राजस्थान उच्च न्यायालय ने 21 फरवरी 2015 को दिये अपने एक निर्णय में स्कूल-कॉलेज खोलने हेतु शौचालय होने को अनिवार्य शर्त बताया. न्यायालय ने बिना शौचालय स्कूल-कॉलेज खोलने पर सरकार द्वारा इसको मान्यता या अनुमति नहीं देने का निर्देश दिया. इसके साथ ही न्यायालय ने सभी स्कूलों में कर्मचारी, छात्र और छात्रा तीनों के लिए अलग शौचालय बनाने तथा एक माह में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग नियुक्त करने के निर्देश दिए.
राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी व न्यायाधीश प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने राधा शेखावत की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया. याचिका में स्कूलों में शौचालय नहीं होने के कारण बालिकाओं के स्कूल ड्रॉप आउट होने का मुद्दा उठाया गया था.
उपरोक्त के साथ ही राजस्थान उच्च न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस मामले में निगरानी करे. साथ ही सरपंच और स्कूल प्रबन्ध कमेटी की देखरेख में कार्य हों, ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल के कार्य से सम्बन्घित बजट आदि की शिकायत होने पर विकास अधिकारी तथा शहरी क्षेत्र के स्कूल के बारे में प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी को जानकारी दी जाए. जलदाय विभाग शौचालयों में पानी की व्यवस्था करे. प्रशासन शौचालयों पर छत और ड्रेनेज की व्यवस्था सुनिश्चित करे.
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