करने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदम पर संतोष व्यक्त किया तथा हाल ही में पीएटीटीटीए (पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान व्यापार और पारगमन अनुबंध) वार्ता में एक चौथे दल के रूप में शामिल होने के भारत के निर्णय पर संतोष जताया, जो व्यवस्था में व्यापक क्षेत्रीय एकीकरण के लिए सार्थक ढंग से योगदान देने की अनुमति प्रदान करेगा.
• अफगानिस्तान ने ‘हार्ट ऑफ द एशिया’ कार्यक्रम के तहत व्यापार, वाणिज्य और निवेश विश्वास बहाली उपाय (टीसीआई-सीबीएम) के लिए भारतीय प्रबंधन के कदम का भी स्वागत किया जिनकी गतिविधियां अफगानिस्तान के संभावित प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करती हैं और यह एशिया के हृदय स्थल में अद्वितीय स्थान है.
• दोनो नेता बड़े, मध्यम और छोटे सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों सहित अन्य व्यापार के लिए अधिक उदार व्यापार वीजा व्यवस्था की दिशा में काम करने के लिए सहमत हो गए.
• दोनों देशों के नेताओं ने चहाबहार बंदरगाह की योजना को वास्तविकता में बदलने के लिए ईरान सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए सहमति जताई.
• दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में सुधार लाने के लिए साझा लक्ष्य के तौर पर काम करने पर सहमति जताई और प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुधार में जी-4 संकल्प को सह-प्रायोजित करने व अफगानिस्तान द्वारा भारत का समर्थन करने के लिए अफगानिस्तान का धन्यवाद किया. इन सुधारों में संयुक्त राष्ट्र के 70वें वर्ष में सुरक्षा परिषद का विस्तार करना भी शामिल है.
दोनों नेता दौरे के तीन माह में इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने पर भी सहमत हुए. दस्तावेजों में शामिल है :
1. भारत और अफगानिस्तान के बीच प्रत्यर्पण संधि
2. भारत और अफगानिस्तान के बीच सजा प्राप्त व्यक्तियों के हस्तांतरण का अनुबंध
3. आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (एमएलएटी)
4. भारत और अफगानिस्तान के बीच नागरिक व वाणिज्यिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता के लिए दो पक्षीय संधि
5. भारत और अफगानिस्तान के बीच यात्री, व्यक्तिगत और कारगो वाहनों के आवागमन के नियमन के लिए मोटर वाहन अनुबंध
6. राजनयिक पासपोर्ट धारकों को वीजा से मुक्त प्रवेश के लिए एमओयू
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