साहित्य अकादमी ने 24 जून 2015 को भाषा पुरस्कारों एवं युवा पुरस्कारों की घोषणा की.
पुरस्कारों के अंतर्गत क्लासिकल और मध्यकालीन साहित्य में योगदान हेतु वर्ष 2013 के लिए (दक्षिणी क्षेत्र) डॉ. के. मीनाक्षी सुंदरम और 2014 (पूर्वी क्षेत्र) के लिए आचार्य मुनिश्वर झा को चुना गया है.
कुमाऊंनी बोली में योगदान के लिए चारू चंद्र पांडे एवं मथुरादत्त मठपाल को संयुक्त रूप से भाषा सम्मान दिया जाएगा. भाषा पुरस्कारों में विजेता को 1 लाख रूपए नकद तथा ट्रॉफी दी जाती है, संयुक्त विजेता की स्थिति में राशि दोनों विजेताओं द्वारा आपस में बांट ली जाएगी.
मीनाक्षी सुंदरम का जन्म वर्ष 1925 में हुआ, वे तमिल ग्रन्थ सिलापत्तिकरम की ज्ञाता हैं तथा उनका तिरुकुरल पर विभिन्न निबन्धों तथा मध्यकालीन साहित्य में विशेष योगदान है.
आचार्य मुनीश्वर झा का जन्म 1928 में हुआ, वे अध्यापक तथा शिक्षाविद हैं तथा वे बिहार में कामेश्वर सिंह दरबंघा संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति भी रहे. उनका संस्कृत भाषा के लिए अतुल्नीय योगदान है जिसके लिए उन्हें वर्ष 2006 में राष्ट्रपति सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है.
युवा पुरस्कार 2015
साहित्य अकादमी द्वारा 23 भाषाओं के लिए युवा पुरस्कारों की भी घोषणा की गई है. इनमें 13 कविता संग्रह, 3 उपन्यास, 6 कहानी संग्रह और एक साहित्यिक समालोचना के लिए यह पुरस्कार दिए जाएंगे.
हिंदी में इंदिरा डांगी और अंग्रेजी में शौभेंद्र शेखर को उपन्यास के लिए तथा उर्दू में अमीर ईमाम को कविता संग्रह के लिए चुना गया है.
इसके अलावा शेर जंग गर्ग को हिंदी में, बानो सरताज को उर्दू और निवेदिता सुब्रमणियम को अंग्रेजी में साहित्य अकादमी के बाल पुरस्कार दिए जाएंगे.
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