शस्त्र विश्वविद्यालय : उष्णकटिबंधीय घास दरभा एक इको-फ्रेंडली भोजन संरक्षक

Mar 21, 2015, 13:55 IST

16 मार्च 2015 को तंजावुर के शस्त्र विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओँ ने उष्णकटिबंधीय घास दरभा को इको-फ्रेंडली भोजन संरक्षक बताया

16 मार्च 2015 को तंजावुर के शस्त्र विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओँ ने उष्णकटिबंधीय घास दरभा को इको– फ्रेंडली भोजन संरक्षक बताया.
घास दरभा पर यह अध्ययन संयुक्त रूप से सेंटर फॉर नैनोटेक्नोलॉजी एंड एडवांस्ड बायोमटेरियल्स (CeNTAB) और शस्त्र विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च इन इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (CARISM) के  क्रमशः डॉ. पी मीरा और डॉ. पी बृन्दा की देखरेख में किया गया था.
अध्यय के मुख्य निष्कर्ष
दरभा घास के खमीर बनाने के गुण की खोज के क्रम में शोधकर्ताओँ ने दरभा घास, लेमन ग्रास, बरमुडा ग्रास और बैंम्बू ग्रास समेत घास के पांच उष्णकटिबंधीय प्रजातियों को गाय के दही में रखा और पाया कि यह आसानी से खमीर में बदल सकता है.
उन्हें  दरभा घास के सम्बन्ध में जो अन्य तथ्य ज्ञात हुए वे हैं -
दरभा घास के इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोस्कोपी ने जबरदस्त नैनो– पैटर्न और वर्गीकृत या माइक्रो संरचना दिखाया जबकि यह बात अन्य घासों में नहीं थी.
वर्गीकृत सतह सुविधाओं (हिरैरकल सरफेस फीचर्स) में दरभा घास अकेला था जिसने बड़ी भारी संख्या में बैक्टिरिया को आकर्षित करते पाया गया. ये बैक्टिरिया दही के जमने के लिए जिम्मेदार हैं.
 दरभा का इस्तेमाल हानिकारक रसायनिक परिरक्षकों (प्रिजर्वेटिव्स) के स्थान पर प्राकृतिक खाद्य परिरक्षक के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

इसके अलावा दरभा घास पर वर्गीकृत नैनो पैटर्न्स स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अनुप्रयोग खोज सकते हैं जहां जीवाणुहीन स्थितियां जरूरी होती हैं.
वैदिक काल के दौरान दरभा घास का प्रयोग
दरभा घास (डेस्मोटाचा बिपिन्नाटा) वैदिक शास्त्रों में पवित्र सामग्री के तौर पर माना जाता है और धार्मिक अनुष्ठानों में इसे शुद्ध करने वाला पदार्थ बताया गया है.
ग्रहण के दौरान, दरभा घास को खाद्य वस्तुओं में खमीर उठाने के लिए डाला जाता है और ग्रहण के समाप्त होने के बाद उसे हटा लिया जाता था.
वैदिक काल में दरभा घास का प्रयोग कीटाणुनाशक के तौर पर किया जाता था क्योंकि यह एकमात्र ऐसी घास थी जो ग्रहण के दौरान कीटाणुनाशक के रूप में इस्तेमाल की जा सकता थी.
ग्रहण के दौरान नीले और पराबैगनी विकिरण जो अपने प्राकृतिक असंक्रमित प्रकृति के लिए जाने जाते हैं, पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होते .
परिणामतः ग्रहण के दौरान खाद्य उत्पादों में अनियंत्रित सूक्ष्म जीवों का विकास हो जाता है.

विदित हो कि हिन्दू संस्कृति में इस दरभा घास को दूर्वा(दूब) के नाम से जाना जाता है.

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