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हिन्दी भाषा में संविधान की विषय वस्तु

हिन्दी भाषा में संविधान के प्राधिकृत विषय वस्तु के साथ अनुच्छेद 394 कार्यवाही करता है।हिन्दी भाषा में संविधान के प्राधिकृत विषय वस्तु के साथ अनुच्छेद 394 कार्यवाही करता है। संविधान में हिंदी भाषा की कोई भी प्राधिकृत विषय वस्तु प्रदान नहीं की गयी है। 58 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1987 ने संविधान के XXII भाग में अनुच्छेद 394-ए को शामिल किया है।
Dec 21, 2015 16:17 IST
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हिन्दी भाषा में संविधान के प्राधिकृत विषय वस्तु के साथ अनुच्छेद 394 कार्यवाही करता है।

संवैधानिक प्रावधान

संविधान में हिंदी भाषा की कोई भी प्राधिकृत विषय वस्तु प्रदान नहीं की गयी है। 58 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1987 ने संविधान के XXII भाग में अनुच्छेद 394-क को शामिल किया है।  अनुच्छेद 394-क के प्रावधान निम्नवत् हैं:

1)  इस तरह का प्रकाशन राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र के अन्दर होगा:

क) संविधान सभा के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित हिंदी भाषा में इस संविधान का अनुवाद, हिन्दी भाषा में केंद्रीय अधिनियमों की आधिकारिक विषय वस्तु में अपनायी गयी भाषा, शैली और शब्दावली में संशोधन करना आवश्यक हो सकता है और इस तरह के प्रकाशन से पहले संविधान के सभी संशोधनों को शामिल करना होगा और;

(ख) अंग्रेजी भाषा में किए गए इस संविधान के हर संशोधन का हिंदी भाषा में अनुवाद।

2) संविधान और इसके प्रकाशित हर संशोधन का अनुवाद अंग्रेजी भाषा के मूल पाठ के अनुरूप ही एक अर्थ वाला होना चाहिए।

यदि अनुवाद के किसी भी भाग का अनुवाद करने में कोई भी कठिनाई उत्पन्न होती है तो राष्ट्रपति को उसमें उपयुक्त संशोधन करने का अधिकार होगा।

(3) संविधान का अनुवाद और इसके प्रत्येक अनुच्छेद के तहत प्रकाशित इसके हर संशोधन को सभी प्रयोजनों, हिन्दी में प्राधिकृत विषय वस्तु के लिए माना जाएगा।

58वें संविधान संशोधन की आवश्यकता

58 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1987 के अनुसार, अधिनियम के लिए उद्देश्य और कारण निम्नवत् हैं:

अंग्रेजी में भारत के संविधान को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था। संविधान सभा के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित संविधान का हिंदी अनुवाद भी 1950 में संविधान सभा के अध्यक्ष द्वारा पारित किए प्रस्ताव के साथ संविधान सभा द्नारा अपनाये गए संकल्प के अनुसार प्रकाशित हुआ था।

बाद के सभी संशोधनों को शामिल करके हिन्दी में संविधान की एक आधिकारिक विषय वस्तु के प्रकाशन की एक सामान्य मांग हमेशा रही है। कानूनी प्रक्रिया में इसके उपयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए भी संविधान की एक आधिकारिक विषय वस्तु होना जरूरी है।  संविधान का कोई भी हिंदी संस्करण केवल संविधान सभा द्वारा प्रकाशित हिंदी अनुवाद के अनुरूप ही नहीं होना चाहिए बल्कि यह हिन्दी में केंद्रीय अधिनियमों की आधिकारिक विषय वस्तु में अपनायी गयी भाषा, शैली और शब्दावली के अनुरूप होना चाहिए। इसलिए इसमें भारत के राष्ट्रपति को सशक्त बनाने के लिए संविधान में संशोधन को प्रकाशित करने का प्रस्ताव रखा है। अपने अधिकार (राष्ट्रपति) के तहत संविधान सभा के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित हिंदी में संविधान का अनुवाद केंद्रीय अधिनियमों की आधिकारिक विषय वस्तु में अपनायी गयी भाषा, शैली और शब्दावली के अनुरूप आवश्यक है। राष्ट्रपति को अंग्रेजी में किए गए संविधान के हर संशोधन का हिंदी में अनुवाद प्रकाशित करने के लिए भी अधिकृत किया जाएगा।

58वां संविधान संशोधन

संवैधानिक संशोधन अधिनियम के प्रावधान इस प्रकार हैं:

1.  इसके भाग XXII के तहत संविधान में अनुच्छेद 394-क को शामिल किया गया है।

2.  यह संविधान सभा के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित संविधान का हिंदी में अनुवाद प्रकाशित करने का अधिकार देकर राष्ट्रपति को सशक्त बनाता है।

3.  यह हिन्दी में संविधान में संशोधन प्रकाशित करने के लिए राष्ट्रपति को सशक्त बनाता है।